अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेतों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की आशंकाएं कम होने से निवेशकों ने राहत की सांस ली है, जिसके चलते न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 2.25 प्रतिशत फिसलकर लगभग 99.80 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया। इससे पहले शुक्रवार को तेल की कीमतें 104.03 डॉलर प्रति बैरल के पांच महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं, लेकिन उस स्तर पर मुनाफावसूली हावी होने के बाद से यह लगातार सुधार के दौर में है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल का भाव 100.77 डॉलर पर देखा गया, जो पिछले बंद 104.12 डॉलर से 3.22 प्रतिशत कम है, जबकि पिछले 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर रहा है।
कूटनीतिक समाधान पर जोर और होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रगति
ऊर्जा बाजार पर लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने का जो जोखिम मंडरा रहा था, वह अब काफी हद तक कम होता दिख रहा है। वाशिंगटन की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि वह सैन्य कार्रवाई को दोबारा शुरू करने के बजाय कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सप्ताहांत में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने तेहरान पर नए सिरे से हमले करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पूरे विवाद का कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। हालांकि, रुबियो ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प पूरी तरह खुले हैं और राष्ट्रपति जो भी सैन्य लक्ष्य तय करेंगे, उसे हासिल करने की पूरी क्षमता अमेरिका रखता है।
कूटनीति के मोर्चे पर एक और सकारात्मक खबर यह सामने आई है कि कतरी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच गहन बातचीत जारी है। ईरान के बयानों से संकेत मिला है कि यदि अमेरिका सकारात्मक सहयोग करता है, तो अगले दो दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से जहाजों की आवाजाही के लिए खोलने की योजना पर काम चल रहा है। इस खबर ने तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील गलियारे को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुदाय की चिंताओं को काफी कम कर दिया है। इसके विपरीत, वित्तीय बाजार अमेरिकी मीडिया व्यक्तित्व और राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन के उन दावों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ परमाणु हमले का दबाव बना रहे हैं और कुछ ही दिनों में वाशिंगटन ऐसा निर्णय ले सकता है।
चार्ट पर तकनीकी स्थिति: अहम स्तरों और संकेतकों का विश्लेषण
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो WTI क्रूड 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के इर्द-गिर्द कड़े संघर्ष से गुजर रहा है। चार्ट पर कीमत 100.09 डॉलर के 9-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ठीक नीचे बनी हुई है, जो तत्काल ऊपरी स्तरों पर कड़ा प्रतिरोध पैदा कर रहा है। इस शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के नीचे भाव का टिकना दर्शाता है कि हालिया तेजी के बाद खरीदारों की पकड़ कुछ कमजोर पड़ी है। हालांकि, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 55 से 58 के सकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है, जिससे पता चलता है कि बाजार में मोमेंटम अभी पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुआ है, भले ही यह मजबूत ब्रेकआउट में न बदल पाया हो।
व्यापक तकनीकी संकेतकों में मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 2.51 पर है, जो सिग्नल लाइन 2.32 से ऊपर 0.19 का सकारात्मक हिस्टोग्राम दिखा रहा है। लंबी अवधि के मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय EMA 99.08 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 94.99 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 84.52 डॉलर पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय SMA 94.90 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 86.55 डॉलर पर है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के बीच गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जो दीर्घकालिक स्तर पर मजबूत रुझान की ओर इशारा करता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 88.21 डॉलर से 107.80 डॉलर के दायरे में हैं, जिनका मध्य स्तर 98.00 डॉलर है। 14-दिवसीय एडीएक्स (ADX) 33 पर है, जो सक्रिय ट्रेंडिंग मार्केट को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 43 और सिग्नल लाइन 56 पर है। ट्रेडिंग के लिए पिवट पॉइंट 101.22 डॉलर पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 102.30 डॉलर और R2 103.82 डॉलर हैं, जबकि नीचे की ओर सपोर्ट S1 99.70 डॉलर और S2 98.62 डॉलर हैं। ऊपर की ओर 104.03 डॉलर का पांच महीने का उच्चतम स्तर सबसे बड़ी बाधा है, जबकि नीचे की ओर 20 अक्टूबर का निचला स्तर 95.05 डॉलर एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम करेगा।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की प्रकृति, वैश्विक मांग-आपूर्ति और अमेरिकी इन्वेंट्री रिपोर्ट
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सबसे अहम कच्चे तेलों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ WTI तीन प्रमुख बेंचमार्क में गिना जाता है। कम विशिष्ट गुरुत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण इसे 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। कम सल्फर की वजह से इसे रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है, जिससे यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है। यह अमेरिका में उत्पादित होता है और इसकी डिलीवरी कुशिंग, ओक्लाहोमा में होती है, जिसे 'पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड' के रूप में जाना जाता है।
किसी भी अन्य कमोडिटी की तरह, WTI क्रूड की कीमत भी वैश्विक मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती है। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास ईंधन की खपत बढ़ाकर कीमतों को सहारा देता है, जबकि आर्थिक सुस्ती मांग घटाकर कीमतों पर दबाव डालती है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में तेज उछाल लाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी तेल की कीमतों को सीधा प्रभावित करती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्रा धारकों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर इसे महंगा बना देता है।
अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा भी कीमतों पर बड़ा असर डालता है। इन्वेंट्री में गिरावट मजबूत मांग की ओर इशारा करती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अधिक आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे कीमतों में नरमी आती है। API का डेटा हर मंगलवार को और सरकारी एजेंसी EIA का डेटा हर बुधवार को प्रकाशित होता है। ऐतिहासिक रूप से 75 प्रतिशत मौकों पर दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर समान पाए जाते हैं, लेकिन सरकारी निकाय होने के कारण EIA के आंकड़ों को अधिक आधिकारिक और विश्वसनीय माना जाता है।
ओपेक की नीतियां और व्यापक वित्तीय बाजारों का रुख
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) के 12 सदस्य देश साल में दो बार होने वाली बैठकों में उत्पादन कोटे का निर्धारण करते हैं। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर इसके विपरीत प्रभाव पड़ता है। ओपेक प्लस में रूस सहित दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जो तेल बाजार की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मध्य पूर्व में कूटनीति की उम्मीदों ने अन्य वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में सोमवार को एशियाई सत्र की गिरावट के बाद सुधार देखा गया, हालांकि निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी नीतिगत फैसले से पहले सतर्क हैं। वहीं डॉलर-येन जोड़ी (USD/JPY) बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद के 157.00 से नीचे के स्तर से सुधरकर 158.00 के करीब पहुंच गई, जिस पर जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की हस्तक्षेप चेतावनी का असर नहीं दिखा। सोने की कीमतों ने दो दिनों की गिरावट को थामते हुए 3,900 डॉलर से नीचे के स्तर से वापसी की, जो अक्टूबर 2025 के बाद का निचला स्तर था, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं सोने के लिए चुनौती बनी हुई हैं। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में चार हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद बिटकॉइन (BTC) 78,462 डॉलर के ऊपर संभला है, जबकि एथेरियम (ETH) 2,295 डॉलर के ऊपर लौटा है।



















