एशियाई खेलों के चौदहवें दिन भारतीय दल के लिए स्वर्णिम सफलता हासिल करने के कई बड़े अवसर सामने हैं। विभिन्न खेल स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत अब तक कुल 65 पदक अपनी झोली में डाल चुका है, जिसमें 10 स्वर्ण, 22 रजत और 32 कांस्य पदक शामिल हैं। इस समय भारतीय दल पदक तालिका में आठवें पायदान पर मौजूद है, लेकिन आगामी खिताबी मुकाबलों के नतीजों से इस रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार होने की पूरी उम्मीद बंधी हुई है।
रिंग में तीन मुक्केबाजों से स्वर्ण पदक की उम्मीद
मुक्केबाजी के मुकाबलों में आज भारत के तीन प्रमुख मुक्केबाज रिंग में अपनी चुनौती पेश करेंगे। लवलीन बोरगोहेन, प्रवीण और अंकुश अपने-अपने भार वर्गों के फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतर रहे हैं। इससे पहले के मुकाबलों में मुक्केबाज नरेंद्र ने कांस्य पदक जीतकर देश का खाता खोला था। अब इन तीनों शीर्ष मुक्केबाजों के प्रदर्शन पर देश की नजरें हैं, जहां इनके मुक्कों के दम पर तीन नए स्वर्ण पदक तालिका में जुड़ सकते हैं।
महिला हॉकी में चीन के खिलाफ महामुकाबला
दिन का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय महिला हॉकी टीम और चीन के बीच होने वाला फाइनल मुकाबला है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में आखिरी बार 1982 में स्वर्ण पदक जीता था। इस तरह टीम के सामने पिछले 44 वर्षों से चले आ रहे खिताबी सूखे को समाप्त करने की ऐतिहासिक चुनौती है। चीनी टीम के खिलाफ इस निर्णायक मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी पूरी रणनीतिक तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगी।
तीरंदाजी और अन्य स्पर्धाओं में पदकों की आस
तीरंदाजी के मैदान से भी आज पदक तालिका में और इजाफा होने की संभावना बनी हुई है। इससे पहले खेलों के बारहवें दिन भारतीय दल ने बेहतरीन लय दिखाते हुए कुल चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे, जिनमें से तीन अकेले तीरंदाजी से आए थे और एक स्वर्ण निशानेबाजी में मिला था। इसके अतिरिक्त नौवें दिन तक भारत 45 पदकों तक पहुंचा था, जिसमें भाला फेंक और एथलेटिक्स स्पर्धाओं का भी बड़ा योगदान रहा था। आज के व्यस्त कार्यक्रम में मुक्केबाजी, हॉकी और तीरंदाजी के निर्णायक मुकाबलों से पदकों की संख्या में बड़ा उछाल तय माना जा रहा है।


















