अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की जबरदस्त मांग के चलते कनाडाई डॉलर लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है। बैंक ऑफ कनाडा के नरम रुख और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट ने लूनी के नाम से पहचानी जाने वाली कनाडाई मुद्रा की स्थिति को और कमजोर कर दिया है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में USD/CAD जोड़ी 1.4235 के आसपास स्थिर बनी रही, जिससे पिछले चार सप्ताह के दौरान दर्ज की गई जोरदार बढ़त का दायरा और मजबूत हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर बने रहने और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। समग्र आर्थिक और तकनीकी माहौल को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि मुद्रा जोड़ी में तेजी की गुंजाइश बनी हुई है, हालांकि अल्पकालिक गति संकेतकों में कुछ थकावट के संकेत भी उभर रहे हैं।
भू-राजनीतिक खींचतान और अमेरिकी नीति से डॉलर को मिला समर्थन
मध्य पूर्व संकट से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा दिए गए सात दिवसीय युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद दोबारा बड़े सैन्य अभियानों का आदेश दे सकते हैं। इस घटनाक्रम ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को ऊंचा बनाए रखा है। अनिश्चितता के दौर में वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी मुद्रा के खरीदारों को व्यापक समर्थन मिल रहा है और USD/CAD जोड़ी की तेजी को मजबूती मिल रही है।
बाजार में इस जोड़ी का निकट अवधि का रुझान सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन तकनीकी संकेतक लगातार खिंचाव दर्शा रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI (14) इस समय 78 के आसपास ओवरबॉट क्षेत्र में मंडरा रहा है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार जब किसी परिसंपत्ति का RSI 70 के स्तर को पार कर जाता है, तो उसमें खरीदारी की अत्यधिक स्थिति मानी जाती है। इसका सीधा संकेत है कि मौजूदा ऊंचे स्तरों पर बिना रुके निरंतर गति जारी रहने के बजाय कीमतों में एक सुधारात्मक ठहराव या हल्का पुलबैक देखने को मिल सकता है। वर्तमान वास्तविक आंकड़ों के आधार पर USD/CAD 1.42 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 1.42 से 0.31 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 1.35 से 1.42 रहा है। तकनीकी संकेतकों में MACD 0.01 पर है जबकि सिग्नल 0.00 पर बना हुआ है, जो सकारात्मक रुझान की पुष्टि करता है। मूविंग एवरेज में EMA20 1.40, EMA50 1.40 और EMA200 1.39 पर है, जो लंबी अवधि के अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस को उजागर करता है। बॉलिंगर बैंड (20,2) 1.37 से 1.43 के बीच फैला है, जबकि ADX (14) 37 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार का संकेत देता है। इसके अलावा स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 99 और सिग्नल लाइन 96 पर है, जबकि ATR (14) 0.01 पर बना हुआ है। 20 दिनों का प्रमुख सपोर्ट 1.38 और रेजिस्टेंस 1.42 पर स्थित है, जिसमें धुरी बिंदु 1.42, रेजिस्टेंस R1 1.42, R2 1.43 तथा सपोर्ट S1 और S2 दोनों 1.42 पर हैं।
कनाडाई अर्थव्यवस्था और मुद्रा को प्रभावित करने वाले बुनियादी कारक
कनाडाई डॉलर के मूल्य निर्धारण में कई बुनियादी कारक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इनमें बैंक ऑफ कनाडा द्वारा तय की जाने वाली आधिकारिक ब्याज दरें, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, कनाडा के आर्थिक स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति, मुद्रास्फीति के आंकड़े और व्यापार संतुलन शामिल हैं। व्यापार संतुलन सीधे तौर पर कनाडा के निर्यात और आयात के कुल मूल्य के अंतर को मापता है। इन कारकों के अलावा वैश्विक बाजार का मिजाज भी बेहद अहम होता है। जब निवेशक जोखिम भरे संपत्तियों में पूंजी लगाने को उत्सुक होते हैं जिसे रिस्क-ऑन माहौल कहा जाता है, तो कनाडाई डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब बाजार में घबराहट होती है और सुरक्षित निवेश की तलाश होती है, तो कनाडाई डॉलर कमजोर पड़ता है। इसके साथ ही कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार अमेरिका है, इसलिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य भी कनाडाई मुद्रा की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
बैंक ऑफ कनाडा वाणिज्यिक बैंकों के बीच आपसी ऋण की दरों को नियंत्रित करके अर्थव्यवस्था में नकदी की लागत तय करता है। इस नीतिगत दर का असर समाज के प्रत्येक नागरिक और कारोबार के लिए लागू होने वाली ब्याज दरों पर पड़ता है। केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य ब्याज दरों को आवश्यकतानुसार बढ़ाकर या घटाकर मुद्रास्फीति को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। जब बैंक ऑफ कनाडा अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें रखता है, तो यह कनाडाई डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि इससे वैश्विक पूंजी आकर्षित होती है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक बाजार में ऋण की उपलब्धता को प्रभावित करने के लिए मात्रात्मक सहजता यानी क्वांटिटेटिव ईजिंग और मात्रात्मक सख्ती यानी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का सहारा भी ले सकता है। मात्रात्मक सहजता से मुद्रा की आपूर्ति बढ़ती है जिससे कनाडाई डॉलर पर नकारात्मक दबाव आता है, जबकि मात्रात्मक सख्ती मुद्रा आपूर्ति को सीमित करके कनाडाई डॉलर को मजबूती प्रदान करती है।
कच्चे तेल का व्यापार संतुलन और मुद्रास्फीति की गतिशीलता
