गर्मियों और रोजमर्रा के खानपान में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और पेट को ठंडक पहुंचाने के लिए खीरे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। भोजन के साथ परोसे जाने वाले सलाद में खीरा सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन अगर एक भी खीरा कड़वा निकल जाए तो पूरी थाली का स्वाद खराब हो जाता है। कड़वा खीरा केवल जीभ का स्वाद ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने से पेट में मरोड़, भारीपन, उल्टी जैसा महसूस होना और अपच जैसी पाचन संबंधी दिक्कतें भी खड़ी हो सकती हैं। यही वजह है कि बाजार से खीरा खरीदते वक्त कुछ बुनियादी बातों की परख करना बेहद जरूरी हो जाता है।
खीरे में कड़वाहट पैदा होने का वैज्ञानिक कारण
खीरे के कड़वे स्वाद के पीछे एक कुदरती रासायनिक यौगिक जिम्मेदार होता है जिसे कुकुर्बिटासिन कहा जाता है। यह तत्व सामान्य रूप से खीरे के पौधे में मौजूद रहता है, लेकिन जब फसल को बहुत ज्यादा तापमान, भीषण गर्मी, पानी की कमी या प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तो पौधे में तनाव बढ़ जाता है। इस पर्यावरणीय तनाव की वजह से पौधे के भीतर कुकुर्बिटासिन की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर फल के स्वाद पर पड़ता है और खीरा अत्यधिक कड़वा हो जाता है।
रंग और बनावट से करें सही गुणवत्ता की पहचान
सब्जी मंडी या दुकान पर खीरा चुनते समय सबसे पहले उसकी रंगत पर नजर डालनी चाहिए। पूरी तरह ताजा और खाने लायक खीरा अमूमन एक समान हल्के या गहरे हरे रंग में नजर आता है। अगर किसी खीरे की ऊपरी परत पर पीले रंग के चकत्ते या असामान्य दाग-धब्बे दिखें, तो इसका मतलब है कि वह या तो जरूरत से ज्यादा पक चुका है या फिर काफी पुराना हो चुका है। ऐसे पीले पड़े खीरों में कड़वाहट होने का अंदेशा सबसे अधिक रहता है, इसलिए इन्हें खरीदने से बचना चाहिए।
आकार और बाहरी मजबूती की सावधानीपूर्वक परख
खरीदारी करते समय हमेशा सीधे, सुडौल और मध्यम आकार वाले खीरों को तरजीह देनी चाहिए। अत्यधिक टेढ़े-मेढ़े, बीच से बहुत ज्यादा फूले हुए या असामान्य मोटाई वाले खीरे अक्सर पौधे पर सही ढंग से विकसित नहीं हो पाते हैं। असामान्य वृद्धि के कारण इनके भीतरी गूदे का स्वाद अक्सर बेस्वाद या कसैला हो जाता है। जिस खीरे की त्वचा चिकनी, बेदाग और मजबूत दिखाई दे, वह खाने में ज्यादा कुरकुरा और स्वादिष्ट साबित होता है।
फूल वाले सिरे की कड़वाहट और ताजगी की जांच
खीरे का वह छोर जहां पहले फूल लगा होता था, अक्सर कड़वाहट का मुख्य केंद्र होता है क्योंकि कुकुर्बिटासिन सबसे पहले वहीं जमा होता है। यदि विक्रेता अनुमति दे, तो उस सिरे से जरा सा टुकड़ा काटकर चखना सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके अलावा खीरे को हाथ में लेकर हल्का सा दबाकर जरूर देखें। अगर खीरा छूने में बहुत ज्यादा पिलपिला या नरम महसूस हो रहा है, तो समझ लीजिए कि वह बासी हो चुका है। अच्छी गुणवत्ता वाला ताजा खीरा छूने पर ठोस, कड़ा और कुरकुरा महसूस होता है।
वजन और कड़वाहट दूर करने का घरेलू तरीका
पानी से भरपूर होने के कारण एक ताजा खीरा अपने आकार की तुलना में हाथ में थोड़ा भारी महसूस होना चाहिए। अगर बड़ा दिखने वाला खीरा उठाने में बहुत हल्का लगे, तो यह संकेत है कि उसके अंदर का रस सूख चुका है और वह स्पंजी या बेस्वाद हो चुका है। अगर तमाम सावधानियों के बाद भी घर लाया गया खीरा कड़वा निकल जाए, तो उसके दोनों कोनों को काटकर कटे हुए टुकड़ों को आपस में गोल-गोल रगड़ें। रगड़ने से निकलने वाले सफेद झाग के साथ कुकुर्बिटासिन का असर काफी हद तक बाहर निकल जाता है। साथ ही खीरे का छिलका पूरी तरह उतार देने से भी कड़वाहट काफी हद तक खत्म हो जाती है, क्योंकि कड़वा तत्व ज्यादातर बाहरी छिलके और सिरों पर ही मौजूद होता है।



















