झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में हर रोज देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। इस पावन नगरी में भगवान शिव के दर्शन के साथ यहां का पारंपरिक खान-पान भी दूर-दराज से आने वाले लोगों को खूब लुभाता है। सुबह के समय मूड़ी और घुगनी का जायका स्थानीय निवासियों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों की पहली पसंद बना रहता है। सिंह दरवाजा के पास स्थित संकरी गली में दशकों पुरानी एक ऐसी दुकान मौजूद है, जिसकी शोहरत केवल पारंपरिक स्वाद के कारण नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले निस्वार्थ सेवा भाव की वजह से चारों ओर फैली हुई है।
पांच दशकों से एक ही जगह पर बरकरार है स्वाद और अपनापन
इस नाश्ते की दुकान का संचालन चंदू चांद पंडित करते हैं, जिन्हें श्रद्धालु और स्थानीय निवासी आदर से चंदू बाबा कहकर बुलाते हैं। उन्होंने अपने जीवन के करीब 50 साल इसी छोटी सी दुकान पर लोगों को सुबह का ताजा नाश्ता परोसते हुए बिताए हैं। पिछले पांच दशकों के दौरान यहां आने वाले ग्राहकों की कई पीढ़ियां बदल चुकी हैं, मगर दुकान का पारंपरिक स्वाद और लोगों के प्रति दुकानदार का अपनापन आज भी पहले की तरह कायम है। हर सुबह स्थानीय नागरिक तो अपनी दिनचर्या शुरू करने से पहले यहां पहुंचते ही हैं, साथ ही मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी मूड़ी घुगनी की तलाश में इस गली तक खिंचे चले आते हैं।
मुसीबत में फंसे तीर्थयात्रियों के लिए सहारा बनी दुकान
दुकान की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वाद नहीं, बल्कि दुकानदार का उदार दृष्टिकोण है। मंदिर परिसर के आसपास कई बार ऐसे श्रद्धालु भी पहुंच जाते हैं, जो किसी मजबूरी या अनहोनी की वजह से दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं। कई दफा भीड़भाड़ में किसी भक्त का बटुआ गुम हो जाता है या मोबाइल फोन चोरी हो जाता है, जिससे उनके पास एक वक्त के नाश्ते या भोजन तक के पैसे नहीं बचते। ऐसी विषम परिस्थितियों में जब कोई असहाय अथवा भूखा व्यक्ति उनकी दुकान के सामने आता है, तो चांद पंडित उनसे कोई रकम नहीं मांगते। वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भरपेट ताजा नाश्ता कराते हैं।
चांद पंडित के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 7 से 10 ऐसे जरूरतमंद लोग उनकी दुकान पर पहुंचते हैं, जिन्हें बिना कोई शुल्क लिए प्रेमपूर्वक नाश्ता कराया जाता है। उनके लिए यह सामान्य व्यावसायिक लेन-देन नहीं है, बल्कि भगवान के दरबार में पहुंचे भक्तों के प्रति एक मानवीय दायित्व है।
भक्ति और सेवा को ही मानते हैं जीवन का असली उद्देश्य
चांद पंडित का मानना है कि पिछले 50 वर्षों से वह जो भी कार्य कर रहे हैं, वह सब बाबा बैद्यनाथ के आशीर्वाद की बदौलत ही संभव हो सका है। वह इस नाश्ते की दुकान को केवल जीविकोपार्जन का जरिया नहीं मानते, बल्कि भोलेनाथ के भक्तों की सेवा करने का पवित्र जरिया समझते हैं। उनका कहना है कि इस कार्य से मिलने वाले आर्थिक लाभ की तुलना में जरूरतमंदों की भूख मिटाने से मिलने वाला आत्मिक सुकून और मानसिक खुशी कहीं अधिक मूल्यवान है। उनका दृढ़ विश्वास है कि उनके जीवन में जो कुछ भी समृद्धि और साधन हैं, वे सब बाबा बैद्यनाथ की अनुकंपा का फल हैं। ऐसे में उनके धाम में आया कोई भी भक्त भूखे पेट वापस लौटे, यह बात उन्हें भीतर से कचोटती है।
स्थानीय लोगों और ग्राहकों के बीच इंसानियत की मिसाल
दुकान पर नियमित रूप से आने वाले ग्राहकों का कहना है कि यहां की मूड़ी और घुगनी स्वादिष्ट तो है ही, लेकिन इस प्रतिष्ठान की वास्तविक पहचान इसकी सहृदयता है। यहां आने वाले किसी भी लाचार श्रद्धालु को धन के अभाव में भूखा नहीं लौटाया जाता। यही कारण है कि यह पचास साल पुरानी छोटी सी दुकान देवघर में सिर्फ एक नाश्ते का केंद्र बनकर नहीं रही, बल्कि इंसानियत, करुणा और सेवा भाव का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। जहां प्रतिदिन हजारों की भीड़ अपनी मन्नतें लेकर आती है, वहीं चंदू बाबा की यह दुकान उन संकटग्रस्त लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनी हुई है, जिन्हें उस घड़ी किसी सच्चे सहारे की दरकार होती है।



















