आगरा के आभूषण बाजारों में पीली धातु की बढ़ती कीमतों ने आम ग्राहकों के खरीदारी के तौर तरीकों पर गहरा असर डाला है. बढ़ते दाम के दबाव में लोग अब केवल पारंपरिक पीले सोने तक सीमित रहने के बजाय अपनी जेब और निजी प्राथमिकताओं के मुताबिक विविध प्रकार के आभूषण तलाश रहे हैं. खरीदारी के बदलते इस मिजाज से खुदरा काउंटरों पर नई तरह की चमक देखने को मिल रही है.
युवा खरीदारों के बीच आधुनिक रंगों का बढ़ता आकर्षण
बाजार में डिजाइन के मोर्चे पर आए बदलावों को लेकर सर्राफा कारोबारी आशीष अग्रवाल ने जानकारी दी कि रोज गोल्ड और व्हाइट गोल्ड के नए डिजाइन खास तौर पर युवा वर्ग को लुभा रहे हैं. फैशन के बदलते ट्रेंड्स के साथ खरीदार अब पारंपरिक पीले रंग से हटकर नए शेड्स और समकालीन डिजाइन वाली ज्वेलरी में काफी रुचि दिखा रहे हैं. यह बदलाव आभूषणों को आधुनिक पहनावों के साथ मेल कराने की इच्छा से भी जुड़ा है.
दैनिक उपयोग के लिए 18 कैरेट सोने की मजबूती
कीमतों के दबाव के बीच 18 कैरेट सोने के आभूषण एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरे हैं. कारोबारी आशीष अग्रवाल के अनुसार, 18 कैरेट सोने के गहने खरीदने में कोई घाटा नहीं है. तकनीकी रूप से इसमें 22 कैरेट की तुलना में अन्य धातुओं का मिश्रण अधिक रहता है, जिससे धातु में अतिरिक्त मजबूती आ जाती है. इस टिकाऊपन की वजह से रोजाना पहनने के शौकीन लोगों के लिए यह एक बेहद मुफीद और भरोसेमंद विकल्प बन जाता है.
सीमित बजट में आभूषण चुनने की नई रणनीति
सोने के लगातार बढ़ते भाव के कारण कई ग्राहक अब कम कैरेट वाले आभूषणों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं. लोग भारी भरकम गहनों के चक्कर में पड़ने के बजाय अपनी वास्तविक जरूरत, उपलब्ध बजट और पसंदीदा डिजाइन के आधार पर ही सटीक चुनाव कर रहे हैं. इससे बजट बिगड़े बिना आभूषण पहनने की चाह भी पूरी हो रही है.
धनतेरस, दिवाली और शादियों से लौटना तय है बाजार का मिजाज
वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए आशीष अग्रवाल ने बताया कि अभी सर्राफा बाजार में पहले जैसी चहल-पहल और भारी भीड़ देखने को नहीं मिल रही है. हालांकि, आगामी त्योहारों की तारीखें पास आने के साथ ही बाजारों में ग्राहकों की आवक बढ़ने की पूरी उम्मीद है. कारोबारी धनतेरस, दिवाली और उसके तुरंत बाद शुरू होने वाले शादी के सीजन से कारोबार में नई जान आने की आस लगाए बैठे हैं. उनका मानना है कि त्योहारी मौकों पर सोना और चांदी खरीदना शुभ मानने की गहरी भारतीय परंपरा के चलते ग्राहक एक बार फिर खरीदारी के लिए दुकानों तक जरूर पहुंचेंगे.


















