हैदराबाद के गुडीमलकापुर इलाके में स्थित कृषि बाज़ार समिति का प्रांगण सुबह 4 बजते ही पूरी तरह सक्रिय हो जाता है। तड़के की ठंडक के बीच चारों तरफ बिखरी फूलों की महक और खरीदारों की चहल-पहल इस जगह को जीवंत बना देती है। यह बाज़ार केवल हैदराबाद शहर ही नहीं, बल्कि पूरे तेलंगाना राज्य के लिए फूलों की बिक्री और वितरण का मुख्य केंद्र माना जाता है। चाहे शादी-विवाह का अवसर हो, कोई पारिवारिक या धार्मिक अनुष्ठान हो, अथवा गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हों, पूरे क्षेत्र में सजावट के लिए आवश्यक फूलों की अधिकांश पूर्ति इसी मंडी के ज़रिये की जाती है।
कई राज्यों से फूलों की आवक और विविधता
गुडीमलकापुर मंडी की सबसे बड़ी खासियत यहाँ मिलने वाली फूलों की विशाल विविधता है। यहाँ पारंपरिक और स्थानीय किस्मों के अलावा दूर-दराज से आने वाले विदेशी फूल भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले गेंदा, सेवंती, चमेली, मोगरा, गुलाब और कमल के साथ-साथ यहाँ विशेष सजावट में काम आने वाले जरबेरा, कार्नेशन, ऑर्किड, लिली और रंग-बिरंगी पत्तियाँ भी बड़े पैमाने पर बिकती हैं। आपूर्ति की बात करें तो तेलंगाना के आसपास के ग्रामीण जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रतिदिन मालवाहक वाहनों में ताज़ा स्टॉक यहाँ पहुँचता है। इस वजह से तड़के ही स्थानीय दुकानदार, बड़े इवेंट प्लानर और आम ग्राहक थोक दरों पर खरीदारी करने जमा हो जाते हैं।
खुदरा बाज़ार के मुकाबले 50 फीसदी तक की बचत
आम दिनों में शहर की सामान्य खुदरा दुकानों की तुलना में गुडीमलकापुर मंडी में फूल 40 से 50 प्रतिशत तक सस्ते मिल जाते हैं। त्योहारों के मौकों पर जब बाहरी बाज़ारों में गेंदा या सेवंती के भाव 200 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक उछल जाते हैं, तब भी इस थोक बाज़ार में ये 70 से 120 रुपये प्रति किलो के दायरे में आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इसी तरह मोगरे की मालाएं, जो शहर की दुकानों पर 80 से 100 रुपये में बेची जाती हैं, यहाँ प्रति मूरा (माप की एक इकाई) केवल 25 से 30 रुपये में मिल जाती हैं। इस भारी अंतर के कारण आम उपभोक्ता भी त्यौहारों के दौरान यहाँ से खरीदारी करना पसंद करते हैं।
खरीदारी का सही समय और यातायात संबंधी सलाह
यदि कोई व्यक्ति इस मंडी में जाकर खरीदारी करने की योजना बना रहा है, तो सुबह 4:00 बजे से 8:00 बजे के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय अवधि में सबसे ताज़ा माल मिलता है और थोक भावों का सही लाभ उठाया जा सकता है। हालाँकि, त्योहारों के दिनों में यहाँ भारी भीड़ एकत्रित होती है, जिससे बाज़ार के आसपास लगभग एक किलोमीटर तक लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। भीड़-भाड़ की स्थिति को देखते हुए बाज़ार प्रबंधन और स्थानीय निवासियों का परामर्श है कि खरीदार चार पहिया वाहनों का प्रयोग करने से बचें। आसानी से आवाजाही के लिए दोपहिया वाहनों या सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करना ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है।



















