भारत के पूर्वोत्तर सीमांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक नया कदम उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में लोहित नदी पर 460 फीट लंबा पुल तैयार किया गया है। सीमा सड़क महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने इस नव निर्मित मेशाई हाइब्रिड पुल का औपचारिक उद्घाटन किया। इस नए संपर्क मार्ग के बनने से सीमा से सटे दूरदराज के इलाकों और नागरिक बस्तियों को हर मौसम में सुगम आवागमन की सुविधा मिलने जा रही है।
प्रोजेक्ट उदयक और दुर्गम परिस्थितियों में निर्माण
इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट उदयक के तहत 1444 ब्रिज कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया गया है। उद्घाटन समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच बेहद कम समय में कार्य पूरा करने के लिए निर्माण दल की सराहना की। इस क्षेत्र में पहले बने पुल मानसून के दौरान अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाते थे, जिसे देखते हुए इस नए ढांचे को सीमाई बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
रणनीतिक बस्तियों और सुरक्षा बलों को सीधा लाभ
मेशाई गांव में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट उदयक के मुख्य अभियंता एस के वर्मा, 48 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स के कमांडिंग ऑफिसर पंकज स्वासत के साथ सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), बीआरओ के प्रतिनिधि, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। यह पुल वालॉन्ग से आगे स्थित मेशाई, डोंग और काहो जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण सीमावर्ती गांवों को मुख्य मार्ग से मजबूती से जोड़ता है।
नागरिक आवागमन और सीमाई पर्यटन को गति
यह संपर्क ढांचा भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित वालॉन्ग, किबिथू और काहो के बीच सड़क नेटवर्क को काफी मजबूत करेगा। इससे सुरक्षा बलों के वाहनों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की दैनिक आवाजाही बेहद सुगम होगी। प्राकृतिक नजारों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से नजदीकी के कारण पहचाने जाने वाले इस सुरम्य इलाके में बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।



















