रोजमर्रा के भोजन में अरहर दाल भारतीय घरों की थाली का अहम हिस्सा होती है। खाना पकाते समय कई बार अंदाज चूक जाता है और दाल में नमक जरूरत से ज्यादा गिर जाता है। नमक तेज होते ही दाल का पूरा स्वाद खराब लगने लगता है और मेहनत बेकार जाने का डर सताने लगता है। अच्छी बात यह है कि अधिक नमक वाली दाल को फेंकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती है। रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजों का इस्तेमाल करके और समझदारी भरे उपाय अपनाकर दाल के स्वाद को वापस सामान्य और संतुलित बनाया जा सकता है।
उबले आलू की मदद से सोखें अतिरिक्त खारापन
अगर तैयार अरहर दाल में नमक का स्तर बढ़ गया है, तो उबले आलू का इस्तेमाल सबसे असरदार साबित होता है। इसके लिए एक या दो उबले हुए आलू लेकर उन्हें दाल के अंदर डाल दें। आलू में यह खूबी होती है कि वह अतिरिक्त नमक को काफी हद तक अपने भीतर सोख लेता है। दाल में आलू डालने के बाद उसे करीब 10 से 15 मिनट तक पड़ा रहने दें। इसके बाद आपके पास दो विकल्प होते हैं, या तो आप उन आलुओं को बाहर निकाल लें या फिर उन्हें दाल में ही अच्छी तरह मैश कर दें। ऐसा करने से न केवल नमक कम होगा, बल्कि दाल का गाढ़ापन और स्वाद भी बढ़ जाएगा।
बिना नमक वाली सादी दाल तैयार कर मिलाएं
नमक की मात्रा को सही अनुपात में लाने का सबसे पक्का तरीका यह है कि थोड़ी सी अरहर दाल अलग बर्तन में बिना नमक डाले पका लें। जब यह सादी दाल पककर तैयार हो जाए, तो इसे अधिक नमक वाली दाल में धीरे-धीरे मिला दें। इससे दाल की कुल मात्रा बढ़ जाएगी और नमक का अनुपात पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। इस तरीके से दाल का मूल स्वाद भी बना रहता है और किसी तरह का बदलाव महसूस नहीं होता।
गर्म पानी मिलाकर कुछ देर धीमी आंच पर पकाएं
यदि दाल में नमक बहुत ज्यादा नहीं हुआ है और केवल थोड़ा सा तेज लग रहा है, तो गर्म पानी का प्रयोग किया जा सकता है। थोड़ी मात्रा में खौलता हुआ पानी दाल में डालें और फिर बर्तन को गैस पर रखकर 5 से 10 मिनट तक अच्छी तरह उबाल लें। ऐसा करने से नमक का तीखापन कम पड़ जाता है। हालांकि पानी डालते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा पानी न पड़े, वरना दाल पतली होकर बेस्वाद हो सकती है।
आटे की लोई का आजमाया हुआ पारंपरिक नुस्खा
भारतीय रसोई में पीढ़ियों से एक देसी नुस्खा खूब आजमाया जाता रहा है। इसके तहत गेहूं के गुंथे हुए आटे की एक छोटी सी लोई बनाकर सीधे पकती हुई दाल में डाल दी जाती है। इस लोई को दाल के साथ करीब 10 मिनट तक पकने दें। आटा अपने संपर्क में आने वाले फालतू नमक को पूरी तरह सोख लेता है। जब काम पूरा हो जाए, तो उस लोई को चमचे से बाहर निकालकर अलग कर दें। इससे दाल का अतिरिक्त खारापन खत्म हो जाता है।
टमाटर की प्यूरी, नींबू का रस और उबली सब्जियां
दाल के स्वाद को संतुलित करने के लिए खटास का सहारा भी लिया जा सकता है। दाल में थोड़ी सी टमाटर की प्यूरी या नींबू का रस मिलाने से खारेपन का अहसास कम हो जाता है। यह उपाय भले ही नमक की वास्तविक मात्रा को कम न करे, लेकिन उसके तीखे स्वाद को दबाकर दाल को खाने लायक बना देता है। इसके अलावा दाल में पहले से उबली हुई लौकी, गाजर, कद्दू या अन्य सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं। ये पौष्टिक सब्जियां नमक को बांट लेती हैं और दाल को और ज्यादा पौष्टिक बना देती हैं।
नमक डालते समय रखें ये जरूरी सावधानियां
भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए खाना बनाते समय कुछ साधारण नियमों का पालन करना चाहिए। नमक हमेशा एक साथ डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके डालें। दाल में तड़का लगाने के बाद ही उसका नमक चखकर देखना सबसे सही रहता है। यदि दाल प्रेशर कुकर में बनाई जा रही है, तो शुरुआत में हमेशा कम नमक डालें, क्योंकि सीटी लगने के बाद पानी सूखने पर खारापन बढ़ सकता है। इसके अलावा, टेबल सॉल्ट का उपयोग करते वक्त भी खास सावधानी बरतनी चाहिए ताकि ऊपर से ज्यादा नमक न गिर जाए।



















