सुबह सोकर उठने के बाद चेहरे की सुस्ती दूर करने और त्वचा को तुरंत तरोताजा बनाने के लिए स्किन आइसिंग आजकल ब्यूटी रूटीन का एक बेहद लोकप्रिय हिस्सा बन चुकी है। बहुत से लोग रोजाना सुबह उठते ही चेहरे पर बर्फ लगाने की आदत अपना रहे हैं। माना जाता है कि चेहरे पर बर्फ मलने से त्वचा की सूजन कम होती है, चेहरे को ठंडक मिलती है और प्राकृतिक चमक व ताजगी देखने को मिलती है। हालांकि, बर्फ का इस्तेमाल करते समय यह समझना बेहद जरूरी है कि केवल बर्फ उठाकर सीधे चेहरे पर रगड़ लेना सही तरीका नहीं है। अगर सही प्रक्रिया के साथ आइस फेशियल किया जाए तो त्वचा को इसके बेहतरीन लाभ मिलते हैं, जबकि गलत तरीके से किया गया इस्तेमाल स्किन इरिटेशन, रेडनेस और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए आइसिंग की शुरुआत करने से पहले इसके सही तरीकों और जरूरी सावधानियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
आइस फेशियल से पहले चेहरे की सफाई है बेहद जरूरी
स्किन आइसिंग की प्रक्रिया शुरू करने से पहले चेहरे को पूरी तरह साफ करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। बर्फ लगाने से पहले किसी माइल्ड और जेंटल क्लींजर की मदद से चेहरे को अच्छी तरह धो लें। ऐसा करने से त्वचा की सतह पर जमी धूल-मिट्टी, पसीना, अतिरिक्त तेल और मेकअप के कण पूरी तरह हट जाते हैं। जब आपकी त्वचा साफ होती है, तो बर्फ की ठंडक और उसके गुण सीधे त्वचा की गहराई तक असर पहुंचा पाते हैं। यदि गंदे चेहरे पर सीधे बर्फ लगाई जाए, तो त्वचा के छिद्र बंद हो सकते हैं और मुहांसों की समस्या बढ़ सकती है।
बर्फ का सीधा संपर्क त्वचा के लिए हो सकता है नुकसानदायक
अक्सर लोग बर्फ के टुकड़े को सीधे ही त्वचा पर रगड़ने लगते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है। चेहरे की त्वचा बेहद नाजुक होती है, इसलिए बर्फ को कभी भी सीधे स्किन पर न लगाएं। बर्फ के टुकड़े को हमेशा किसी साफ, सूखे और मुलायम सूती कपड़े में लपेटकर ही इस्तेमाल करें। इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले विशेष आइस रोलर का उपयोग करना भी एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए सीधे बर्फ का संपर्क हल्की आइस बर्न या त्वचा में जलन पैदा कर सकता है। सूती कपड़े या आइस रोलर की परत त्वचा को अत्यधिक ठंडक के सीधे झटके से बचाती है।
मसाज का सही तरीका और संवेदनशील हिस्से
चेहरे पर बर्फ घुमाते समय सही तकनीक अपनाना बेहद जरूरी है। बर्फ लपेटे हुए कपड़े को चेहरे पर धीरे-धीरे गोलाकार यानी सर्कुलर मोशन में या फिर ऊपर की तरफ घुमाएं। बर्फ को कभी भी चेहरे के किसी एक ही हिस्से पर लगातार दबाकर या टिकाकर न रखें। त्वचा के किसी एक बिंदु पर बहुत देर तक ठंडक बनाए रखने से वहां के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि आप सुबह के समय आंखों के आसपास की सूजन या पफीनेस से परेशान रहते हैं, तो गालों, जॉलाइन और आंखों के निचले हिस्से पर थोड़ा ध्यान दे सकते हैं। हालांकि, आंखों के नीचे की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है, इसलिए वहां बर्फ लगाते समय हाथों का दबाव बेहद हल्का रखें।
आइसिंग की सही समय सीमा और पोस्ट-केयर रूटीन
त्वचा को ताजगी देने और बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए बहुत लंबे समय तक आइसिंग करने की आवश्यकता नहीं होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल 1 से 2 मिनट की स्किन आइसिंग ही त्वचा को आवश्यक ठंडक और प्राकृतिक ग्लो देने के लिए पर्याप्त मानी जाती है। आइसिंग पूरी करने के बाद चेहरे को किसी साफ तौलिए से हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाएं। इसके तुरंत बाद अपनी त्वचा पर पसंदीदा सीरम या मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। आइस फेशियल के बाद त्वचा के रोमछिद्र सक्रिय हो जाते हैं, जिससे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा में ज्यादा गहराई और बेहतर तरीके से अवशोषित हो पाते हैं।
साप्ताहिक बारंबारता और विशेष चिकित्सीय सावधानियां
आम तौर पर ज्यादातर लोगों के लिए सप्ताह में 2 से 3 बार स्किन आइसिंग करना पूरी तरह पर्याप्त होता है। यदि बर्फ लगाने के बाद आपकी त्वचा पर लालिमा, लगातार जलन या किसी भी तरह की असहजता महसूस होती है, तो आइसिंग का समय कम कर दें या इसे तुरंत बंद कर दें। कुछ खास त्वचा स्थितियों में आइसिंग से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। जिन लोगों के चेहरे पर खुले घाव हों, गंभीर रोसैशिया की समस्या हो, एक्जिमा की शिकायत हो या जिनकी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो, उन्हें चेहरे पर बर्फ नहीं लगानी चाहिए। किसी भी पुरानी या गंभीर त्वचा संबंधी समस्या में आइस फेशियल अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ यानी डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है।



















