छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खारून नदी के किनारों को सजाने संवारने की महत्त्वाकांक्षी योजना पिछले एक दशक से फाइलों और बैठकों के बीच झूल रही है। लगातार समीक्षा बैठकों और प्रशासनिक कवायदों के बावजूद जमीन पर इस परियोजना का कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा है। स्थिति यह बन गई है कि 61 करोड़ रुपये की लागत वाले इस रिवर फ्रंट के निर्माण के लिए निर्माण एजेंसियां और ठेकेदार आगे आने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से काम शुरू कराने की नीयत से अब तक दो बार निविदाएं निकाली जा चुकी हैं, लेकिन दोनों ही प्रयास पूरी तरह बेनतीजा साबित हुए हैं।
ठेकेदारों की बेरुखी और निविदाओं की नाकामी
इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए जब विभाग ने पहली बार टेंडर निकाला था, तब उसमें सिर्फ दो कंपनियों ने भाग लिया था, जिससे प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। इसके बाद जब दूसरी बार टेंडर जारी किया गया, तो हालात और भी खराब रहे और एक भी ठेकेदार एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अधिकारियों का मानना है कि यह अपने आप में एक अलग और तकनीकी रूप से बड़ा निर्माण कार्य है, इसलिए शुरुआती दौर में एजेंसियां बोली लगाने में झिझक दिखा रही हैं। वहीं विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक दबाव और कार्य के नए स्वरूप की जटिलताओं के चलते ठेकेदार इस काम में हाथ डालने से कतरा रहे हैं। इन दो नाकाम कोशिशों के बाद अब लोक निर्माण विभाग ने 23 सितंबर को तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की है, ताकि किसी सक्षम कंपनी का चयन कर काम को आगे बढ़ाया जा सके।
कैसा होगा 61 करोड़ का नया खारून रिवर फ्रंट
प्रस्तावित योजना के मुताबिक खारून नदी के दोनों किनारों का कायाकल्प कर एक शानदार सार्वजनिक स्थल तैयार किया जाना है। इस मास्टर प्लान के तहत नदी के दोनों तरफ नए भव्य घाट बनाए जाएंगे, जहां नियमित भव्य आरती के लिए विशेष स्थल तैयार होगा। इसके साथ ही आसपास के मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार किया जाएगा और लोगों के टहलने व आराम करने के लिए आधुनिक पाथवे, कैनोपी और बैठने की सुंदर व्यवस्था की जाएगी। पूरे परिसर को खूबसूरत और हरा भरा रूप देने के लिए विस्तृत लैंडस्केपिंग, आकर्षक गार्डन और हरियाली वाले क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है।
श्रद्धालुओं की सुविधाएं और तय समय सीमा
धार्मिक आयोजनों और पर्यटन के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां एक पुलिस कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसके अलावा गाड़ियों के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग स्थल और पूरे नदी तट पर एकरूप सौंदर्यीकरण का खाका खींचा गया है। लोक निर्माण विभाग ने इस 61 करोड़ रुपये की परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने की अवधि निर्धारित की है। काम पूरा होने के बाद यह रिवर फ्रंट राजधानी रायपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, धार्मिक अनुष्ठानों और पर्यटन गतिविधियों का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। अब विभाग की पूरी उम्मीदें 23 सितंबर को जारी तीसरे टेंडर पर टिकी हैं कि इस बार निर्माण कंपनियां आगे आएंगी और दस साल से अधर में लटका यह सपना जमीन पर साकार होगा।


















