आधुनिक समय में अधिकांश घरों की रसोई में गैस सिलेंडर और इंडक्शन कुकटॉप का चलन बहुत बढ़ चुका है। खाना तेजी से पक जाने और कम मेहनत लगने के कारण लोगों की निर्भरता इन आधुनिक साधनों पर ज्यादा हो गई है। इसके विपरीत एक समय ऐसा भी था, जब गांवों से लेकर कस्बों और शहरों के अधिकांश घरों में भोजन पकाने का मुख्य माध्यम मिट्टी का चूल्हा ही हुआ करता था। उस पारंपरिक चूल्हे पर धीमी आंच में बने भोजन का सोंधा स्वाद लोग आज भी याद करते हैं। हालांकि, जीवनशैली में बदलाव और बाजार में तैयार चूल्हे न मिलने की वजह से यह पारंपरिक साधन लगभग लुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
बाजारों में रेडीमेड मिट्टी का चूल्हा खोजना अब बेहद मुश्किल काम बन चुका है। ऐसे में जो लोग मिट्टी के चूल्हे पर पकाए गए भोजन का वही पारंपरिक और अनोखा स्वाद फिर से चखना चाहते हैं, वे इसे घर पर ही अपने हाथों से तैयार कर सकते हैं। इसके निर्माण में बहुत भारी भरकम खर्च या परेशानी नहीं आती है, बल्कि आसपास उपलब्ध साधारण चीजों की मदद से कुछ ही समय में एक बेहद टिकाऊ और सुंदर चूल्हा बनाया जा सकता है।
चूल्हा निर्माण के लिए जरूरी सामग्री और उसका अनुपात
मिट्टी का मजबूत चूल्हा तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज काली चिकनी मिट्टी होती है। इसके अलावा निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए उपयुक्त मात्रा में पानी और थोड़ा सूखा भूसा अपने पास रखना जरूरी होता है। चूल्हा बनाने की प्रक्रिया को साझा करते हुए राजकुमारी ने बताया कि काली चिकनी मिट्टी को पर्याप्त पानी मिलाकर बहुत अच्छी तरह गूंथना चाहिए, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे। जब मिट्टी सही तरीके से सन जाए, तब उसमें सीमित मात्रा में भूसा मिलाया जाता है। मिट्टी में भूसे का यह मिश्रण चूल्हे की पकड़ को मजबूत बनाता है और सूखने के दौरान उसमें दरारें पड़ने से रोकता है।
ढांचा खड़ा करने और सुखाने की पूरी विधि
जब मिट्टी और भूसे का लेप पूरी तरह तैयार हो जाए, तब उसकी सहायता से चूल्हे की मुख्य बनावट गढ़ी जाती है। अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक लगभग 6 से 7 इंच ऊंची गोल या चौकोर संरचना तैयार की जाती है। इस ढांचे के सामने वाले हिस्से में एक खुला छोटा मुंह छोड़ा जाता है, जिससे भोजन पकाते वक्त अंदर सूखी लकड़ियां या ईंधन आसानी से डाला जा सके। बर्तन को सही ढंग से टिकाने के लिए ऊपर तीन उभार या किनारे बनाए जाते हैं।
संरचना पूरी तरह बन जाने के बाद उसे तुरंत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, बल्कि उसे पूरी तरह सूखने देना जरूरी होता है। मौसम और नमी के आधार पर इसे प्राकृतिक रूप से सूखने में अक्सर 2 से 3 दिन का समय लग जाता है। जब चूल्हा पूरी तरह सूखकर कड़ा और मजबूत हो जाए, तब चिकनी मिट्टी और पानी का पतला घोल तैयार करके चूल्हे के चारों तरफ लेप लगाया जाता है। इस अंतिम लिपाई से चूल्हा बिल्कुल चिकना, आकर्षक और इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है।



















