डिजिटल खरीदारी के बढ़ते दौर में पेशेवर खेलों में करियर बनाने का सपना देख रहे युवा खिलाड़ी अपने जरूरी खेल उपकरण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मंगाना पसंद कर रहे हैं। अक्सर डिजिटल बाजारों पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट और आकर्षक छूट युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करते हैं। कई बार खुदरा बाजार की तुलना में ऑनलाइन सामान काफी कम दाम में उपलब्ध दिखाई देता है, लेकिन केवल कम कीमत देखकर तुरंत खरीदारी का फैसला लेना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। भारी रियायत के लालच में खरीदारों को अक्सर घटिया और नकली सामान थमा दिया जाता है, जिससे खेल के अभ्यास और आर्थिक बजट दोनों को नुकसान पहुंचता है।
खेल के सामान की शुद्धता और ऑनलाइन फर्जीवाड़े से जुड़े इस मसले पर मेरठ सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार सिंघल ने महत्वपूर्ण सावधानियों का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट से क्रिकेट की गेंद अथवा कोई भी दूसरा खेल उपकरण मंगवाते समय खरीदार को उत्पाद से जुड़ी बुनियादी जानकारियों की गहन जांच पड़ताल करनी चाहिए, ताकि ठगी और नकली सामान के जाल से खुद को सुरक्षित रखा जा सके।
पैकेजिंग पर दिए गए स्कैनर की ऐसे करें प्रामाणिकता जांच
अनुज कुमार सिंघल के अनुसार सिर्फ रियायती दामों के आधार पर ऑर्डर बुक करने की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। विशेष रूप से क्रिकेट गेंद खरीदते समय यह देखना आवश्यक है कि उत्पाद के डिब्बे पर आधिकारिक स्कैनर मौजूद है या नहीं। यदि ग्राहक द्वारा स्कैन करने पर वह स्कैनर संबंधित निर्माता कंपनी की मूल और आधिकारिक वेबसाइट पर ले जाता है, तो इससे उत्पाद के असली होने की पुष्टि करने में सीधी मदद मिलती है। इसके विपरीत, यदि कोड स्कैन करने के बाद कोई अज्ञात या दूसरी वेबसाइट खुलती है, तो उस उत्पाद को लेकर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। नामी और प्रतिष्ठित खेल सामग्री निर्माता कंपनियां अपने प्रत्येक बॉक्स पर विशेष स्कैनर देती हैं ताकि उपभोक्ता उत्पाद के विवरण को सीधे सत्यापित कर सकें।
होलोग्राम और अवास्तविक छूट के भारी अंतर पर रखें नजर
गेंद और गियर की पैकेजिंग पर मौजूद होलोग्राम भी प्रामाणिकता की पहचान का एक बेहद मजबूत पैमाना होता है। अनुज कुमार सिंघल ने जोर देकर कहा कि खेल सामग्री खरीदते समय होलोग्राम की उपस्थिति को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि वास्तविक कंपनियां नकल रोकने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। इसके अतिरिक्त कीमत में आने वाला भारी और अस्वाभाविक अंतर भी नकली उत्पाद की पहचान का बड़ा संकेत होता है। उदाहरण के तौर पर यदि खुदरा बाजार में किसी मानक गेंद की वास्तविक कीमत 10 हजार रुपये है और वही उत्पाद ऑनलाइन किसी प्लेटफॉर्म पर महज 1 या 2 हजार रुपये में बेचा जा रहा है, तो खरीदार को सचेत हो जाना चाहिए। इतनी बड़ी कीमत का अंतर सीधे तौर पर नकली या दोयम दर्जे के उत्पाद की ओर इशारा करता है, जिसकी पुष्टि किए बिना भुगतान नहीं करना चाहिए।
सस्ते दाम के फेर में गुणवत्ता से न करें समझौता
मेरठ के प्रसिद्ध खेल बाजार में खरीदारी करने पहुंचे कुछ युवाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने आकर्षक छूट देखकर इंटरनेट से सस्ती गेंदें मंगवाई थीं। हालांकि मैदान पर अभ्यास के दौरान जब उन गेंदों का उपयोग किया गया, तो उनकी सिलाई, चमड़े और उछाल की गुणवत्ता में जमीन-आसमान का फर्क सामने आया। अभ्यास के दौरान ऐसी नकली गेंदें खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए किसी भी खेल उपकरण का चुनाव करते समय सिर्फ कीमत को पैमाना नहीं बनाना चाहिए। निर्माता ब्रांड, उत्पाद की आधिकारिक पहचान, प्रामाणिक स्कैनर, सुरक्षा होलोग्राम और वास्तविक बाजार मूल्य की पूरी पड़ताल करके ही खरीदारी का निर्णय लेना चाहिए, जिससे नकली खेल सामग्री और साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को पूरी तरह खत्म किया जा सके।


















