उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पीसीएस अधिकारी और जीएसटी डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस सरकार द्वारा मंजूर कर लिया गया है। इस मंजूरी के बाद उनके प्रशासनिक सेवा से हटने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकारी सेवा से अलग होने के बाद अनुपमा सरोज ने सोशल मीडिया पर एक खास संदेश साझा किया है। इस संदेश के जरिए उन्होंने एक नए संकल्प के साथ अपने जीवन की एक बिल्कुल नई यात्रा की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक परिवार से गहरा ताल्लुक
अनुपमा सरोज का नाता किसी सामान्य परिवार से नहीं बल्कि एक प्रतिष्ठित राजनीतिक पृष्ठभूमि से है। उनकी पारिवारिक जड़ें राजनीति में काफी गहरी रही हैं। उनकी मां सुशीला सरोज समाजवादी पार्टी की तरफ से सांसद रह चुकी हैं, जिन्होंने साल 2004 में मोहनलालगंज लोकसभा सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। इसके अलावा वह राज्य की राजनीति में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। वहीं दूसरी ओर, अनुपमा सरोज के पति अनुराग भदौरिया समाजवादी पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता हैं और वह पहले भी विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक खेमे से जुड़ने की चर्चाओं को और अधिक बल मिल रहा है।
सिधौली सीट और चुनावी अटकलें
राजनीतिक गलियारों और चर्चाओं के बाजार में इस बात की तेज सुगबुगाहट है कि अनुपमा सरोज उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के अंतर्गत आने वाली सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। आपको बता दें कि यह सिधौली सीट अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। हालांकि इन तमाम अटकलों के बीच यह भी स्पष्ट है कि उन्होंने अभी तक अपनी उम्मीदवारी का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है और न ही किसी विशेष राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करने की पुष्टि की है। समाजवादी पार्टी की तरफ से भी अभी तक उन्हें इस सीट के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है, जिसके चलते उनके चुनाव लड़ने की खबरें फिलहाल राजनीतिक अटकलों का ही हिस्सा हैं।
नौकरशाही से राजनीति का बढ़ता रुझान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रशासनिक अधिकारियों का इस्तीफा देकर चुनावी दंगल में उतरने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले आईएएस अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। प्रशासनिक सेवा छोड़ने के तुरंत बाद दिव्या मित्तल ने अपनी खुद की एक राजनीतिक पार्टी का गठन कर लिया है और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का खुला ऐलान भी कर चुकी हैं। अब सभी की निगाहें अनुपमा सरोज के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि क्या वह भी राजनीति की मुख्यधारा में पूरी तरह कदम रखती हैं या नहीं।
राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सरकारी पदों पर आसीन अधिकारियों के इस्तीफे देने और राजनीति की ओर रुख करने की इस प्रवृत्ति ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चुनावी समीकरणों और सियासी उठापटक के लिहाज से आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम बेहद दिलचस्प रहने वाला है।
























