बाजार में चंदन की लकड़ी खरीदते वक्त अक्सर खरीदार उसके गहरे या हल्के रंग को देखकर असली या नकली होने का अंदाजा लगाने की भूल कर बैठते हैं। वास्तविकता यह है कि महज ऊपरी रंग के आधार पर चंदन की शुद्धता तय करना संभव नहीं होता। किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए खरीदारी करते समय लकड़ी का प्रामाणिकता प्रमाणपत्र देखना सबसे अनिवार्य कदम है। यह आधिकारिक दस्तावेज ही इस बात की ठोस जानकारी देता है कि लकड़ी पूरी तरह प्रामाणिक है या नहीं।
पत्थर पर घिसकर पेस्ट और खुशबू की जांच
चंदन की असलियत परखने के लिए एक पारंपरिक तरीका पत्थर पर घिसकर देखने का भी अपनाया जाता है। जब लकड़ी के टुकड़े को पत्थर पर हल्के हाथों से रगड़ा जाता है, तो उससे निकलने वाले पेस्ट की गुणवत्ता और उससे उठने वाली महक को ध्यान से देखना चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि केवल पत्थर पर घिसने भर से लकड़ी के असली होने की अंतिम और पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती, इसलिए इसे अन्य जांचों के साथ जोड़कर देखना चाहिए।
प्राकृतिक सुगंध और बनावट से मिलने वाले संकेत
शुद्ध चंदन की सबसे बड़ी खासियत उसकी कुदरती और लंबे समय तक टिकने वाली सुगंध होती है। यदि लकड़ी को हल्का सा भी रगड़ा जाए, तो उससे भीनी और प्राकृतिक महक उठती है। इसके विपरीत, नकली या मिलावटी लकड़ी में प्राकृतिक खुशबू के बजाय कृत्रिम अथवा रसायनों जैसी गंध आने की आशंका बनी रहती है। सुगंध के अलावा लकड़ी की आंतरिक बनावट भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। असली चंदन के भीतरी हिस्से का रंग हल्का पीलापन लिए हुए या सुनहरा दिखाई दे सकता है, और इसके रेशे बेहद बारीक तथा एक समान नजर आते हैं। इसके बावजूद रंग और रेशों की बनावट को अकेले पूर्ण प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पानी और गरम सुई के घरेलू परीक्षणों से जुड़ी सावधानियां
कई लोग चंदन को पानी में डुबोकर उसका रंग बदलने की जांच करने की बात कहते हैं, लेकिन पानी का रंग बदलना या न बदलना कोई वैज्ञानिक या प्रमाणित जांच नहीं है। इसलिए सिर्फ पानी के परीक्षण के भरोसे खरीदारी का निर्णय कभी नहीं लेना चाहिए। वहीं कुछ लोग लकड़ी में गरम सुई चुभोकर उससे निकलने वाले धुएं और गंध से शुद्धता आंकने का प्रयास करते हैं। यह तरीका लकड़ी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है और साथ ही जलने या आग लगने का गंभीर जोखिम भी पैदा करता है। ऐसे खतरनाक परीक्षणों से हमेशा बचना चाहिए और केवल प्रमाणित तथा भरोसेमंद विक्रेता से ही खरीदारी करनी चाहिए।


















