कर्नाटक के बेलगावी में चुनावी मतदाता सूची में कथित हेरफेर और वैध नागरिकों के नाम विलोपित करने की कोशिश के गंभीर मामले में स्थानीय अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस मामले में कानूनी शिकंजे में फंसे भाजपा नेता डॉ. रवि पाटिल को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए बेलगावी की दूसरी अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने सशर्त जमानत स्वीकृत कर दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया में सेंध लगाकर लगभग 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का षड्यंत्र रचा था, जिसके चलते क्षेत्र में भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
प्रशासनिक शिकायत और एफआईआर का पूरा घटनाक्रम
इस पूरे मामले की शुरुआत स्थानीय वार्ड 12 के बीएलओ द्वारा दी गई शिकायत के बाद हुई थी। बीएलओ की आधिकारिक तहरीर पर बेलगावी के मार्केट पुलिस स्टेशन में अपराध संख्या 218/2026 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्राथमिकी में डॉ. रवि पाटिल के अलावा विजय हॉस्पिटल से जुड़े स्टाफ प्रशांत मुंदिनमनी, शंकर नायक तथा अन्य 20 से 25 अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया था। आपराधिक मामला दर्ज होते ही भाजपा नेता गिरफ्तारी के अंदेशे से भूमिगत हो गए थे और अग्रिम राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
फॉर्म 7 और फर्जी दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप
पुलिस जांच में एकत्रित किए गए तथ्यों के अनुसार, यह घटनाक्रम 22 सितंबर को बेलगावी स्थित वीरभद्रनगर के मतदान केंद्र संख्या 195 और 196 से संबंधित है। आरोप पत्र के अनुसार, आरोपियों ने फॉर्म नंबर 7 की निर्धारित व्यवस्था का दुरुपयोग किया था। इस कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करते हुए जीवित और पूरी तरह से वैध मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा स्थानांतरित दिखाकर उनके नाम एसआईआर प्रणाली के माध्यम से कटवाने की साजिश रची गई थी।
गंभीर कानूनी धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस
मार्केट पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में आरोपियों के विरुद्ध फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने, प्रशासनिक मशीनरी को भ्रामक जानकारी देने और शहर की शांति व्यवस्था को खतरे में डालने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं 318(4), 336(3), 336(4), 353, 61(2), 3(5), 3(7), 192 और 190 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि डॉ. रवि बी. पाटिल ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बेलगावी उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमाई थी, यद्यपि उस चुनावी मुकाबले में उन्हें पराजय झेलनी पड़ी थी। अब अदालत की ओर से उन्हें जांच में सहयोग की शर्तों के साथ राहत प्रदान की गई है।





















