संयुक्त राज्य अमेरिका के आगामी चुनावी समर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का राजनीतिक प्रभाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में कुल 57 भारतीय मूल के उम्मीदवार विभिन्न स्तरों पर मैदान में उतरकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच होने वाला यह मुकाबला इस बार भारतीय समुदाय की बढ़ती भागीदारी और प्रभाव का भी बड़ा परीक्षण बन गया है। इन प्रत्याशियों की दावेदारी शीर्ष गवर्नर पद से लेकर सीनेट, प्रतिनिधि सभा, राज्य विधानमंडलों और स्थानीय निकायों तक फैली हुई है।
राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों का वितरण
विभिन्न पदों के चुनावी गणित पर नजर डालें तो इन 57 पुष्ट उम्मीदवारों में से 1 प्रत्याशी सीनेट के लिए, 11 उम्मीदवार प्रतिनिधि सभा के लिए, 3 राज्यव्यापी महत्वपूर्ण पदों के लिए, 36 प्रत्याशी राज्य विधानमंडलों के लिए और 6 उम्मीदवार स्थानीय प्रशासनिक पदों के लिए मैदान में हैं। 22 अलग-अलग राज्यों में फैले राज्य विधानमंडलों के मुकाबलों में 36 भारतीय मूल के चेहरे ताल ठोक रहे हैं, जिनमें कैलिफोर्निया, इलिनॉय और न्यूयॉर्क राज्यों में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई है। इस संकलन में केवल उन्हीं प्रत्याशियों को शामिल किया गया है जिनकी भारतीय मूल की पहचान पूरी तरह प्रमाणित है, जबकि 15 अन्य संभावित उम्मीदवार ऐसे भी रहे जिनकी पहचान की पूरी पुष्टि नहीं हो पाई थी।
शीर्ष पदों पर कड़े राजनीतिक मुकाबले
कई राज्यों में भारतीय मूल के नेता अत्यंत महत्वपूर्ण पदों के लिए सीधे संघर्ष में हैं। ओहायो में गवर्नर पद की दौड़ में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ताल ठोक रहे हैं, जिनका मुकाबला डेमोक्रेटिक प्रत्याशी एमी एक्टन से हो रहा है। उधर लॉस एंजिलिस में नगर निगम के शीर्ष पद के लिए नित्या रमन मौजूदा मेयर करेन बास को कड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। इसके अलावा न्यूयॉर्क में अटॉर्नी जनरल पद के लिए सरिता कोमाटिरेड्डी वर्तमान अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के आमने-सामने खड़ी हैं। मैरीलैंड में लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर अपने पद पर दोबारा जीत दर्ज करने के प्रयास में सक्रिय हैं, जबकि मैसाचुसेट्स में शिवा अय्यादुरई निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सीनेट के लिए चुनाव मैदान में हैं।
प्रतिनिधि सभा में दावेदारी और आमने-सामने की जंग
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी भारतीय मूल के मौजूदा जनप्रतिनिधि अपनी सीटों का बचाव करने उतरे हैं। रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम जैसे स्थापित सांसद फिर से निर्वाचित होने की दौड़ में हैं। वर्ष 2026 में प्रतिनिधि सभा की सीट के लिए दोबारा उतर रहे मौजूदा सदस्य रो खन्ना के सामने दिलचस्प स्थिति बनी है, जहां उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी रितेश टंडन भी भारतीय मूल के ही हैं। कुछ अन्य सीटों पर भी भारतीय मूल के प्रत्याशियों का मुकाबला सीधे तौर पर एक-दूसरे से देखने को मिल रहा है। हालांकि उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और इस राजनीतिक उभार पर अंतिम मुहर 3 नवंबर को अमेरिकी मतदाता ही लगाएंगे।



















