सर्दियों के करीब आते ही राजधानी और आसपास के इलाकों में धुंध की चादर गहरी होने लगी है। सुबह और शाम के समय वायुमंडल में जमा होने वाला धुआं और धूल कण सांसों को भारी कर रहे हैं, जिससे लोग एक बार फिर सुरक्षा के लिए मास्क निकालने पर मजबूर हो गए हैं। इस समय दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 200 के स्तर पर पहुंच गया है, जो हर साल कड़ाके की ठंड पड़ने पर 300 से 400 तक के बेहद खतरनाक स्तर को छू जाता है। सड़कों पर निकलते वक्त तो मास्क चेहरे को कुछ हद तक बचा लेता है, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर दाखिल होने वाली जहरीली हवा से निपटने के लिए गमलों में लगे पौधे सबसे आसान और प्राकृतिक सहारा बन रहे हैं।
हर पौधा नहीं करता हवा की सफाई
कमरे या बालकनी में रखे जाने वाले सभी पौधे एक जैसे नहीं होते और न ही हर पौधा विषैले तत्वों को छानने की क्षमता रखता है। छतरपुर स्थित दिल्ली की सबसे पुरानी नर्सरी के संचालक गया प्रसाद के अनुसार, लोग अक्सर बिना सोचे-समझे सजावटी पौधे खरीद लाते हैं, जबकि अधिकांश पौधे केवल देखने में अच्छे होते हैं। हवा से सूक्ष्म प्रदूषकों को हटाने में मुख्य रूप से तीन विशेष पौधे ही सबसे ज्यादा असरदार साबित होते हैं। जब भी शहर में प्रदूषण का स्तर बिगड़ता है, तब इन खास पौधों की मांग नर्सरियों में तेजी से बढ़ने लगती है।
प्रदूषण से मुकाबले में अरालिया स्नो व्हाइट सबसे आगे
वायु शुद्धिकरण की सूची में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम अरालिया स्नो व्हाइट का है। यह पौधा आकार में काफी छोटा होता है, जिससे इसे किसी भी टेबल, खिड़की या कमरे के कोने में आसानी से सजाया जा सकता है। इसकी पत्तियां किनारों से सफेद रंग की होती हैं, जो न केवल देखने में बेहद आकर्षक लगती हैं बल्कि हवा में तैरने वाले बारीक प्रदूषक तत्वों और धूल के कणों को सोखने की विशेष क्षमता रखती हैं। घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ यह पौधा हवा को साफ करने का दोहरा फायदा देता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही इस पौधे की खरीदारी बढ़ जाती है और नर्सरी में इसकी शुरुआती कीमत 400 रुपए से तय होती है।
सर्दियों में बढ़ जाती है स्नेक प्लांट और एरिका पाम की मांग
अरालिया के अलावा दो अन्य पौधे भी प्रदूषण से बचाव में दशकों से भरोसेमंद माने जाते रहे हैं, जिनमें स्नेक प्लांट और एरिका पाम शामिल हैं। सर्दियों के महीनों में घरों के अंदर शुद्ध हवा का प्रवाह बनाए रखने के लिए इन दोनों की बिक्री सबसे तेज गति से होती है। इस मौसम में भी नर्सरियों में लोग इनकी तलाश में पहुंच रहे हैं। इन पौधों की कीमत उनके आकार पर निर्भर करती है। छोटे आकार के गमले लगभग 250 रुपए में उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि पूरी तरह विकसित और बड़े आकार के पौधे 800 रुपए तक की कीमत में बिकते हैं। इन्हें लिविंग रूम या बेडरूम में रखकर कमरे के वातावरण को काफी हद तक ताजा रखा जा सकता है।
इनडोर पौधों की देखभाल में होने वाली गलतियां
अक्सर लोग नर्सरी से पौधा लाने के बाद कुछ ही दिनों में उसके सूखने या गलने की शिकायत करते हैं। गया प्रसाद बताते हैं कि पौधे खराब होने का मुख्य कारण सही देखभाल का अभाव है। कमरे के भीतर रखे जाने वाले पौधे पूरी तरह धूप से दूर रहते हैं, फिर भी कई लोग इनमें रोजाना पानी भर देते हैं। मिट्टी हर वक्त गीली रहने के कारण पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और पत्तियां पीली पड़कर गिर जाती हैं। पौधों को लंबे समय तक हरा-भरा और जीवित रखने के लिए पानी देने के नियम का सख्ती से पालन करना चाहिए।
पानी और खाद का सही संतुलन जरूरी
छाया में रहने वाले इनडोर पौधों को हफ्ते में केवल दो से तीन बार ही पानी की जरूरत होती है। पानी डालने से पहले गमले की मिट्टी को छूकर देखना चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि मिट्टी वास्तव में सूखी है या नहीं। यदि मिट्टी पहले से गीली हो, तो बिल्कुल भी पानी न डालें। पौधों की मजबूती और पोषण के लिए रासायनिक तत्वों के बजाय प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित उपाय है। गमलों में नियमित अंतराल पर वर्मी कम्पोस्ट और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और वे पूरे साल स्वस्थ बने रहते हैं।
















