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जमशेदपुर की राधिका का कमाल, खाने की चीजों जैसी दिखने वाली मोमबत्तियां देख खा जाएंगे धोखाजीवनशैली
24 अग॰ 2026, 11:05 am (19 दिन पहले)· 4

जमशेदपुर की राधिका का कमाल, खाने की चीजों जैसी दिखने वाली मोमबत्तियां देख खा जाएंगे धोखा

झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली राधिका ने 'हाउस ऑफ कैंडल' की शुरुआत की है, जहां वे मोदक, लड्डू, पारले-जी बिस्किट और कोल्ड कॉफी जैसी खाने की चीजों के हूबहू रूप वाली अनोखी मोमबत्तियां तैयार करती हैं।

झारखंड के जमशेदपुर शहर में अपनी हुनरमंद कला से लोगों का ध्यान खींचने वाली राधिका इन दिनों खासी चर्चा में हैं। वे ऐसी मोमबत्तियां तैयार कर रही हैं जिन्हें पहली नजर में देखकर किसी के लिए भी यह पहचानना मुमकिन नहीं रहता कि सामने रखी चीज असली खाद्य पदार्थ है या हाथ से गढ़ी गई सजावटी मोमबत्ती। उन्होंने अपने इस स्टार्टअप को 'हाउस ऑफ कैंडल' का नाम दिया है, जिसके जरिए वे मोमबत्ती बनाने की कला में एक बिल्कुल नया आयाम जोड़ रही हैं। उनकी इस अनूठी कारीगरी के पीछे की खासियत इसकी बारीक डिटेलिंग और जीवंत रूप है।

पारंपरिक मिठाइयों से लेकर फास्ट फूड तक का रूप

हाउस ऑफ कैंडल के जरिए तैयार होने वाली इन कैंडल की सबसे बड़ी यूएसपी इनका डिजाइन और रंग-रूप है। राधिका विभिन्न प्रकार के व्यंजनों और स्वादों से प्रेरणा लेकर इन कृतियों को मूर्त रूप देती हैं। इनमें देश की पारंपरिक मिठाइयां जैसे लड्डू और मोदक से लेकर रोजमर्रा के लोकप्रिय उत्पाद जैसे पारले-जी बिस्किट, आइसक्रीम और कोल्ड कॉफी तक शामिल हैं। इन मोमबत्तियों के सांचे, रंग और हर एक छोटी बारीकी को इस नफासत से उकेरा जाता है कि देखने वाला एक पल के लिए भ्रमित हो जाए कि वह किसी खाने की चीज को देख रहा है या मोम से बनी सजावट की वस्तु को।

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रचनात्मकता और होम डेकोर का नया ट्रेंड

इस अनूठे काम को शुरू करने के पीछे राधिका का विजन बिल्कुल स्पष्ट है। उनका मानना है कि अब मोमबत्तियां केवल अंधेरे में रोशनी करने का जरिया भर नहीं रह गई हैं, बल्कि आधुनिक समय में इनका इस्तेमाल घरों की भव्य सजावट, अपनों को उपहार देने और किसी भी खास अवसर या उत्सव को यादगार बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लीक से हटकर कुछ नया करने का बीड़ा उठाया। उनकी यह परिकल्पना उन ग्राहकों को बहुत भा रही है जो अपने घर के इंटीरियर में या खास मौकों पर कुछ लीक से हटकर और अनोखा प्रयोग करना पसंद करते हैं।

जमशेदपुर के स्टॉल पर उमड़ी लोगों की भीड़

अपनी इस कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए राधिका ने हाल ही में जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में स्थित चैंबर भवन में 'हाउस ऑफ कैंडल' का एक विशेष स्टॉल लगाया था। इस प्रदर्शनी में शहरवासियों को उनकी इन खूबसूरत रचनाओं को नजदीक से देखने और खरीदने का बेहतरीन मौका मिला। इस स्टॉल पर आने वाले हर शख्स के लिए लड्डू, मोदक, पारले-जी और कोल्ड कॉफी की शक्ल वाली मोमबत्तियां मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इन कैंडल की शानदार फिनिशिंग और असली खाने जैसा दिखने वाला उनका अंदाज ऐसा था कि लोग अपने मोबाइलों में उनकी तस्वीरें खींचते नजर आए।

सोशल मीडिया के जरिए बढ़ रहा दायरा

आज के डिजिटल दौर में राधिका का यह स्टार्टअप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी कला प्रेमियों तक पहुंच रहा है, जहां लोग इन उत्पादों को देख भी सकते हैं और खरीद भी सकते हैं। राधिका का यह छोटा मगर बेहद सृजनात्मक व्यवसाय इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि अगर किसी व्यक्ति के पास पक्का हुनर और कुछ अलग कर दिखाने का जज्बा हो, तो मोम जैसी साधारण सी चीज से भी असाधारण और खूबसूरत कलाकृतियां गढ़ी जा सकती हैं। जमशेदपुर में तैयार हो रही ये मोमबत्तियां आज केवल सजावट का सामान नहीं, बल्कि अनूठी रचनात्मकता का जीवंत प्रतीक बन चुकी हैं।

सवाल-जवाब

हाउस ऑफ कैंडल की शुरुआत किसने की है?
हाउस ऑफ कैंडल की शुरुआत झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली राधिका ने की है।
इन मोमबत्तियों की मुख्य विशेषता क्या है?
ये मोमबत्तियां मोदक, लड्डू, पारले-जी बिस्किट और कोल्ड कॉफी जैसी खाने की चीजों की तरह हूबहू डिजाइन की जाती हैं।
राधिका का स्टॉल जमशेदपुर में कहां लगाया गया था?
उनका स्टॉल जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित चैंबर भवन में लगाया गया था।
इन मोमबत्तियों को कैसे खरीदा जा सकता है?
हाउस ऑफ कैंडल के उत्पादों को प्रदर्शनियों के अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी देखा और खरीदा जा सकता है।
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