नागौर के जेएलएन अस्पताल ने मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान होने वाली असुविधाओं से बचाने के लिए अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अस्पताल में अब मरीजों को OPD पर्ची बनवाने और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से जुड़े कामों के लिए लंबी लाइनों में खड़े होकर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए न केवल काउंटरों की संख्या बढ़ा दी है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल में होने वाली भीड़ को नियंत्रित करना और मरीजों के काम को तेजी से पूरा करना है।
पर्ची काउंटरों की संख्या में वृद्धि और कतारों का नया नियम
जेएलएन अस्पताल में पहले OPD पर्ची बनाने के लिए केवल दो ही काउंटर संचालित किए जा रहे थे, जिसकी वजह से मरीजों को पर्ची बनवाने में काफी समय लगता था और वहां भारी भीड़ जमा हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन ने अब काउंटरों की संख्या बढ़ाकर तीन कर दी है। एक नया काउंटर शुरू होने से मरीजों को अपनी पर्ची बनवाने के लिए ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन ने भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए महिला, पुरुष और बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग-अलग कतारें लगाने की व्यवस्था की है।
इस अलग कतार प्रणाली से पर्ची काउंटरों पर होने वाली अफरातफरी थमेगी और मरीज बिना किसी परेशानी के अपनी निर्धारित लाइन में खड़े होकर आसानी से पर्ची बनवा सकेंगे। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मरीजों का कीमती समय बचेगा और उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के कक्ष तक पहुंचने में आसानी होगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा बुजुर्ग मरीजों को मिलेगा, जिन्हें अब पर्ची लेने के लिए घंटों सामान्य कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ी
मरीजों को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (जिसे मां योजना भी कहा जाता है) का लाभ जल्द से जल्द दिलाने के लिए अस्पताल में ऑपरेटरों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। इस कल्याणकारी योजना के तहत मरीजों के दस्तावेजों के सत्यापन और क्लेम की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अब पहले से कहीं अधिक कर्मचारी तैनात किए गए हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस योजना से जुड़े कार्यों को संभालने के लिए अब 8 ऑपरेटर मौजूद रहेंगे, जो मरीजों की एंट्री से लेकर दस्तावेजों की जांच और क्लेम दर्ज करने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करेंगे।
इसके अतिरिक्त, योजना के काम को और अधिक सुचारू बनाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। वर्तमान में MCH विंग में चार ऑपरेटर पहले से ही काम कर रहे हैं। इसके साथ ही जेएलएन अस्पताल में दो नर्सिंग स्टाफ और MCH विंग में दो नर्सिंग स्टाफ को भी इस व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इस प्रकार, कुल 16 कर्मचारियों की एक विशेष टीम इस योजना से संबंधित सभी कार्यों को पूरी तत्परता से संभालेगी। इस कार्यबल में हुई वृद्धि से मरीजों के क्लेम और दस्तावेजों की प्रोसेसिंग बहुत तेजी से हो सकेगी।
क्लेम प्रक्रिया तेज होने से अस्पताल के फंड में हुई भारी बढ़ोतरी
अस्पताल प्रशासन का पूरा ध्यान केवल मरीजों का इंतजार कम करने पर ही केंद्रित नहीं है, बल्कि वे योजना के तहत मिलने वाले क्लेम को भी समय पर दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। क्लेम की एंट्री प्रक्रिया में आई तेजी की वजह से अस्पताल को मिलने वाले सरकारी फंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में अस्पताल को लगभग 40 लाख रुपये का फंड प्राप्त हुआ था, जो अगस्त में बढ़कर लगभग 65 लाख रुपये हो गया। अब इस सुधरी हुई व्यवस्था के दम पर प्रशासन ने सितंबर महीने में 80 लाख रुपये का फंड हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि फंड में होने वाली इस बढ़ोतरी का सीधा इस्तेमाल जेएलएन अस्पताल में मरीजों के लिए नागरिक सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने में किया जाएगा। नई काउंटर व्यवस्था, अलग-अलग कतारों के नियम और आयुष्मान योजना के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस पूरी कवायद का एकमात्र उद्देश्य अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली को तेज और मरीज-अनुकूल बनाना है।




















