जेल शब्द सुनते ही आमतौर पर ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें, कड़ा पहरा और सख्त अनुशासन वाली जिंदगी की तस्वीर जेहन में उभरती है। हालांकि जब भी कोई रसूखदार नाम या प्रभावशाली शख्सियत सलाखों के पीछे पहुंचती है, तो कई बार कहानी बिल्कुल अलग नजर आती है। जेल परिसर में मोबाइल फोन मिलने की घटनाएं, लॉन में बैठकर बेफिक्र होकर सिगरेट पीते कैदियों की वायरल तस्वीरें, अलग से किचन चलाए जाने के दावे और बार-बार मिलने वाली पैरोल की छूट अक्सर व्यवस्था पर सवाल उठाती रहती हैं। यही कारण है कि कारागार के भीतर मिलने वाले वीआईपी कल्चर पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। इस पूरे मुद्दे पर ताजा विवाद पूर्व JDS सांसद प्रज्वल रेवन्ना के मामले से गर्माया है, जिनके पास बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में औचक निरीक्षण के दौरान कथित रूप से मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
परप्पना अग्रहारा में प्रज्वल रेवन्ना के पास मिला मोबाइल फोन
पूर्व JDS सांसद प्रज्वल रेवन्ना रेप के मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में उस समय हड़कंप मच गया जब क्राइम ब्रांच की टीम ने जेल परिसर के भीतर अचानक छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान प्रज्वल रेवन्ना के पास से कथित तौर पर एक चालू मोबाइल फोन बरामद हुआ। जेल के अंदर यह प्रतिबंधित उपकरण किस तरह और किसकी मदद से पहुंचा, इसकी परतें खोलने के लिए आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया गया है। अगर जांच में ये आरोप सच पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ जेल की सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करेगा बल्कि यह भी साफ करेगा कि रसूखदार कैदी कानून की कस्टडी में रहने के बावजूद किस तरह अनुचित सुविधाएं हासिल कर लेते हैं।
कन्नड़ अभिनेता दर्शन की लॉन तस्वीर और वीडियो कॉल का विवाद
प्रज्वल रेवन्ना से जुड़ा यह मामला कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि कर्नाटक की जेलों का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2024 में कन्नड़ अभिनेता दर्शन का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। रेणुकास्वामी हत्याकांड में न्यायिक हिरासत के दौरान दर्शन की एक ऐसी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया था। इस फोटो में अभिनेता जेल के लॉन में दूसरे कैदियों के साथ आराम से बैठकर सिगरेट और चाय का आनंद लेते दिख रहे थे। इसके कुछ ही समय बाद एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें दर्शन द्वारा जेल के अंदर से वीडियो कॉल किए जाने का दावा किया गया। इस सार्वजनिक आक्रोश के बाद कर्नाटक सरकार ने सख्त रुख अपनाया और ढिलाई बरतने वाले जेल अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की। मामले की विभागीय जांच पूरी होने के बाद दर्शन और उनके अन्य सह-आरोपियों को राज्य की अलग-अलग जेलों में ट्रांसफर कर दिया गया।
वीके शशिकला के लिए अलग रसोई और रिश्वत के आरोप
दर्शन के विवाद से कुछ साल पहले, साल 2017 में इसी परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से जुड़ा एक और बेहद गंभीर मामला सामने आया था। AIADMK नेता वीके शशिकला उस दौरान आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद अपनी जेल की सजा काट रही थीं। उस समय की तत्कालीन DIG जेल डी. रूपा ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए आरोप लगाया था कि शशिकला को जेल के भीतर खास वीआईपी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन आरोपों में यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि जेल परिसर के अंदर केवल शशिकला के भोजन के लिए एक अलग विशेष किचन चलाया जा रहा था। इसके अलावा रिपोर्ट में यह संगीन दावा भी किया गया था कि इन गैर-कानूनी सहूलियतों को पाने के लिए जेल प्रशासन और अधिकारियों को भारी रिश्वत दी गई थी। इस खुलासे के बाद उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई और रसूखदार बंदियों को मिलने वाले अनुचित लाभ पर देशव्यापी बहस शुरू हो गई थी।
तिहाड़ जेल से चार्ल्स शोभराज का दुस्साहसिक पलायन
जेल के अंदर प्रभावशाली कैदियों को मिलने वाली रियायतों का इतिहास दशकों पुराना है। इसका सबसे चर्चित और हैरान करने वाला उदाहरण कुख्यात अपराधी चार्ल्स शोभराज के मामले में देखने को मिलता है, जब वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था। शोभराज ने जेल अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत देकर अपने लिए कई तरह की आरामदायक सुविधाएं और आजादी हासिल कर रखी थी। साल 1986 में उसने इन्हीं सहूलियतों का फायदा उठाकर जेल से भागने की एक सनसनीखेज साजिश रची। उसने जेल कर्मचारियों और साथी कैदियों के लिए अपने जन्मदिन की पार्टी आयोजित करने का झांसा दिया। पार्टी के दौरान परोसी गई खाने-पीने की चीजों में उसने भारी मात्रा में नींद की गोलियां मिला दीं। जैसे ही पहरेदार और कैदी बेहोश हुए, चार्ल्स शोभराज आसानी से तिहाड़ जेल के मुख्य दरवाजे से बाहर निकल गया। बाद में सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे गोवा से दोबारा गिरफ्तार किया था।
गुरमीत राम रहीम की बार-बार पैरोल पर उठते सवाल
प्रज्वल रेवन्ना, दर्शन, वीके शशिकला और चार्ल्स शोभराज के मामले जहां जेल के भीतर मिलने वाली भौतिक सुविधाओं और अवैध सामान से जुड़े हैं, वहीं डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का मामला अस्थायी रिहाई के नियमों से जुड़ा है। साल 2017 में रेप और हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से गुरमीत राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी सजा काट रहा है। हालांकि, सजा की अवधि के दौरान उसे बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं। मई 2026 में वह एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से 30 दिनों की पैरोल पर बाहर आया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में जेल जाने के बाद से यह उसकी 16वीं अस्थायी रिहाई थी। इतनी बार जेल से बाहर आने की इजाजत मिलने के कारण पैरोल व्यवस्था, जेल प्रशासन की निष्पक्षता और सभी कैदियों के लिए कानून के समान इस्तेमाल को लेकर न्यायविदों और आम जनता के बीच तीखी चर्चा बनी हुई है।



















