बरसात का मौसम घर पर नए पौधे तैयार करने और बागवानी के प्रयोगों के लिए सबसे बेहतरीन समय माना जाता है। अगर आप अपने घर में नींबू का पौधा लगाना चाहते हैं, तो नर्सरी से महंगे पौधे खरीदने की जगह खुद ही नया पौधा तैयार कर सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, मानसून के दौरान हवा में मौजूद प्राकृतिक नमी के कारण एयर लेयरिंग और कटिंग की मदद से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के स्वस्थ पौधे उगाए जा सकते हैं। यह तरीका न केवल आसान है, बल्कि इसमें सफलता की संभावना भी बहुत अधिक होती है।
एयर लेयरिंग तकनीक से पौधा तैयार करने की पूरी विधि
एयर लेयरिंग नया पौधा बनाने का एक बेहद सरल और कारगर तरीका है। इसके लिए सबसे पहले नींबू के किसी पुराने और स्वस्थ पौधे में से पेंसिल जितनी मोटी शाखा का चुनाव करें। इस चुनी हुई शाखा पर लगभग एक इंच की दूरी में गोल आकार में छाल को सावधानीपूर्वक छील लें। ध्यान रखें कि छाल निकालते समय अंदर की लकड़ी को नुकसान न पहुंचे। इसके बाद छिले हुए स्थान पर गीली कोकोपीट या अच्छी मिट्टी लगाएं और उसे प्लास्टिक की पन्नी से पूरी तरह ढँक दें।
प्लास्टिक की पन्नी को दोनों किनारों से धागे की मदद से कसकर बांध देना चाहिए ताकि अंदर हवा या बाहरी पानी बिल्कुल न जा सके। मानसून के मौसम में हवा की नमी के कारण लगभग 25 से 30 दिनों के भीतर प्लास्टिक के अंदर सफेद रंग की जड़ें निकलती हुई दिखाई देने लगती हैं। जब जड़ें अच्छी तरह से गुच्छे के रूप में विकसित हो जाएं, तो उस शाखा को मुख्य पौधे से नीचे से सावधानी से काट लें। इसके बाद इस नए पौधे को किसी गमले में या सीधे जमीन में रोपा जा सकता है।
टहनी की कटिंग लगाकर नया पौधा उगाने का तरीका
बरसात के दिनों में टहनी की कटिंग से भी नींबू का नया पौधा बहुत आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए किसी मेच्योर पौधे से लगभग 6 से 8 इंच लंबी और मजबूत टहनी काटें। टहनी के निचले हिस्से की सभी पत्तियों को हटा दें और सबसे निचले सिरे को थोड़ा तिरछा काट लें। यदि आपके पास रूटिंग हार्मोन उपलब्ध हो, तो उसे निचले हिस्से पर लगाएं। अगर रूटिंग हार्मोन न हो तो एलोवेरा जेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जो प्राकृतिक रूटिंग एजेंट का काम करता है।
कटिंग तैयार करने के बाद इसे बालू और मिट्टी के बराबर मिश्रण में लगभग 2 से 3 इंच की गहराई तक गाड़ दें। गमले की मिट्टी में हल्की नमी हमेशा बनाए रखें और इसे किसी छायादार स्थान पर रखें जहां सीधी तेज धूप न आती हो। बारिश के मौसम में वातावरण में पर्याप्त आर्द्रता होने के कारण 20 से 25 दिनों के भीतर ही कटिंग में नई पत्तियां और जड़ें फूटने लगती हैं।
बीज के मुकाबले वनस्पति संवर्धन के बड़े फायदे
यदि आप बीज से नींबू का पौधा उगाते हैं, तो उसमें फूल और फल आने में आमतौर पर 4 से 5 साल का लंबा समय लग जाता है। इसके विपरीत, मेच्योर पौधे की शाखा से एयर लेयरिंग या कटिंग द्वारा तैयार किया गया पौधा केवल 1 से 2 साल के भीतर ही फल देना शुरू कर देता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नया पौधा आनुवंशिक रूप से पूरी तरह अपने मातृ पौधे के समान होता है। यदि आपके पुराने पौधे में बड़े, रसीले और अधिक नींबू आते हैं, तो नए पौधे में भी वही गुण बिल्कुल बरकरार रहेंगे।
मानसून में कटिंग और लेयरिंग की सफलता का गणित
बरसात के मौसम में हवा में प्राकृतिक नमी और आर्द्रता का स्तर काफी अधिक होता है। इस नमी के कारण पौधों की कोशिकाओं में विभाजन तेजी से होता है, जिससे कटी हुई शाखाओं में नई जड़ें बहुत जल्दी निकल आती हैं। इस दौरान पौधों के सूखने का जोखिम सबसे कम रहता है और नया पौधा बहुत कम समय में मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेता है। इसके अलावा, बार-बार पानी देने की झंझट भी नहीं रहती क्योंकि प्राकृतिक बारिश का पानी पौधे के लिए टॉनिक की तरह काम करता है। तापमान में ज्यादा उतार-चढ़ाव न होने के कारण इस मौसम में संवर्धन की सफलता दर 90 प्रतिशत से भी अधिक रहती है। इस शून्य लागत वाले तरीके से आप घर पर ही कई नए पौधे तैयार कर सकते हैं।



















