कर्नाटक के बागलकोट जिले के स्थानीय प्रशासन ने तेलंगाना की भाजपा नेता माधवी लता के जिले में दाखिल होने पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। बागलकोट के डिप्टी कमिश्नर संगप्पा ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से यह औपचारिक निषेधाज्ञा जारी की। माधवी लता को बागलकोट में आयोजित होने वाले हिंदू महा गणपति विसर्जन समारोह में एक मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में उनके आगमन से पूर्व ही प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की गई, जिसके बाद जिले की सीमाओं में उनके आने-जाने पर पाबंदी का फैसला लागू कर दिया गया।
प्रशासनिक आदेश और तय समय सीमा का विवरण
बागलकोट जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, माधवी लता के जिले में आने पर यह प्रतिबंध 23 सितंबर 2026 से प्रभावी होकर 23 अक्टूबर 2026 तक पूरे एक महीने की अवधि के लिए लागू रहेगा। डिप्टी कमिश्नर संगप्पा ने यह कदम सुरक्षा और शांति संबंधी औपचारिक सिफारिशों के आधार पर उठाया है। माधवी लता को बागलकोट नगर में आयोजित गणेश विसर्जन के बड़े धार्मिक आयोजन में एक वक्ता के रूप में जनता को संबोधित करना था। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने माधवी लता को उनके प्रवेश पर लगी इस पाबंदी की आधिकारिक सूचना ईमेल के माध्यम से औपचारिक रूप से भेज दी है ताकि वे तय अवधि के दौरान जिले का दौरा न करें।
पुलिस अधीक्षक की सिफारिश और प्रतिबंध का आधार
इस प्रतिबंध का निर्णय बागलकोट के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल द्वारा डिप्टी कमिश्नर को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के बाद लिया गया। पुलिस अधीक्षक ने अपने पत्र में चिंता व्यक्त की थी कि भाजपा नेता का पूर्व में विवादित और उत्तेजक भाषण देने का रिकॉर्ड रहा है, जिससे जिले में सार्वजनिक शांति भंग होने और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पुलिस अधीक्षक ने सिफारिश की थी कि गणेश उत्सव के संवेदनशील माहौल को देखते हुए उनके प्रवेश पर रोक लगाना आवश्यक है। डिप्टी कमिश्नर ने इसी पत्र की सिफारिशों को आधार बनाकर प्रवेश निषेध का आदेश जारी किया।
दर्ज मुकदमों और पुराने विवादों का उल्लेख
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल के पत्र में माधवी लता के विरुद्ध विभिन्न थानों में पूर्व में दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) का विस्तार से ब्योरा दिया गया था। इसमें विशेष रूप से उस घटना का संदर्भ दिया गया जब उन्होंने एक मस्जिद की दिशा में सांकेतिक रूप से तीर चलाने का अभिनय किया था, जिसे लेकर व्यापक विवाद हुआ था। पुलिस ने इन सभी मामलों और उनके भाषणों के प्रभाव का हवाला देते हुए शांति बनाए रखने के लिए रोक की मांग की थी। इससे पूर्व तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भी पुलिस ने माधवी लता को उस वक्त हिरासत में लिया था, जब वे एक 100 साल पुराने ग्राम देवता मंदिर को कथित रूप से तोड़े जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रही थीं।























