भारत में बुजुर्गों और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों पुरानी है। घर में रिश्तेदारों का आगमन हो, शादी-विवाह का उत्सव हो या किसी त्योहार का मौका, छोटे अमूमन बड़ों के चरण स्पर्श करते हुए नजर आते हैं। भारतीय परिवारों में इसे उच्च संस्कारों, आदर और आशीर्वाद प्राप्त करने के माध्यम के रूप में देखा जाता है। हालांकि, क्या केवल उम्र में बड़ा होना ही किसी व्यक्ति के आगे झुकने का एकमात्र कारण होना चाहिए? इसी प्रश्न ने इंटरनेट पर एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। डेटिंग ऐप नॉट डेटिंग के सह-संस्थापक जसवीर सिंह ने सोशल मीडिया मंच X पर एक विचारोत्तेजक टिप्पणी साझा की, जिसने परंपराओं और आधुनिक सोच के बीच की रेखा पर बहस छेड़ दी है।
उम्र और सम्मान पर जसवीर सिंह का दृष्टिकोण
जसवीर सिंह ने X पर जारी अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ इसलिए किसी के पैर छूना कि वह उम्र में आपसे बड़ा है, एक तरह की सामाजिक कंडीशनिंग या बचपन से सिखाई गई आदत है, न कि सच्चा सम्मान। उन्होंने तर्क दिया कि ज्यादा उम्र होना अपने आप में कोई विशेष उपलब्धि नहीं है। किसी का चाचा, चाची, रिश्तेदार या परिवार का बड़ा सदस्य होना ही उसे स्वतः इस प्रकार के आदर का पात्र नहीं बना देता।
अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने X पर लिखा, "केवल इसलिए किसी के पैर छूना बंद होना चाहिए क्योंकि वह आपसे उम्र में बड़ा है। यह सम्मान नहीं है, यह सामाजिक अनुकूलन है। भारत में अधिकांश लोग सम्मान के कारण ऐसा नहीं करते, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें बचपन से ऐसा करने के लिए तैयार किया गया है। वे इसलिए झुकते हैं क्योंकि बाकी सब झुक रहे हैं।"
चरित्र और आचरण को बताया असली आधार
जसवीर सिंह के अनुसार, किसी व्यक्ति के प्रति सम्मान उसकी उम्र या पारिवारिक पद से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, ज्ञान, समझदारी और जीवन में किए गए कार्यों से तय होना चाहिए। यदि किसी इंसान का जीवन, उसकी ईमानदारी और उसका मार्गदर्शन आपको प्रेरित करता है, तो उसके प्रति मन में आने वाली आदर की भावना स्वाभाविक और सच्ची होती है।
उन्होंने अपनी बात में यह भी जोड़ा कि केवल रक्त संबंध होना या किसी धार्मिक पोशाक को धारण कर लेना ही किसी को स्वतः सम्मान का हकदार नहीं बना देता। आदर और सम्मान व्यक्ति के आचरण से अर्जित किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परंपरा पर सवाल उठाने का अर्थ बड़ों के प्रति घमंड दिखाना या उनका अनादर करना बिल्कुल नहीं है। सम्मान हमेशा मन की सच्ची भावना से आना चाहिए, न कि किसी सामाजिक दबाव या मजबूरी के कारण।
बचपन से पड़ी आदत और सामाजिक दबाव
भारतीय समाज में बचपन से ही बच्चों को मेहमानों और बुजुर्गों के पैर छूकर नमस्ते करना सिखाया जाता है। जसवीर सिंह का मानना है कि जब कोई व्यवहार बचपन से बार-बार कराया जाता है, तो वयस्क होने के बाद भी लोग बिना सोचे-समझे उसे दोहराते रहते हैं। जब कोई क्रिया बिना किसी आंतरिक भावना के केवल एक रीति-रिवाज के रूप में की जाती है, तो वह सम्मान की जगह केवल एक यांत्रिक अभ्यास बनकर रह जाती है।
सोशल मीडिया पर विभाजित हुई जनता की राय
जसवीर सिंह के इस विचार के सामने आने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिला। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए माना कि दिखावटी या मजबूरी में किया गया प्रणाम बेमानी होता है और सम्मान हमेशा व्यक्ति के गुणों का होना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, कई उपयोगकर्ताओं ने परंपरा के पक्ष में तर्क प्रस्तुत किए। एक यूजर का कहना था कि भारतीय संस्कृति में चरण स्पर्श को केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत गुणों के आकलन के रूप में नहीं, बल्कि आदर के भाव से देखा जाता है। एक अन्य यूजर ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलू को रेखांकित करते हुए लिखा कि पैर छूना सामने वाले व्यक्ति के भीतर मौजूद दिव्य आत्मा और चेतना के प्रति नमन करने का प्रतीक है, चाहे उस व्यक्ति की व्यक्तिगत कमियां कुछ भी हों। इस बहस ने दर्शाया है कि एक ही परंपरा को अलग-अलग लोग अपने संस्कारों और दृष्टिकोण के अनुसार भिन्न अर्थों में देखते हैं।



















