नाश्ते की मेज पर जब मक्खन की परत से ढका गरमा-गरम आलू पराठा सामने आता है, तो खाने का जायका दोगुना हो जाता है। साथ में गाढ़ी दही, तीखा अचार या पुदीने की चटनी मिल जाए तो स्वाद और भी बढ़ जाता है। हालांकि, कई बार रसोई में पराठा बनाते वक्त एक परेशानी सामने आती है कि वह तवे से उतरते ही सौगी यानी पिलपिला हो जाता है। कई लोगों की शिकायत रहती है कि बेलन चलाते ही आलू की भरावन बाहर छलकने लगती है या फिर आटा इतना ढीला हो जाता है कि पराठे का आकार बिगड़ जाता है। बेहतरीन स्वाद मिलने के बाद भी वह मनचाहा क्रिस्पीपन नहीं आ पाता, जो ढाबे या बाजार के पराठों में देखने को मिलता है। इस कमी को दूर करने के लिए किसी अलग सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि तैयारी के कुछ बुनियादी चरणों पर ध्यान देना जरूरी है।
आटे की सही बनावट और आराम देने का समय
एक लाजवाब और कुरकुरे पराठे की बुनियाद हमेशा उसके आटे से तय होती है। इसके लिए 2 कप गेहूं का आटा लें और उसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। पानी का इस्तेमाल करते हुए मध्यम कसाव वाला नरम आटा तैयार करें। यदि आटा अत्यधिक गीला या पिलपिला गूंथा जाएगा, तो बेलते समय लोई संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा और पकने के बाद भी उसकी बाहरी परत कभी कुरकुरी नहीं बनेगी।
आटा तैयार करने के तुरंत बाद कभी भी पराठा नहीं बेलना चाहिए। गूंधने के बाद उसे किसी साफ कपड़े या बर्तन से ढककर कम से कम 15 से 20 मिनट का विश्राम देना अनिवार्य है। इस ठहराव के दौरान आटे का खिंचाव संतुलित हो जाता है, जिससे लोई बेलना काफी सुविधाजनक बन जाता है। साथ ही लोई का आकार भी संतुलित होना चाहिए। लोई न तो बहुत छोटी हो और न ही बहुत भारी, ताकि अंदर आलू का मसाला एक समान तरीके से फैल सके।
मसालेदार भरावन को पूरी तरह सूखा और महीन रखना
पराठे के फटने और गीलेपन से बचने के लिए आलू की स्टफिंग का सूखा होना प्राथमिक शर्त है। इसके लिए 4 से 5 उबले हुए आलू लें और उन्हें बिना कोई गांठ छोड़े अच्छी तरह मसल लें। अगर आलू में कोई बड़ा टुकड़ा बाकी रह गया, तो बेलन का दबाव पड़ते ही वह ऊपरी परत को चीरकर बाहर आ जाएगा।
मैश किए हुए आलू में बारीक कटी हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक और ताजा कटा हरा धनिया मिलाएं। इसके साथ ही स्वाद के अनुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, भुना हुआ जीरा पाउडर, खटास के लिए अमचूर पाउडर और थोड़ा सा गरम मसाला डालकर सब कुछ अच्छी तरह मिला लें। मसाले मिलाने के बाद आलू के मिश्रण की नमी को जरूर जांचें। यदि आलू में हल्का गीलापन लग रहा हो, तो मिश्रण को कुछ देर पंखे की हवा में खुला छोड़ दें ताकि अतिरिक्त नमी सूख जाए।
पानी और अतिरिक्त तेल से क्यों बचना है जरूरी
आलू की भरावन में पानी का बिल्कुल प्रयोग न करें और न ही उसमें अतिरिक्त तेल डालें। स्टफिंग जितनी सूखी और बंधी हुई होगी, पराठा बेलने में उतनी ही सुगमता रहेगी। गीला या तैलीय मिश्रण बेलन के दबाव से बाहर आ जाता है, जिससे न केवल पराठा किनारों से फट जाता है बल्कि तवे पर डालते ही चिपकने भी लगता है।
धीमी गति से बेलने और बंद करने का सही तरीका
आटे की लोई को पहले थोड़ा सा चपटा करके बेल लें और उसके मध्य भाग में तैयार की गई आलू की भरावन रखें। इसके बाद चारों कोनों को ऊपर उठाकर आपस में मिलाते हुए पूरी तरह सील कर दें। हथेली से हल्का सा दबाने के बाद सूखा आटा छिड़कें और बेलन से हल्के हाथों से चारों तरफ एक समान बेलें।
पराठे को बहुत अधिक पतला बेलने का प्रयास बिल्कुल न करें। अत्यधिक पतला पराठा आसानी से फट जाता है और सिकने के बाद उसका वह पारंपरिक खस्ता टेक्सचर नहीं मिल पाता जो मोटे और बढ़िया सिकाई वाले पराठे में होता है। यदि बेलते समय कहीं से भरावन बाहर दिखने लगे, तो वहां अतिरिक्त दबाव बनाने की जगह पराठे को किनारों से धीरे-धीरे घुमाते हुए आगे बढ़ाएं।
तवे का सही तापमान और संतुलित आंच पर सिकाई
पराठे की कुरकुरी परत हासिल करने में तवे का तापमान सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। पराठा डालने से पहले तवे को अच्छी तरह गर्म कर लेना चाहिए। यदि तवा ठंडा या गुनगुना होगा, तो पराठा कड़ा हो जाएगा और उसे सिकने में अनावश्यक समय लगेगा। इसके विपरीत, यदि तवा जरूरत से ज्यादा धुआंधार गर्म होगा, तो बाहर की परत तुरंत काली पड़ जाएगी जबकि अंदर का आटा कच्चा रह जाएगा।
मध्यम गर्म तवे पर पराठा डालें और जब ऊपर की सतह पर छोटे-छोटे उभार या बुलबुले दिखने लगें, तब उसे पलटें। अब दूसरी तरफ थोड़ा सा घी या तेल लगाएं। इसके बाद दोबारा पलटकर पहली सतह पर भी घी या तेल लगाएं। पराठे को हमेशा मध्यम आंच पर सेंकें। कलछी की सहायता से किनारों और बीच के हिस्से को धीरे-धीरे दबाते रहें ताकि गर्मी अंदर तक पहुंचे। जब दोनों तरफ सुनहरे चकत्ते उभर आएं और सतह पूरी तरह कुरकुरी हो जाए, तब इसे उतारें। ध्यान रहे कि बहुत ज्यादा तेल या घी उड़ेलने से पराठा क्रिस्पी नहीं बनता, बल्कि सीमित मात्रा में लगाया गया घी ही उसे सही बनावट देता है।
परोसने की सही विधि
जैसे ही पराठा तवे से उतरे, उस पर तुरंत मक्खन की एक डली रखें और गर्मागर्म ही थाली में सजाएं। ठंडी दही, आम का पारंपरिक अचार या हरी तीखी चटनी इसके स्वाद को मुकम्मल बना देती है। यदि पूरे परिवार के लिए नाश्ता परोसा जा रहा है, तो कभी भी पराठों को बनाकर खुले में न छोड़ें। तवे से उतरते ही गरमा-गरम खाने पर ही उसकी कुरकुरी बनावट का असली आनंद मिलता है।



















