गोलगप्पे या पानीपुरी का नाम जेहन में आते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। ठेले या बाज़ार में मिलने वाले तीखे और चटपटे गोलगप्पों का ज़ायका हर दिल अज़ीज़ होता है, मगर घर पर शुद्ध तरीके से तैयार की गई पानीपुरी का अनुभव पूरी तरह अनोखा होता है। अधिकतर लोगों को लगता है कि घर पर गोलगप्पे की पूरी बेलना, उसे सही तरीके से फुलाना और उसमें करारापन बरकरार रखना बेहद पेचीदा काम है। कई बार पूरियां तलते समय फूलती नहीं हैं या फिर तेल से बाहर निकालते ही पपड़ी की तरह नरम पड़ जाती हैं। इस गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह आटे का सही चयन न होना और गूंधने की तकनीक में खामी होना है।
बाज़ार में मिलने वाले गोलगप्पे मुख्य रूप से गेहूं के आटे, मैदा अथवा सूजी से तैयार किए जाते हैं। इन तीनों अनाजों से बनने वाली पूरियों का स्वाद, रंग और कुरकुरापन एक-दूसरे से काफी भिन्न होता है। अगर आप भी रसोई में हलवाई जैसे फूले और करारे गोलगप्पे बनाना चाहते हैं, तो इन तीनों सामग्रियों से पूरियां तैयार करने की विस्तृत विधि और सावधानियों को समझना बेहद मददगार साबित होगा।
देसी स्वाद से भरपूर गेहूं के आटे की पानीपुरी
गेहूं के आटे से तैयार की जाने वाली पानीपुरी पारंपरिक और सौंधे देसी स्वाद से भरपूर मानी जाती है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का सामान्य आटा, स्वादानुसार थोड़ा सा नमक और सामान्य पानी की आवश्यकता होती है। कुछ लोग चाहें तो आटे में बिल्कुल एक चुटकी बेकिंग सोडा मिला सकते हैं, हालांकि बेहतरीन नतीजे पाने के लिए सोडा डालना बिल्कुल अनिवार्य नहीं है।
इसकी तैयारी के लिए सबसे पहले एक गहरे परात या बर्तन में गेहूं का आटा निकालें और उसमें थोड़ा सा नमक डालकर हाथों से अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें एक साथ ज्यादा पानी डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंधना शुरू करें। पानीपुरी के लिए गीला या बहुत ज्यादा नरम आटा बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं होता, क्योंकि ऐसा आटा पूरियों का खस्तापन खत्म कर देता है। जब आटा बंध जाए तो उसे हथेलियों के पिछले हिस्से से अच्छी तरह मसलकर चिकना कर लें। इसके बाद आटे को किसी हल्के नम कपड़े या ढक्कन से ढककर लगभग 15 से 20 मिनट के लिए सेट होने के लिए छोड़ दें।
आटे को आराम देने के बाद उसकी छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें। इन लोइयों को बेलते समय ध्यान रखें कि पूरी हर तरफ से एक समान पतली हो और किनारे मोटे न रहें। कड़ाही में तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तब पूरी को तेल में छोड़ें और कलछी या झारे से हल्के हाथ से दबाएं। तेल का तापमान सही होने पर पूरी तुरंत गुब्बारे जैसी फूल जाएगी। दोनों तरफ से हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेकें और फिर तेल निथारते हुए बाहर निकाल लें।
हल्की और बेहद कुरकुरी मैदा वाली पूरियां
मैदा से तैयार पानीपुरी दिखने में काफी साफ, हल्की और खाने में बहुत ज्यादा करारी बनती है। इसे बनाने के लिए मैदा में थोड़ा सा नमक मिलाएं और पानी की सहायता से सख्त आटा गूंथ लें। मैदा को गूंथते समय उसे अच्छी तरह मसलना जरूरी होता है ताकि उसमें लोच आ सके और पूरी का टेक्सचर पूरी तरह एकसार बने।
