राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के सांगानेर उपनगर में स्थित रावला चौक में उस समय अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब एक रिहायशी मकान में सांप होने की खबर सामने आई। इस घटना की जानकारी मिलते ही वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के सदस्य कुलदीप सिंह राणावत बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि घर के एक कमरे में रखे सोफे के नीचे सांप छिपा हुआ था।
रेस्क्यू टीम ने जब सोफे के नीचे सावधानी से जांच की, तो वे दंग रह गए। वहां सामान्य सांप के बजाय बेहद दुर्लभ सफेद रंग का कोबरा का बच्चा मौजूद था। कुलदीप सिंह राणावत ने अपनी सूझबूझ और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए इस जहरीले सांप को सुरक्षित रूप से काबू में किया और उसे वहां से बाहर निकाला।
सफेद कोबरा के पीछे का वैज्ञानिक कारण
इस अनोखे सांप के बारे में जानकारी देते हुए कुलदीप सिंह राणावत ने बताया कि आमतौर पर कोबरा काले या गहरे भूरे रंग के होते हैं। हालांकि, आनुवंशिक बदलावों (जेनेटिक म्यूटेशन) की वजह से कुछ सांपों के शरीर में मेलेनिन पिगमेंट का निर्माण नहीं हो पाता है, जिससे उनका रंग पूरी तरह सफेद दिखाई देने लगता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह सांप पूरी तरह से एल्बिनो नहीं है। सामान्य तौर पर पूर्ण एल्बिनो सांपों की आंखें लाल रंग की होती हैं, जबकि इस सांप की आंखें पूरी तरह से काली थीं।
उन्होंने आगे बताया कि ऐसे सफेद सांपों का प्राकृतिक परिवेश में जीवित रहना काफी मुश्किल होता है। चमकदार सफेद रंग होने की वजह से ये खुद को घास या मिट्टी में छिपा नहीं पाते हैं। इस कारण शत्रुओं से खुद को बचाना और शिकार करना इनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे वन्य जीवन में इनके जिंदा रहने की दर काफी कम हो जाती है.
धार्मिक महत्व और वन्यजीव संरक्षण की अपील
भारत में सांपों को लेकर लोगों के मन में गहरी धार्मिक आस्था है। विशेष रूप से कोबरा को भगवान शिव के प्रतीक के रूप में देखा और पूजा जाता है। रेस्क्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इस दुर्लभ सफेद कोबरा को आबादी वाले क्षेत्र से दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया ताकि वह सुरक्षित रह सके।
इस सफल अभियान के बाद कुलदीप सिंह राणावत ने स्थानीय लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि यदि रिहायशी इलाकों में कोई भी जंगली जीव या सांप दिखाई दे, तो लोग उसे खुद पकड़ने या मारने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या भीलवाड़ा के वन्यजीव रक्षक दल को सूचित करें, ताकि वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके और किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।



















