उत्तर प्रदेश के आगरा में फेस्टिव सीजन आते ही बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। त्योहारों पर बनने वाले खास व्यंजनों और मिठाइयों की वजह से दूध और पनीर की मांग काफी बढ़ चुकी है। जब भी मांग में ऐसा तेज उछाल आता है, तब बाजार में मिलावटी या सिंथेटिक पनीर बिकने की आशंका भी काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में आम ग्राहकों के लिए असली और नकली पनीर में फर्क समझ पाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है, क्योंकि देखने में दोनों अक्सर एक जैसे ही नजर आते हैं। मिलावटी उत्पाद न केवल पकवान का स्वाद खराब करते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
स्वाद, महक और बनावट से करें प्राथमिक जांच
आगरा में पिछले 15 वर्षों से पनीर का कारोबार संभाल रहे पवन कुमार के अनुसार, बाजार में अलग-अलग गुणवत्ता का पनीर बेचा जा रहा है। ग्राहकों को खरीदारी करते वक्त पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए और केवल रंग-रूप देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। घर पर कुछ आसान देसी तरीकों को अपनाकर पनीर की शुद्धता की प्रारंभिक जांच की जा सकती है। इसके लिए पनीर की बनावट, उसकी खुशबू, रंग और स्वाद पर बारीकी से गौर करना होता है।
शुद्ध पनीर प्राकृतिक रूप से काफी नरम और स्पंजी होता है। जब आप असली पनीर के टुकड़े को हाथ की उंगलियों से हल्का दबाते हैं, तो उसमें एक स्वाभाविक कोमलता और लचीला दबाव महसूस होता है। अगर पनीर छूने में बहुत ज्यादा कड़ा, रबड़ जैसा खिंचने वाला या जरूरत से ज्यादा चिकना लगे, तो उसमें मिलावट की गुंजाइश हो सकती है। इसके अलावा किसी भी तरह की असामान्य रासायनिक गंध या खट्टापन महसूस होने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
नकली पनीर में कड़वाहट और रंग बदलने की समस्या
पवन कुमार बताते हैं कि पनीर की पहचान करने का सबसे सटीक संकेत उसका स्वाद होता है। असली पनीर खाने पर दूध की स्वाभाविक मिठास और ताजगी का अहसास कराता है। दूसरी तरफ, अगर पनीर में किसी भी तरह की मिलावट की गई है, तो उसका स्वाद अलग लगेगा और खाते समय जीभ पर हल्की कड़वाहट महसूस हो सकती है। स्वाद में जरा भी असामान्यता दिखे तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए।
रंग की बात करें तो शुद्ध पनीर को कुछ घंटों तक फ्रिज से बाहर सामान्य तापमान पर खुला रखने पर भी उसका सफेद रंग बरकरार रहता है। इसके विपरीत, नकली या मिलावटी पनीर को अगर कुछ देर खुले में छोड़ दिया जाए, तो वह धीरे-धीरे पीला पड़ने लगता है। साथ ही नकली पनीर में अस्वाभाविक चिकनाई नजर आ सकती है, जो उसमें मिलाए गए घटिया तेल का संकेत देती है। किसी भी तरह के गंभीर संदेह की स्थिति में खाद्य विभाग की प्रयोगशाला में जांच करवाना ही सबसे विश्वसनीय कदम माना जाता है।
शुद्ध दूध से कैसे बनता है असली पनीर
असली पनीर तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह शुद्ध दूध पर आधारित होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले ताजे दूध को एक बड़े बर्तन में अच्छी तरह उबाला जाता है। दूध के खौलने के बाद उसमें नींबू का रस अथवा फूड-ग्रेड साइट्रिक एसिड डालकर दूध को धीरे-धीरे फाड़ा जाता है। जैसे ही दूध फटता है, पानी अलग हो जाता है और छेना अलग निकल आता है। इसके बाद एक साफ और बारीक कपड़े की मदद से पानी को पूरी तरह छान लिया जाता है। बचे हुए ठोस हिस्से को कपड़े में लपेटकर किसी भारी वजन से दबाया जाता है, जिससे अतिरिक्त नमी बाहर निकल जाती है और कुछ ही देर में ताजा, शुद्ध और मुलायम पनीर तैयार हो जाता है।
पाउडर और रिफाइंड ऑयल से तैयार हो रहा नकली पनीर
पवन कुमार ने आगाह किया कि बाजार में कुछ मुनाफाखोर शुद्ध दूध की जगह मिल्क पाउडर का इस्तेमाल करके पनीर तैयार करते हैं। पनीर में जरूरी चिकनाई और चमक लाने के लिए उसमें घटिया रिफाइंड तेल मिलाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। रिफाइंड और पाउडर से तैयार यह उत्पाद देखने में भले ही पनीर जैसा लगे, लेकिन इसमें पोषण शून्य होता है और यह पाचन तंत्र के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने खरीदारों को सलाह दी कि वे केवल भरोसेमंद और प्रतिष्ठित दुकानों से ही डेयरी उत्पाद खरीदें। अत्यधिक सस्ते दामों के लालच में आकर अनजान दुकानों से पनीर खरीदने से हमेशा बचना चाहिए।
















