नोविग के बोल्ड विज्ञापन पर महिला खिलाड़ियों में भारी आक्रोश, सिडनी स्वेनी पर खेल को कामुक बनाने का आरोपऐप्पल का नया लाइनअप: कौन सा आईफोन खरीदना समझदारी है और किन मॉडलों से दूरी बनाना बेहतरकिचन वेस्ट से तैयार करें पौधों के लिए ताकतवर लिक्विड खाद, चावल के पानी में मिलाएं ये तीन चीजेंबजट रसोई में कैफे का अहसास, 3,000 रुपये के अंदर मिल रहे ये कॉफी और टी मेकर्ससनातन परंपरा में शिखा बांधने के पीछे क्या हैं आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और मानसिक रहस्यसाउंडबॉक्स राइडर पार्टी स्पीकर रिव्यू: बेहतरीन मजबूती और दमदार आवाज के साथ क्या 600 डॉलर खर्च करना सही फैसला है1.80 करोड़ की लागत से बनी हनुमान अंश ने 41 दिनों में बटोरे 300 करोड़, 3 महिला निर्माताओं का चमका सिताराचीन में आईफोन पर जल्द मिलेगा आधिकारिक भूकंप अलर्ट, सुरक्षा प्रणाली जोड़ने के लिए ऐपल से संपर्क जारीस्मार्टफोन और कंप्यूटर की दुनिया में पिछड़ने के बाद नोकिया, ब्लैकबेरी और आईबीएम ने कैसे बदली अपनी किस्मत15 साल के वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी देख शिवम दुबे हुए कायल, ड्रेसिंग रूम के माहौल पर साझा की मजेदार बातें
छत्ता हटाने के लिए धुआं करना बिगाड़ सकता है शहद का स्वाद और सेहत, जानें सुरक्षित वैज्ञानिक तरीकाजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 6:29 pm (36 मिनट पहले)· 1

छत्ता हटाने के लिए धुआं करना बिगाड़ सकता है शहद का स्वाद और सेहत, जानें सुरक्षित वैज्ञानिक तरीका

घरों के आसपास लगे मधुमक्खी के छत्तों को धुएं से हटाने पर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें शहद को दूषित कर देती हैं। जहानाबाद के अनुभवी मधुमक्खी पालक ने बताया कि सुरक्षा किट पहनकर छत्ता अलग करना ही सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प है।

घरों की बालकनी, छतों या बगीचों में मधुमक्खियों का छत्ता लग जाना बेहद आम बात है, लेकिन उसे हटाने का पारंपरिक तरीका शहद और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। बिहार के जहानाबाद जिले के नदियांवा गांव में रहने वाले संतोष कुमार पिछले 8 वर्षों से व्यावसायिक स्तर पर मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। मात्र 10 बक्सों से अपनी यात्रा शुरू करने वाले संतोष के पास आज लगभग 400 पेटियां हैं, जिनसे होने वाले मुनाफे से उनके पूरे परिवार का भरण पोषण होता है। उनके अनुसार लोग छत्ता भगाने की जल्दबाजी में अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे शुद्ध शहद पूरी तरह विषैला और बेस्वाद हो जाता है।

धुएं के इस्तेमाल से शहद में घुलता है जहर

आमतौर पर जब भी किसी आवासीय परिसर में मधुमक्खियां डेरा डालती हैं, तो लोग आग जलाकर या पत्तियां सुलगाकर तेज धुआं करने लगते हैं। इस तरीके से मधुमक्खियां तो उड़ जाती हैं, परंतु शहद की गुणवत्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। संतोष कुमार स्पष्ट करते हैं कि लकड़ी, उपले या पत्तियों को जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें भारी मात्रा में निकलती हैं। यह गाढ़ा धुआं सीधे तौर पर छत्ते में मौजूद खुले शहद के संपर्क में आता है और उसमें जज्ब हो जाता है।

ये भी पढ़ें

प्रदूषित धुएं के कण शहद के प्राकृतिक स्वाद, महक और पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। ऐसे दूषित शहद का सेवन मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक मानकों के तहत बक्सों से निकाला गया शहद बाजार में अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण माना जाता है, क्योंकि उसमें रसायनों या धुएं का कोई अंश नहीं होता।

वैज्ञानिक पद्धति से छत्ता अलग करने की सही प्रक्रिया

यदि घर या कार्यस्थल के आसपास से छत्ता हटाना बेहद जरूरी हो, तो धुएं का सहारा लेने के बजाय वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए। इसके लिए पूरी तैयारी के साथ काम करना अनिवार्य है।

  • सुरक्षा किट का इस्तेमाल: छत्ते के नजदीक जाने से पहले विशेष सुरक्षा परिधान पहनना जरूरी है। ऐसा सुरक्षात्मक कैप इस्तेमाल करें जो गर्दन तक पूरी तरह ढका हो, साथ ही हाथों में मोटे ग्लव्स पहनें ताकि चेहरे, गले और हाथों पर डंक लगने की कोई गुंजाइश न रहे।
  • सावधानीपूर्वक छत्ता काटना: जब शरीर पूरी तरह सुरक्षित हो जाए, तब छत्ते के पास जाएं। किसी तेज व साफ औजार की मदद से छत्ते को उसके आधार से बेहद सहजता और सावधानी के साथ काटकर अलग करें।
  • मधुमक्खियों का स्वतः हटना: जैसे ही छत्ता अपनी मुख्य जगह से अलग होकर नीचे आता है, मधुमक्खियां बिना किसी उग्रता के खुद ब खुद उड़कर आसपास के वातावरण में बिखर जाती हैं।

इस वैज्ञानिक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निकाला गया शहद अपनी मूल शुद्धता में बना रहता है। न तो उसके स्वाद में कोई कड़वाहट आती है और न ही उसकी पोषण क्षमता प्रभावित होती है। बिहार में राज्य सरकार भी मधुमक्खी पालकों को आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण देकर इस उद्योग को लगातार बढ़ावा दे रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित शहद उत्पादन बढ़ सके।

सवाल-जवाब

मधुमक्खी का छत्ता भगाने के लिए धुआं करना क्यों गलत है?
धुएं से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें शहद में समा जाती हैं, जिससे उसका स्वाद और शुद्धता खराब हो जाती है।
संतोष कुमार ने मधुमक्खी पालन की शुरुआत कितने बक्सों से की थी?
उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत मात्र 10 बक्सों से की थी, जो 8 साल की मेहनत के बाद आज करीब 400 पेटियों तक पहुंच चुका है।
छत्ता हटाते समय कौन से सुरक्षा उपकरण पहनना जरूरी है?
गर्दन तक ढका हुआ सुरक्षा कैप और हाथों में मजबूत ग्लव्स पहनना अनिवार्य है ताकि चेहरे और हाथों पर डंक न लगे।
सुरक्षित तरीके से छत्ता अलग करने पर मधुमक्खियां क्या करती हैं?
छत्ते को सावधानी से अलग करते ही मधुमक्खियां बिना किसी नुकसान के खुद उड़कर इधर-उधर फैल जाती हैं।
बिहार सरकार इस क्षेत्र में क्या भूमिका निभा रही है?
बिहार सरकार मधुमक्खी पालकों की मदद के लिए लगातार आगे आ रही है और इस कार्य को बढ़ावा दे रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp