जयपुर का 'सॉलिड स्टोन' घर: बिना AC के भी अंदर का तापमान 5-7 डिग्री कम, जानिए पत्थर की इस इंजीनियरिंग का राजजीवनशैली
3 घंटे पहले· 1

जयपुर का 'सॉलिड स्टोन' घर: बिना AC के भी अंदर का तापमान 5-7 डिग्री कम, जानिए पत्थर की इस इंजीनियरिंग का राज

जयपुर के हनुमान नगर में बना 'द हाउस ऑफ सॉलिड स्टोन' बिना किसी आधुनिक कूलिंग सिस्टम के अंदर का तापमान बाहर से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक कम रखता है, और इसका पूरा राज पारंपरिक पत्थर निर्माण तकनीक में छिपा है।

राजस्थान में जब पारा चढ़ता है तो ज्यादातर लोग AC, कूलर और तरह-तरह की आधुनिक तकनीकों की ओर भागते हैं। लेकिन जयपुर के हनुमान नगर में एक ऐसा घर खड़ा है, जो गर्मी से लड़ने का बिल्कुल अलग रास्ता दिखाता है। इस घर का नाम है द हाउस ऑफ सॉलिड स्टोन, और इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसी कृत्रिम कूलिंग सिस्टम के बिना भी इसके अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक कम बना रहता है। यानी जब बाहर भीषण तपिश हो, तब भी घर के भीतर राहत की ठंडक महसूस होती है।

पत्थर सिर्फ सजावट नहीं, पूरा ढांचा

करीब 4700 वर्ग फीट में फैले इस घर की असली कहानी इसके पत्थरों में है। आमतौर पर घरों में पत्थर का इस्तेमाल दीवारों या फर्श को सुंदर दिखाने भर के लिए होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। घर के मालिक वीर विजय सिंह बताते हैं कि यहां दीवारों से लेकर छत, सीढ़ियां, बेसमेंट और रिटेनिंग वॉल तक — हर हिस्से के निर्माण में पत्थर ही इस्तेमाल हुआ है। पूरा ढांचा ही पत्थर पर टिका है, और यही इसे आम घरों से अलग बनाता है।

हॉलो इंटरलॉकिंग वॉल: गर्मी रोकने वाली असली तरकीब

घर को ठंडा रखने का असली राज इसकी दीवारों की बनावट में छिपा है। निर्माण के दौरान एक खास हॉलो इंटरलॉकिंग स्टोन वॉल प्रणाली तैयार की गई। इस तकनीक में दो दीवारों के बीच जानबूझकर खाली जगह छोड़ी जाती है, और यही खाली जगह बाहर की गर्मी को अंदर तक पहुंचने से रोकने का काम करती है। दिलचस्प बात यह है कि इसी कैविटी का इस्तेमाल बिजली, पानी और दूसरी सर्विस लाइनों को छिपाकर ले जाने में भी किया गया। इस दोहरे फायदे से पत्थर की खपत भी लगभग 30 प्रतिशत तक घट गई। पूरा डिज़ाइन जयपुर की गर्म जलवायु को सामने रखकर सोचा-समझा गया है।

जोधपुर का हार्ड सैंडस्टोन और साइट का पत्थर

वीर विजय सिंह के अनुसार, घर के सुपर स्ट्रक्चर यानी ऊपरी ढांचे के लिए जोधपुर का हार्ड सैंडस्टोन चुना गया, जो मजबूती के लिए जाना जाता है। वहीं नींव और सब-स्ट्रक्चर में बाहर से पत्थर मंगाने के बजाय उसी साइट से निकले पत्थरों को दोबारा काम में लाया गया, जिससे संसाधनों की बचत हुई। पूरे घर को एक संकरे आंगन के चारों ओर बसाया गया है। यह आंगन हवा के लगातार आने-जाने का रास्ता बनाए रखता है, जिससे भीतर ताजी हवा घूमती रहती है और कृत्रिम कूलिंग की जरूरत और कम हो जाती है।

मशीन नहीं, पारंपरिक स्प्लिटिंग तकनीक

इस प्रोजेक्ट की एक और खास बात यह है कि इसमें पत्थरों को तराशने के लिए आधुनिक मशीनों का सहारा नहीं लिया गया। इसकी जगह पारंपरिक स्प्लिटिंग तकनीक अपनाई गई, जिसमें स्थानीय कारीगरों ने पुराने औजारों से ही पत्थरों को आकार दिया। इससे एक तरफ बिजली की बड़ी बचत हुई और दूसरी तरफ पूरा निर्माण कहीं ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बन गया। वीर विजय सिंह का कहना है कि अगर घरों में स्थानीय पत्थर, जालीदार खिड़कियां, गहरे छज्जे और बेहतर वेंटिलेशन जैसी पारंपरिक तकनीकों को फिर से अपनाया जाए, तो गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है — और वह भी बिजली का भारी बिल चुकाए बिना।

ट्रेंडकिया रिवॉर्ड्स

खबरें पढ़ें, असली रिवॉर्ड कमाएँ

हर लेख पढ़ने पर पॉइंट्स — ₹10,000 तक के गिफ्ट रिडीम करें। शामिल होना फ्री है।

फ्री रजिस्टर करें और कमाना शुरू करें
250मोबाइल रिचार्ज
12,500 · ≈ 12,500 रीड्स
कमाना शुरू करें
500गिफ्ट वाउचर
25,000 · ≈ 25,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
1,000गिफ्ट कार्ड
50,000 · ≈ 50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
2,000गिफ्ट कार्ड
1,00,000 · ≈ 1,00,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
3,000शॉपिंग वाउचर
1,50,000 · ≈ 1,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
5,000कैश / UPI
2,50,000 · ≈ 2,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम7,500कैश / UPI
3,75,000 · ≈ 3,75,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम10,000कैश / UPI
5,00,000 · ≈ 5,00,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम15,000मेगा कैश
7,50,000 · ≈ 7,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
नागरिक पत्रकारनागरिक पत्रकार
नागरिक पत्रकार
नागरिक पत्रकार