कच्चे तेल की कीमतें कनाडाई डॉलर के उतार-चढ़ाव में सबसे निर्णायक घटकों में से एक हैं। पेट्रोलियम कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव का सीधा और तत्काल प्रभाव कनाडाई डॉलर के मूल्य पर देखा जाता है। सामान्य तौर पर जब तेल की कीमतें चढ़ती हैं, तो कनाडाई मुद्रा की कुल मांग में वृद्धि होने के कारण कनाडाई डॉलर मजबूत होता है। इसके उलट जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो कनाडाई अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा की कम प्राप्तियां होती हैं जिससे मुद्रा कमजोर पड़ती है। तेल की ऊंची कीमतें कनाडा के व्यापार संतुलन को सकारात्मक या अधिशेष की स्थिति में लाने की संभावना को भी काफी बढ़ा देती हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से घरेलू मुद्रा को सहारा मिलता है।
मुद्रास्फीति को पारंपरिक रूप से किसी भी मुद्रा के लिए नकारात्मक कारक माना जाता रहा है क्योंकि यह पैसे की क्रय शक्ति को कम करती है। लेकिन आधुनिक वित्तीय युग में सीमा पार पूंजी प्रवाह के नियमों में आई ढील के बाद यह स्थिति काफी हद तक बदल चुकी है। जब किसी देश में मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो वहां के केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी करनी पड़ती है। अधिक रिटर्न की तलाश में रहने वाले अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपना पैसा उन देशों में लगाना पसंद करते हैं जहां ब्याज दरें आकर्षक हों। इस प्रक्रिया से स्थानीय मुद्रा की मांग में तेजी से इजाफा होता है, जो कनाडा के संदर्भ में कनाडाई डॉलर को मजबूती की दिशा में धकेलता है।
कनाडाई डॉलर की दिशा तय करने में सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI सूचकांक, रोजगार रिपोर्ट और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण जैसे व्यापक आर्थिक आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जब घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन करती है, तो इससे न केवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़ता है बल्कि बैंक ऑफ कनाडा को ब्याज दरें ऊंची रखने का प्रोत्साहन भी मिलता है, जिससे मुद्रा और सशक्त होती है। इसके विपरीत यदि आर्थिक आंकड़े सुस्त या निराशाजनक आते हैं, तो कनाडाई डॉलर में कमजोरी आने की प्रबल संभावना बन जाती है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में व्यापक हलचल और डॉलर का वर्चस्व
अमेरिकी डॉलर के बढ़ते दबदबे का असर केवल कनाडाई डॉलर तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर होते हुए 0.6900 के मध्य स्तर से ठीक नीचे कारोबार करता रहा। अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE मूल्य सूचकांक के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं को कमजोर किया है, लेकिन कच्चे तेल से प्रेरित मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है, जो रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सतर्क दृष्टिकोण के साथ मिलकर AUD/USD जोड़ी के लिए बाधा बना हुआ है।
इसी तरह जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY ने पिछले दिन के डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए गुरुवार को अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे तक छलांग लगाई है। अमेरिकी PCE के अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के बावजूद तेल आधारित मुद्रास्फीति जोखिमों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकाए रखा है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते गतिरोध से सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त बढ़त मिल रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि की अटकलें और मुद्रा बाजार में सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं येन की गिरावट को सीमित कर सकती हैं, जिससे डॉलर खरीदारों को कुछ सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
स्वर्ण बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। सोने की कीमतों में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से शुरू हुआ पुलबैक और आगे बढ़ गया। ब्याज न देने वाली संपत्तियों के प्रति घटता आकर्षण और अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची यील्ड सोने पर भारी पड़ रही है। अमेरिकी PCE आंकड़ों के बावजूद तेल से उपजी महंगाई के खतरे ने बॉन्ड यील्ड को सहारा दिया है, जबकि भू-राजनीतिक उथल-पुथल सुरक्षित ठिकाने के तौर पर अमेरिकी डॉलर की तेजी को बनाए हुए है, जिससे पीली धातु दबाव में कारोबार कर रही है।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठकें और यूरोजोन मुद्रास्फीति का परिदृश्य
अमेरिकी ब्याज दरों के संदर्भ में वित्तीय बाजार के प्रतिभागियों ने अपनी उम्मीदों में उल्लेखनीय फेरबदल किया है। व्यापारियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अगली संभावित ब्याज दर वृद्धि के अनुमान को 28 अक्टूबर से खिसकाकर 9 दिसंबर कर दिया है। इस बदलाव को प्रभावित करने वाली मुद्रास्फीति रिपोर्ट में वास्तव में अगस्त की तुलना में जुलाई के आंकड़ों का असर अधिक दिखाई दिया। अगस्त के व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक के साथ जारी सरकारी वार्षिक संशोधन में जुलाई के कोर मुद्रास्फीति आंकड़े को, जिसमें खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतें शामिल नहीं होती हैं, 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। इस संशोधन ने निकट भविष्य में आक्रामक दरों की आवश्यकता को थोड़ा नरम किया है, लेकिन लंबी अवधि की चिंताएं अभी भी जस की तस हैं।
दूसरी ओर, यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो भी डॉलर के झटकों से अछूती नहीं रही है। EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि यूरोजोन में मुद्रास्फीति के नए झटके यूरो को अप्रत्याशित राहत प्रदान कर सकते हैं। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक फिसल गई थी और यह अपने जनवरी के उच्चतम स्तर 1.2082 से काफी नीचे बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की अनिश्चित आपूर्ति और केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग रुख के चलते आगामी हफ्तों में मुद्रा बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।
















