हवाई सफर को आमतौर पर सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन उड़ान के दौरान अचानक आने वाले हवा के तेज झटके यानी एयर टर्बुलेंस अच्छे-अच्छे यात्रियों को डरा देते हैं। वॉशिंगटन में रहने वाले भारतीय मूल के 18 वर्षीय छात्र आदित्य सेनगुप्ता के लिए विमान का ऐसा ही एक डरावना अनुभव केवल एक कड़वी याद बनकर नहीं रहा। इसके बजाय, उन्होंने इस अनुभव को एक बड़े वैज्ञानिक शोध का आधार बना लिया। वायुमंडलीय अशांति का सटीक पूर्वानुमान लगाने वाले उनके इस शोध के लिए उन्हें प्रतिष्ठित डेविडसन इंस्टीट्यूट द्वारा साल 2026 के 'डेविडसन फेलो ल्यूरेट' सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान के साथ ही आदित्य को 1 लाख डॉलर (लगभग 95 लाख रुपये) की बड़ी स्कॉलरशिप भी प्रदान की गई है।
एक खौफनाक सफर जिसने दिया शोध का नया विचार
इस अनूठे आविष्कार की शुरुआत आदित्य के साथ हुए एक व्यक्तिगत हादसे से हुई थी। एक बार जब वे हवाई यात्रा कर रहे थे, तो उनका विमान भयानक टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। विमान के हिचकोले खाने से यात्री सहम गए। इस हादसे के बाद आदित्य के दिमाग में एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जब मौसम, आंधी-तूफान और बादलों का पूर्वानुमान इतनी आसानी से लगाया जा सकता है, तो विमान को हिला देने वाले इन अचानक झटकों का पहले से पता लगाना इतना कठिन क्यों है? इसी सवाल ने उन्हें इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने वायुमंडलीय विज्ञान (एटमॉस्फेरिक साइंस), टर्बुलेंस फिजिक्स और मशीन लर्निंग का गहराई से अध्ययन किया और इस समस्या को सुलझाने में जुट गए।
क्या है ForeCAT और कैसे काम करता है यह अनूठा AI सिस्टम?
अपने कड़े परिश्रम से आदित्य ने 'ForeCAT' नाम का एक बेहद आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैयार किया है। यह एआई मॉडल सामान्य पूर्वानुमान प्रणालियों की तुलना में काफी अलग और उन्नत है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कंप्यूटर विज्ञान और भौतिक विज्ञान के नियमों का एक बेहतरीन संयोजन पेश करता है। यह मशीन लर्निंग को सीधे वायुमंडलीय भौतिकी (एटमॉस्फेरिक फिजिक्स) के सिद्धांतों से जोड़ता है। इसके न्यूरल नेटवर्क के भीतर भौतिकी के नियमों को इस तरह सेट किया गया है कि यह हवा के प्रवाह को बारीकी से समझ सकता है। इससे यह पहले ही भांप लेता है कि आसमान का कौन सा हिस्सा टर्बुलेंस की चपेट में आने वाला है।
इस एआई मॉडल की सटीकता भी हैरान करने वाली है। रीजेनरॉन ISEF (इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर) में प्रस्तुत किए गए शोध आंकड़ों के अनुसार, ForeCAT ने टर्बुलेंस का पता लगाने में 95 प्रतिशत की वर्गीकरण सटीकता (क्लासिफिकेशन एक्यूरेसी) दर्ज की है। यह सटीकता वर्तमान समय में विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक उपकरणों से बहुत ज्यादा है। इस सिस्टम की क्षमता की परख करने के लिए जब पुराने विमान हादसों का विश्लेषण किया गया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। मई 2024 में हुए सिंगापुर एयरलाइंस के दर्दनाक हादसे का विश्लेषण करते समय इस सिस्टम ने 87 प्रतिशत सटीकता के साथ टर्बुलेंस का पहले ही अनुमान लगा लिया था।
नाकामियों से सीखकर पाई बड़ी सफलता
आदित्य की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई बार असफलताओं का स्वाद चखना पड़ा। शोध के दौरान उनके कई शुरुआती मॉडल पूरी तरह विफल रहे और उन्हें कई बार अपना काम बीच में ही छोड़कर नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। हालांकि, वे इन असफलताओं से निराश नहीं हुए। उनका मानना है कि विज्ञान और अनुसंधान में असफल प्रयोग भी उतने ही मूल्यवान और सीखने वाले होते हैं जितने कि सफल परिणाम। पढ़ाई और अनुसंधान के अलावा आदित्य को रोबोटिक्स में भी महारत हासिल है। उनकी रोबोटिक्स टीम वीईएक्स रोबोटिक्स (VEX Robotics) वर्ल्ड चैंपियनशिप में दुनिया भर में दूसरे स्थान पर रह चुकी है।
विमानन क्षेत्र के लिए क्यों बेहद उपयोगी है यह तकनीक?
आदित्य ने इस एडवांस सिस्टम को केवल एक स्कूल प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से वास्तविक दुनिया की व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया है। आने वाले समय में इस तकनीक को एयर-ट्रैफिक कंट्रोल प्रणालियों और फ्लाइट-प्लानिंग सॉफ्टवेयर के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। यदि विमान के पायलटों को उड़ान के दौरान खतरनाक टर्बुलेंस वाले क्षेत्रों की जानकारी पहले ही मिल जाए, तो वे समय रहते विमान का मार्ग या उसकी ऊंचाई बदल सकते हैं। आदित्य की यह अनूठी तकनीक भविष्य में दुनिया भर के लाखों हवाई यात्रियों के सफर को सुरक्षित बनाने और उनकी जान बचाने में एक क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती है।



















