सड़क पर घंटों रेंगते वाहनों की समस्या से जूझ रहे बेंगलुरु के बाशिंदों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कर्नाटक प्रशासन ने शहर के दो प्रमुख व्यस्त मार्गों पर आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर नेटवर्क बिछाने की योजना को रफ्तार दी है। इस विशाल परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद वाहन चालकों को जाम से मुक्ति तो मिलेगी, मगर इस सुगम सफर की एवज में उन्हें अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ेगी। राज्य के वित्त विभाग की आधिकारिक योजना के तहत इस नए फ्लाईवे ढांचे पर आवागमन पूरी तरह यूजर चार्ज यानी पथकर व्यवस्था पर निर्भर करेगा। हालांकि राहत की बात यह रखी गई है कि जो लोग केवल छोटी दूरी का सफर तय करेंगे, उन्हें इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
बी-स्माइल के जरिए बूट मॉडल पर शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया
शहरी विकास विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार इस पूरी अवसंरचना को बेंगलुरु स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) के तत्वावधान में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस संबंध में दो अलग-अलग टेंडर औपचारिक तौर पर आमंत्रित किए जा चुके हैं। कुल 46.5 किलोमीटर की इस संयुक्त लंबाई वाले प्रोजेक्ट को बिल्ड ऑन ऑपरेट ट्रांसफर (BOOT) व्यवस्था के तहत निजी सहभागिता से विकसित किया जाना तय हुआ है। परियोजना को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से कुल निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार सीधे तौर पर उपलब्ध कराएगी, जबकि शेष 60 फीसदी पूंजी विकासकर्ता टोल संग्रहण के जरिए सड़क का संचालन करके वसूल करेंगे।
दो प्रमुख दिशाओं में बिछेगा ओवरहेड सड़कों का जाल
प्रस्तावित योजना के अंतर्गत शहर को दो अलग-अलग हिस्सों में जोड़ने वाले कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इनमें से पहला खंड यशवंतपुर इलाके से शुरू होकर केआरपुरम तक जाएगा। लगभग 28 किलोमीटर की लंबाई वाला यह मार्ग शहर के उत्तर और पूर्वी हिस्सों के बीच की आवाजाही को बेहद आसान बना देगा। वहीं दूसरा गलियारा मारेनहल्ली मेन रोड को कनकपुरा मेन रोड से सीधे जोड़ेगा, जिसकी कुल माप 18.5 किलोमीटर तय की गई है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब कोई वाहन चालक इन एलिवेटेड मार्गों पर 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा, तभी उस पर टोल लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के भीतर 7 किलोमीटर के एक अन्य छोटे एलिवेटेड कॉरिडोर का भी मसौदा तैयार है, मगर 10 किलोमीटर की न्यूनतम सीमा पूरी न होने की वजह से उस पर टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा।
करीब 5,820 करोड़ रुपये का कुल बजट अनुमान
वित्त विभाग की वित्तीय गणनाओं के मुताबिक दोनों कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 5,820 करोड़ रुपये का कुल खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। इस पूरी लागत में से राज्य सरकार की हिस्सेदारी लगभग 2,200 करोड़ रुपये की बैठेगी। खास बात यह है कि यह सरकारी सहायता केवल निर्माण के लिए तय 40 फीसदी अनुदान का हिस्सा है और भूमि अधिग्रहण में होने वाला खर्च इससे पूरी तरह अलग रहेगा।
लागत के अलग-अलग ब्योरे पर नजर डालें तो मारेनहल्ली से कनकपुरा मेन रोड तक बनने वाले 18.5 किलोमीटर के रूट पर कुल 2,283.19 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है, जिसमें सरकार अपने खजाने से 40 प्रतिशत यानी 913.29 करोड़ रुपये का योगदान देगी। दूसरी ओर यशवंतपुर से केआरपुरम के 28 किलोमीटर लंबे रूट का निर्माण बजट करीब 3,536.89 करोड़ रुपये तय किया गया है। इस हिस्से के लिए प्रांतीय सरकार 40 प्रतिशत की दर से 1,414.76 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करेगी।
आखिर 10 किलोमीटर के भीतर टोल वसूली पर क्यों है रोक
अक्सर यह सवाल उठता है कि इन नए फ्लाईवे पर 10 किलोमीटर तक के सफर को मुफ्त क्यों रखा गया है। इसका कानूनी आधार राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में छिपा है। ये नियम शहरी निकाय अथवा नगर पालिका की सीमा के भीतर टोल प्लाजा स्थापित करके पथकर एकत्र करने की अनुमति नहीं देते। इसी संदर्भ में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी साल 2026 में फैसला सुनाया था कि नगर निकाय के 5 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह का टोल वसूलना गैरकानूनी है। वहीं एनएचएआई की मौजूदा नीति 9.9 किलोमीटर की परिधि में टैक्स वसूली पर प्रतिबंध लगाती है। इसी कानूनी बाध्यता के चलते प्रशासन ने तय किया है कि एलिवेटेड कॉरिडोर पर 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाले वाहनों से ही शुल्क लिया जाएगा।



















