कपड़े धोने की तमाम कोशिशों के बावजूद कई बार साफ तौलियों से भी अजीब सी बासी और नमी वाली गंध आने लगती है। इतना ही नहीं, समय के साथ तौलिये इतने कड़े और खुरदुरे हो जाते हैं कि उनसे त्वचा पोंछना भी असहज महसूस होने लगता है। आमतौर पर लोग इसे तौलिया पुराना होने की निशानी मान लेते हैं, लेकिन असल में परेशानी की वजह कुछ और होती है। बार-बार धुलाई के दौरान इस्तेमाल होने वाला डिटर्जेंट, कपड़ों को खुशबूदार बनाने वाला फैब्रिक सॉफ्टनर और पानी में मौजूद प्राकृतिक खनिज धीरे-धीरे तौलिये के सूती रेशों के भीतर जमा होने लगते हैं। यह अदृश्य परत रेशों को आपस में चिपका देती है, जिससे तौलिये की पानी सोखने की क्षमता घटने लगती है और वह भारी व कड़ा महसूस होने लगता है।
तौलियों के रेशों पर क्यों जमती है अवशेषों की परत
जब तौलियों की नियमित धुलाई की जाती है, तो डिटर्जेंट का पूरा हिस्सा पानी के साथ बाहर नहीं निकल पाता। इसके अलावा, तौलियों को मुलायम बनाने के चक्कर में डाला जाने वाला फैब्रिक सॉफ्टनर असल में रेशों के ऊपर एक मोमी परत बना देता है। सफेद सिरका इस समस्या का एक बेहद असरदार और आसान घरेलू समाधान है। सिरके के अंदर प्राकृतिक रूप से एसिटिक एसिड मौजूद होता है। यह एसिड कपड़ों के रेशों पर जमे क्षारीय अवशेषों और खनिजों की परत को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करता है। जब यह जमाव साफ हो जाता है, तो तौलिया एक बार फिर से अपनी पुरानी मुलायमियत हासिल कर लेता है।
सीलन की गंध और बारिश के मौसम का असर
तौलिये में दुर्गंध पैदा होने का सबसे मुख्य कारण उसमें मौजूद नमी है। अगर इस्तेमाल के बाद या धुलाई के बाद तौलिया काफी देर तक गीला पड़ा रहे या उसे हवादार जगह पर सूखने का मौका न मिले, तो उसमें बासी गंध पनपने लगती है। खासकर बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर ज्यादा होने की वजह से यह समस्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में नियमित सफाई के साथ-साथ कभी-कभार सफेद सिरके का इस्तेमाल करने से तौलियों के रेशों में छिपी बदबू पूरी तरह खत्म हो जाती है।
मशीन धुलाई में सफेद सिरके के इस्तेमाल का सही तरीका
तौलियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सफेद सिरके का इस्तेमाल एक तय प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। वॉशिंग मशीन में तौलिये धोते समय मशीन को कपड़ों से पूरी तरह ऊपर तक न भरें, ताकि पानी और डिटर्जेंट को घूमने की पर्याप्त जगह मिल सके। धुलाई के शुरुआती चरण में सामान्य मात्रा में अपना नियमित डिटर्जेंट डालें। इसके बाद मशीन के फैब्रिक सॉफ्टनर वाले डिब्बे या रिंस डिस्पेंसर में लगभग आधा कप यानी 120 मिलीलीटर सफेद सिरका भर दें। इस तरीके से धोने पर सिरका धुलाई के आखिरी कुल्ला चक्र यानी रिंस साइकल के दौरान कपड़ों तक पहुंचेगा और डिटर्जेंट के सारे अवशेषों को बहा ले जाएगा।
स्प्रे विधि और सुखाने का जरूरी नियम
अगर आप वॉशिंग मशीन के डिस्पेंसर में सिरका नहीं डालना चाहते, तो इसे स्प्रे के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए सफेद सिरके को पानी के साथ मिलाकर पतला कर लें और तौलिये पर हल्का छिड़काव करें। ध्यान रखें कि तौलिये को सिरके में पूरी तरह भिगोने की कोई जरूरत नहीं होती। छिड़काव के बाद तौलिये को सामान्य तरीके से डिटर्जेंट से धो लें। धुलाई का चक्र पूरा होते ही तौलियों को तुरंत मशीन से बाहर निकालें और धूप या हवादार जगह पर पूरी तरह सुखाएं। तौलियों को थोड़ी देर भी नम छोड़ना ही दुर्गंध की असली जड़ बनता है।
महीने में सिर्फ एक बार रखरखाव के तौर पर अपनाएं
सफेद सिरके के इस्तेमाल को अपनी रोजमर्रा की आदत बनाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। अगर आपके तौलिये साफ हैं, उनसे कोई गंध नहीं आ रही और वे ठीक से पानी सोख रहे हैं, तो सामान्य डिटर्जेंट से की जाने वाली धुलाई ही पर्याप्त है। सिरके का प्रयोग केवल महीने में एक बार एक मेंटेनेंस उपाय के रूप में किया जाना चाहिए। जिन इलाकों में पानी में खनिजों की मात्रा ज्यादा यानी हार्ड वाटर होता है, वहां तौलियों पर परत जल्दी जमती है, इसलिए वहां यह तरीका बेहद उपयोगी साबित होता है।
ब्लीच के साथ सिरका मिलाने की गंभीर गलती से बचें
सिरके का इस्तेमाल करते समय एक बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा सावधानी का ध्यान रखना अनिवार्य है। सफेद सिरके को कभी भी ब्लीच या किसी भी ऐसे सफाई उत्पाद के साथ नहीं मिलाना चाहिए जिसमें सोडियम हाइपोक्लोराइट मौजूद हो। सिरके के एसिड और सोडियम हाइपोक्लोराइट के बीच रासायनिक क्रिया होने से एक बेहद जहरीली और खतरनाक गैस बनती है जो सांस के लिए घातक हो सकती है। इसलिए तौलियों की धुलाई में सिरका और ब्लीच हमेशा अलग-अलग ही इस्तेमाल किए जाने चाहिए।



















