कर्नाटक राज्य में रसोई गैस उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और बॉटलिंग संयंत्रों की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता परखने के उद्देश्य से एक व्यापक प्रशासनिक अभियान संचालित किया गया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इस औचक निरीक्षण अभियान को 'मिशन निखार' का नाम दिया। इस विशेष अभियान के तहत लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के जांच दलों ने राज्यभर में कार्यरत विभिन्न एलपीजी बॉटलिंग यूनिट्स का औचक मुआयना किया। इस गहन पड़ताल के दौरान सामने आया कि हर चार में से एक रसोई गैस सिलेंडर में निर्धारित मात्रा के मुकाबले कम गैस भरी हुई थी। विभागीय जांच के उपरांत नियमों के उल्लंघन पर तीन मामले दर्ज किए गए और संबंधित इकाइयों से जुर्माना भी वसूला गया।
राज्यभर के 18 गैस बॉटलिंग संयंत्रों में जांच दल की दस्तक
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद के निर्देशों पर इस मुहिम को अंजाम दिया गया। लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के अधिकारियों ने 24 सितंबर, 2026 को पूरे कर्नाटक में 18 एलपीजी बॉटलिंग यूनिट्स पर औचक निरीक्षण की कार्रवाई की। इन 18 संयंत्रों में बीपीसीएल (BPCL), एचपीसीएल (HPCL) और आईओसीएल (IOCL) की चार-चार इकाइयां शामिल थीं। इसके अतिरिक्त टोटल एनर्जीज (Total Energies) की दो यूनिट्स तथा चार निजी क्षेत्र की बॉटलिंग इकाइयों में भी जांच दल पहुंचे। इस व्यापक निरीक्षण अभियान के दौरान चिन्हित 18 इकाइयों में से एक इकाई मौके पर बंद पाई गई।
जांचे गए 1530 सिलेंडरों के आंकड़े और जुर्माने की कार्रवाई
निरीक्षण प्रक्रिया के तहत अधिकारियों ने कुल 1,530 भरे हुए रसोई गैस सिलेंडरों के सटीक वजन की पड़ताल की। इस विस्तृत जांच में 1,148 सिलेंडरों (लगभग 75 प्रतिशत) में गैस की मात्रा घोषित स्तर के बराबर अथवा उससे अधिक दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ 382 सिलेंडरों (लगभग 25 प्रतिशत) में गैस की मात्रा घोषित स्तर से कम पाई गई। हालांकि जांच रिपोर्ट के अनुसार यह कमी स्वीकार्य त्रुटि सीमा (permissible error limit) के दायरे में ही दर्ज हुई। नियमों और पैमानों में विसंगति पाए जाने पर लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने तीन औपचारिक मामले दर्ज किए और उल्लंघनकर्ता बॉटलिंग इकाइयों से 79,000 रुपये का जुर्माना भी वसूल किया। इससे पहले सितंबर महीने में ही गुजरात के सूरत शहर में टैंकर से एलपीजी की गैर-कानूनी रिफिलिंग के एक बड़े नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसा गया था, जिसमें पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
उपभोक्ता अधिकारों पर मंत्री का रुख और वजन की गारंटी
बॉटलिंग संयंत्रों में की गई इस जांच के आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद मंत्री रिजवान अरशद ने स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सही मात्रा में रसोई गैस प्राप्त करना हर उपभोक्ता का बुनियादी अधिकार है। मंत्री के अनुसार 'मिशन निखार' दरअसल कर्नाटक के आम नागरिकों के लिए वजन और माप-तौल की प्रशासनिक गारंटी है। उन्होंने कहा, "नियमित निरीक्षण, नियमों के पालन और उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाकर हम हर लेन-देन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहते हैं।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक गैस उपभोक्ता के पास यह कानूनी अधिकार सुरक्षित है कि वह घर पर सिलेंडर की आपूर्ति के समय डिलीवरी कर्मी से उसका वजन करवा सके। मंत्री ने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने इस अधिकार का सक्रिय रूप से उपयोग करें और किसी भी किस्म की अनियमितता नजर आने पर लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से संपर्क करें।
घर पर डिलीवरी लेते समय उपभोक्ताओं के अधिकार और शिकायत का तरीका
भारत सरकार द्वारा 6 जून 2013 को जारी गजट अधिसूचना G.S.R. 359(E) के तहत लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 के नियम 18 में संशोधन किया गया था। इस वैधानिक प्रावधान के आधार पर प्रत्येक एलपीजी विपणन कंपनी और गैस वितरक के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे सिलेंडर पहुंचाने वाले हर डिलीवरी कर्मी को उपयुक्त वजन करने वाला उपकरण (तराजू या वेइंग मशीन) अवश्य उपलब्ध कराएं। इस व्यवस्था के मद्देनजर उपभोक्ताओं को डिलीवरी के समय सिलेंडर का वजन जांचने का पूरा अधिकार हासिल है। विभागीय परामर्श के मुताबिक उपभोक्ताओं को कुछ मुख्य सावधानियां बरतनी चाहिए
- डिलीवरी प्राप्त करने से पूर्व सिलेंडर पहुंचाने वाले कर्मी से स्वयं अपने समक्ष सिलेंडर का वजन तौलने का आग्रह करें।
- वेइंग स्केल अथवा वजन मशीन पर प्रदर्शित कुल वजन का मिलान सिलेंडर पर मुद्रित वजन विवरण से अनिवार्य रूप से करें।
- यदि सिलेंडर का वजन कम पाया जाता है अथवा डिलीवरी कर्मी के पास वजन मापने का उपकरण उपलब्ध नहीं है, तो उपभोक्ता डिलीवरी लेने से सीधे इनकार कर सकते हैं।
- अनियमितता पाए जाने पर उपभोक्ता लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800 599 1100 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं अथवा आधिकारिक ईमेल आईडी [email protected] पर लिखित संदेश भेज सकते हैं।
मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैस वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने और नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के लिए ऐसे औचक निरीक्षण भविष्य में भी नियमित समय अंतराल पर निरंतर जारी रहेंगे।



















