भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस के तहत शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामलों को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या पेश की है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि बीएनएस की धारा 69 के तहत दर्ज किया जाने वाला यह विशिष्ट अपराध महिलाओं के खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता। इस आदेश के साथ ही अदालत ने एक आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज मामले में धारा 69 की कार्यवाही को आंशिक रूप से खारिज कर दिया, जिससे इस कानूनी प्रावधान के दायरे को लेकर जारी भ्रम समाप्त हो गया है।
महिला आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही आंशिक रूप से रद्द
कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनंत रामनाथ हेगड़े की पीठ के समक्ष इस विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। मामले के कानूनी पहलुओं का परीक्षण करने के बाद न्यायमूर्ति हेगड़े ने फैसला सुनाया कि चूंकि याचिकाकर्ता एक महिला है, इसलिए उस पर छलपूर्वक अथवा विवाह का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध स्थापित करने का आरोप कानूनी रूप से मान्य नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह राहत केवल धारा 69 के तहत दी है, जबकि याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ दर्ज अन्य गंभीर आरोपों की जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। ब्लैकमेलिंग और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से जुड़े प्रावधानों के तहत मामले की जांच पूर्ववत जारी रहेगी।
विवाह का झूठा आश्वासन और ब्लैकमेलिंग का आरोप
यह पूरा कानूनी विवाद एक शिकायतकर्ता महिला की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि याचिकाकर्ता महिला के पति ने उसके साथ नजदीकी संबंध बनाए थे। पुरुष ने कथित तौर पर यह दावा किया था कि उसके अपनी वैवाहिक पत्नी के साथ रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं और वह भविष्य में शिकायतकर्ता से विवाह कर लेगा। इस कथित वादे के आधार पर दोनों के बीच संबंध बने, लेकिन बाद में विवाद खड़ा हो गया।
निजी तस्वीरें साझा करने और धमकाने का मामला
शिकायतकर्ता ने केवल पुरुष पर ही नहीं, बल्कि उसकी पत्नी पर भी साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए थे। प्राथमिकी के अनुसार, पति और पत्नी दोनों ने मिलकर पीड़िता की निजी तस्वीरें और वीडियो उसकी सहमति के बिना अन्य लोगों को साझा किए। इसके साथ ही इन निजी तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी प्रयास किया गया। जब यह मामला पुलिस तक पहुंचा, तो दोनों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पति के साथ नामजद होने के बाद पत्नी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां अदालत ने धारा 69 के लागू होने की सीमा को स्पष्ट कर दिया।


















