मध्य प्रदेश के बघेलखंड अंचल का पारंपरिक भोजन अपनी अनोखी सादगी और शुद्ध देसी मिठास के लिए दूर-दूर तक पहचाना जाता है। मौसम बदलने के साथ ही यहां के चूल्हों पर पकने वाले पकवानों का अंदाज भी बदल जाता है। इस अंचल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां के कई मशहूर पारंपरिक मीठे व्यंजन तैयार करने के लिए न तो किसी दुर्लभ सामग्री की दरकार होती है और न ही घंटों रसोई में पसीना बहाना पड़ता है। इन्हीं सादे मगर बेहद लजीज पकवानों की फेहरिस्त में सिंघाड़े की खीर का नाम प्रमुखता से आता है। सादे दूध और ताजे सिंघाड़े के मेल से तैयार होने वाली यह डिश स्वाद में जितनी उम्दा लगती है, इसे बनाना भी उतना ही सहज है। अगर आप अपने परिवार के लिए बाजार की मिलावटी मिठाइयों से अलग कुछ पारंपरिक और पौष्टिक आजमाना चाहते हैं, तो यह देसी मिठास आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है।
सर्दियों के दिनों में अधिकतर लोग सिंघाड़े को केवल कच्चा छीलकर खाते हैं या फिर पानी में उबालकर चाट की तरह इस्तेमाल करते हैं। बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसी ताजे फल से एक बेहद मलाईदार और सुगंधित खीर भी बनाई जा सकती है। जब कद्दूकस किया हुआ सिंघाड़ा धीमी आंच पर पकते हुए गाढ़े दूध के साथ घुलता है, तो उसका प्राकृतिक सौंधापन दूध में मिलकर एक अलग ही स्वाद घोल देता है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक देसी मिठाइयों के शौकीन इसे बेहद चाव से शामिल करते हैं।
तैयारी और सिंघाड़े को छीलने का सही तरीका
स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी के अनुसार, घर पर सिंघाड़े की खीर बनाना बेहद सरल काम है और इसमें वही सामग्री लगती है जो अमूमन हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले बाजार से ताजे और साफ सिंघाड़े चुनकर लाएं। इनकी मात्रा आप अपने परिवार के सदस्यों और जरूरत के अनुसार तय कर सकते हैं। इसके बाद सभी सिंघाड़ों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और उनका बाहरी सख्त छिलका पूरी तरह उतार दें। जब सफेद गूदा अलग हो जाए, तब उसे कद्दूकस कर लें। अंजलि चतुर्वेदी ने बताया कि सिंघाड़ों की सफाई पर खास ध्यान देना जरूरी है, ताकि तैयार होने वाली खीर में किसी तरह का कसैलापन न रहे और फल का शुद्ध स्वाद खुलकर सामने आ सके।
दूध में कद्दूकस किया सिंघाड़ा मिलाने की विधि
खीर बनाने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक छोटी कड़ाही लें और उसमें दूध डालकर चूल्हे पर धीमी आंच पर गर्म होने के लिए रख दें। जब दूध में हल्की गर्माहट आ जाए और वह पकना शुरू हो, ठीक उसी समय उसमें कद्दूकस करके रखा गया सिंघाड़ा मिला दें। इसके तुरंत बाद चम्मच या करछुल की मदद से मिश्रण को लगातार चलाते रहना चाहिए। लगातार चलाने से कद्दूकस किया हुआ सिंघाड़ा दूध में एकसमान रूप से मिल जाता है और कड़ाही के तले में चिपकने या जलने का कोई खतरा नहीं रहता। जब दोनों चीजें अच्छी तरह घुल-मिल जाएं, तब इसमें अपनी पसंद के हिसाब से चीनी मिला दें। चीनी की मात्रा आप अपने परिवार के स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा रख सकते हैं। चीनी डालने के बाद पूरे मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं ताकि वह पूरी तरह घुल जाए।
धीमी आंच पर महज पांच से दस मिनट में होगी तैयार
इस पारंपरिक व्यंजन की खासियत यह है कि इसे तैयार होने में लंबा वक्त बिल्कुल नहीं लगता। दूध, सिंघाड़ा और चीनी के इस पूरे घोल को बस धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाना होता है। थोड़ी ही देर में सिंघाड़े का गूदा पककर दूध को गाढ़ा करने लगता है और देखते ही देखते कड़ाही में मौजूद मिश्रण सामान्य चावल की खीर जैसा गाढ़ा और मलाईदार नजर आने लगता है। जैसे ही इसकी बनावट खीर जैसी गाढ़ी हो जाए, वैसे ही समझ लें कि आपकी स्वादिष्ट सिंघाड़े की खीर बनकर तैयार हो चुकी है। अंजलि चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि इसे धीमी आंच पर केवल 5 से 10 मिनट तक पकाना ही पर्याप्त होता है। खीर तैयार होने के बाद आप चाहें तो ऊपर से बारीक कटे हुए मेवे और पिसी हुई इलायची डाल सकते हैं। इलायची की खुशबू और मेवों की मौजूदगी से यह व्यंजन दिखने में भी आकर्षक लगता है और इसका स्वाद भी कई गुना बढ़ जाता है।
व्रत के फलाहार से लेकर मेहमानों के स्वागत तक
सिंघाड़े की खीर की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि इसे हर तरह के मौके पर परोसा जा सकता है। चूंकि सिंघाड़ा फलाहारी माना जाता है, इसलिए घर की महिलाएं इसे आमतौर पर विभिन्न धार्मिक उपवासों और व्रतों के दौरान फलाहार के रूप में तैयार करती हैं। वहीं दूसरी तरफ, घर पर अचानक मेहमानों के आ जाने पर या किसी पारिवारिक उत्सव के मौके पर भी इसे झटपट मीठे पकवान के तौर पर पेश किया जा सकता है। यह डिश उन तमाम लोगों के लिए एक नायाब विकल्प है जो रोजाना खाई जाने वाली आम मिठाइयों से ऊब चुके हैं और कुछ नया व पारंपरिक देसी स्वाद चखने की चाह रखते हैं।
बघेलखंड की रसोई से निकली यह सादी सी खीर यह संदेश भी देती है कि असली स्वाद हमेशा महंगे तामझाम का मोहताज नहीं होता। बाजार से केमिकल और मिलावट वाली महंगी मिठाइयां खरीदने के बजाय घर में मौजूद थोड़े से दूध और ताजे सिंघाड़े से ही पौष्टिक और लाजवाब पकवान तैयार किया जा सकता है।



















