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घर पर उगाएं शुद्ध और ताजे मसाले, गमलों और खाली जमीन में बुवाई का यह है सही तरीकाजीवनशैली
3 अक्तू॰ 2026, 9:43 pm (42 मिनट पहले)· 0

घर पर उगाएं शुद्ध और ताजे मसाले, गमलों और खाली जमीन में बुवाई का यह है सही तरीका

अक्टूबर और नवंबर का महीना रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों की बागवानी के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जिसमें बलुई मिट्टी और उचित खाद से अच्छी पैदावार मिलती है।

अक्टूबर के महीने में मौसम का मिजाज बदलते ही बागवानी के शौकीनों के लिए बेहतरीन अवसर सामने आता है। हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत के साथ जब जमीन और मिट्टी का तापमान कम होने लगता है, तो यह समय कई प्रकार के मसालों की बुवाई के लिए सबसे मुफीद बन जाता है। बाजार में मिलने वाले रासायनिक मिलावट वाले मसालों से बचने और रोजमर्रा की खरीदारी के खर्च को कम करने के लिए घर पर किचेन गार्डनिंग शुरू की जा सकती है। इस तकनीक की मदद से आंगन या छत पर बेकार पड़ी खाली जमीन और पुराने गमलों का भी रचनात्मक इस्तेमाल संभव हो जाता है।

अक्टूबर और नवंबर में इन मसालों की करें बुवाई

माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर के दौरान कोई भी व्यक्ति अपने घर पर गमलों में या खाली पड़ी जमीन पर आसानी से मसाले उगा सकता है। इस मौसम में सौंफ, अजवाइन, मेथी, अदरक और धनिया जैसी दैनिक उपयोग की फसलें लगाई जा सकती हैं। सही समय पर बुवाई करने से पूरे सीजन ताजे मसालों की निर्बाध आपूर्ति बनी रहती है। हालांकि, इन पौधों की बेहतर बढ़वार और जड़ों के समुचित विकास के लिए बलुई मिट्टी का होना अनिवार्य है।

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गमलों के लिए मिट्टी और खाद का सही अनुपात

गमलों में इन फसलों को लगाने के लिए मिट्टी का संतुलित मिश्रण तैयार करना बेहद आवश्यक होता है। आदर्श मिश्रण के लिए 50 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट अथवा रेत को आपस में मिलाना चाहिए। इस खास अनुपात से गमले में जल निकासी का स्तर एकदम सही बना रहता है और पौधों की जड़ें गलती नहीं हैं। बीजों की बुवाई के बाद गमलों की देखरेख के तहत उन्हें ऐसे स्थान पर व्यवस्थित करना चाहिए जहां जरूरत से ज्यादा छाया न हो और पौधों को पर्याप्त धूप मिल सके।

खाली जमीन पर बुवाई के समय बरतें यह सावधानी

यदि मसालों की बुवाई खुले भूखंड या खाली पड़ी जमीन पर की जा रही है, तो जमीन के जलभराव वाले स्वभाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बुवाई उसी स्थान पर करनी चाहिए जहां बारिश या पानी देने के बाद जलजमाव की समस्या न बनती हो। इन मसाला फसलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि बुवाई के बाद इन्हें बार-बार या अत्यधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके अतिरिक्त, इन पौधों पर आमतौर पर हानिकारक कीटों का प्रकोप भी नहीं होता, जिससे बिना किसी जटिल रखरखाव के भरपूर उपज प्राप्त की जा सकती है।

सवाल-जवाब

किचेन गार्डनिंग में मसाले लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर और नवंबर का महीना किचेन गार्डनिंग के तहत मसाले लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
इस मौसम में घर पर कौन-कौन से मसाले उगाए जा सकते हैं?
इस दौरान घर के गमलों या जमीन पर सौंफ, अजवाइन, मेथी, अदरक और धनिया आसानी से उगाए जा सकते हैं।
गमले में मसाले लगाने के लिए मिट्टी का क्या अनुपात होना चाहिए?
गमलों के लिए 50 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट या रेत मिलानी चाहिए।
मसालों की बुवाई के लिए किस तरह की मिट्टी अनिवार्य है?
बेहतर पैदावार और पौधों के विकास के लिए बलुई मिट्टी का होना अनिवार्य माना गया है।
खाली जमीन पर मसाले बोते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
खाली जमीन पर बुवाई करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उस जगह पर पानी का ठहराव या जलजमाव न होता हो।
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