गूंधे हुए मैदा को ढककर कुछ देर के लिए रख देना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह ढल जाए। इसके बाद आप छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें एकदम पतला बेल सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपकी सभी पूरियां बिल्कुल एक समान आकार और गोलाई में बनें, तो एक बड़ी पतली रोटी बेल लें और किसी छोटे गोल ढक्कन या कुकी कटर से गोल-गोल पूरियां काट लें। इससे न सिर्फ समय बचता है बल्कि सारी पूरियों का आकार भी एक जैसा रहता है।
तलने के लिए कड़ाही का तेल अच्छी तरह गर्म होना चाहिए। एक-एक पूरी तेल में डालें और कलछी की मदद से उसे हल्का सा दबाएं। इस दबाव से भाप अंदर बनती है और पूरी फौरन फूल जाती है। जब पूरी का रंग हल्का बादामी या सुनहरा हो जाए, तो उसे तेल से बाहर निकाल लें। अगर तलते वक्त तेल ठंडा होगा तो पूरी बहुत ज्यादा तेल पी लेगी, जबकि जरूरत से ज्यादा खौलते तेल में पूरी बाहर से तुरंत काली या भूरी हो जाएगी और अंदर से कच्ची रह जाएगी।
दानेदार सूजी से बनाएं परफेक्ट खस्ता गोलगप्पे
सूजी से बनी पानीपुरी अपने बेजोड़ और लंबे समय तक टिकने वाले कुरकुरेपन के लिए जानी जाती है। सूजी के गोलगप्पे बनाने के लिए हमेशा बारीक दाने वाली सूजी का चुनाव करना सबसे बेहतर माना जाता है। सही बाइंडिंग देने के लिए सूजी में थोड़ा सा मैदा और नमक मिलाया जाता है।
एक बर्तन में बारीक सूजी, थोड़ा मैदा और नमक डालकर आपस में मिला लें। अब गुनगुने या सामान्य पानी के हल्के छींटे देते हुए सख्त आटा गूंथें। चूंकि सूजी पानी को काफी मात्रा में सोखती है, इसलिए आटा गूंथने के बाद उसे 15 से 20 मिनट का विश्राम देना अनिवार्य है। इस दौरान सूजी पानी सोखकर फूल जाएगी। तय समय के बाद आटे को दोबारा दोनों हाथों से अच्छी तरह मसलें ताकि वह पूरी तरह एकसार हो जाए।
अब इस आटे को पतला बेलकर छोटी गोल पूरियां काट लें। कड़ाही में तेज गर्म तेल में इन पूरियों को डालें और कलछी से हल्का दबाव बनाते हुए तलें। जैसे ही पूरी पूरी तरह फूल जाए, उसे तुरंत पलट दें ताकि दोनों सतहें बराबर सिक सकें। अच्छी तरह सुनहरी और कुरकुरी हो जाने के बाद पूरियों को किसी छलनीदार बर्तन या जाली वाली प्लेट में निकालें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए और भाप से वे नरम न पड़ें।
कुरकुरी और फूली पूरियों के लिए जरूरी सावधानियां
घर में हलवाई जैसी पानीपुरी तैयार करना केवल सही सामग्री जुटाने का खेल नहीं है, बल्कि बेलने और तलने की छोटी-छोटी बारीकियों पर निर्भर करता है। आटा न तो बहुत नरम होना चाहिए और न ही इतना सूखा कि बेलते वक्त फटने लगे। इसके अलावा पूरियों को बेलते समय उनकी मोटाई पर खास ध्यान दें। अगर पूरी बीच से पतली और किनारों से मोटी रह जाएगी, तो तेल में जाने पर वह एक जैसी नहीं फूलेगी और कुछ ही देर में चपटी पपड़ी बन जाएगी।
पूरियों को बेलने के बाद कभी भी खुले में लंबे समय तक हवा लगने के लिए न छोड़ें, क्योंकि ऐसा करने से उनकी ऊपरी परत सूख जाती है और वे तेल में फूलने से महरूम रह जाती हैं। इसके साथ ही तेल के तापमान का सटीक नियंत्रण सबसे जरूरी पहलू है। हमेशा पहली पूरी डालकर तेल की गर्माहट की परख करें। यदि पूरी तेल में बैठ जाती है तो आंच बढ़ाएं और अगर डालते ही जलने लगे तो तापमान थोड़ा धीमा करें।



















