जीएसटी परिषद की बैठक में गिरफ्तारी नियमों में ढील और पांच करोड़ रुपये की नई सीमा पर विचार संभवकविनगर में शटर उठने से पहले लगने लगती हैं गाड़ियां, 15 पैसे से शुरू हुआ अरुण सिंघल का पान का सफरअमेरिका में सुपर इंटेलिजेंस फोर्स के गठन की घोषणा, सीधे राष्ट्रपति और व्हाइट हाउस को करेगी रिपोर्टस्टेनलेस स्टील पानी की बोतल से आ रही है दुर्गंध, सिरका और बेकिंग सोडा से यूं चमकाएं अंदरूनी कोने और ढक्कनत्योहारी सीजन से पहले काली पड़ी चांदी की चेन चमकाने के घरेलू उपायरणजी ट्रॉफी के शुरुआती दौर में महाराष्ट्र की कमान संभालेंगे पृथ्वी शॉबलिया के बेदुआ मोहल्ले में शराब के विवाद पर चाकूबाजी, गंभीर रूप से घायल युवक वाराणसी रेफरत्योहारी मांग के बीच सोने, चांदी और प्लैटिनम पर टैक्स रियायत वापस लेने की तैयारीपश्चिम बंगाल में विरोधियों पर बरसे सुवेंदु अधिकारी, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ चेतायाम्यूनिख में जयशंकर ने साफ किया भारत का रुख, 1950 के दशक से रूस के साथ साझेदारी को ऐतिहासिक अनुभवों और राष्ट्रीय हितों पर आधारित बताया
कविनगर में शटर उठने से पहले लगने लगती हैं गाड़ियां, 15 पैसे से शुरू हुआ अरुण सिंघल का पान का सफरजीवनशैली
4 अक्तू॰ 2026, 11:25 pm (23 मिनट पहले)· 0

कविनगर में शटर उठने से पहले लगने लगती हैं गाड़ियां, 15 पैसे से शुरू हुआ अरुण सिंघल का पान का सफर

गाजियाबाद के कविनगर में 1980 में सड़क किनारे 15 पैसे में पान बेचने से शुरू हुई दुकान आज शहर की जानी-मानी पहचान बन चुकी है, जहां 25 रुपये से लेकर 180 रुपये तक के पान बिकते हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में पान के दीवानों के बीच कविनगर का एक ठिकाना दशकों से बेहद खास बना हुआ है। यहां सुबह दुकान का शटर उठने से पहले ही सड़क पर लग्जरी गाड़ियों की कतारें लग जाती हैं। कारों में बैठे लोग सब्र के साथ दुकान खुलने की राह देखते हैं और अपनी पसंद का खास बीड़ा लगवाकर ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। चार दशकों से भी ज्यादा समय से यह स्थान सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि शहर की सुबह की दिनचर्या का अहम पड़ाव बन चुका है।

सड़क किनारे 15 पैसे के पान से हुई थी शुरुआत

इस प्रतिष्ठित दुकान की नींव साल 1980 में रखी गई थी। दुकान के संचालक अरुण सिंघल ने अपने काम का आगाज किसी आलीशान शोरूम या बड़ी दुकान से नहीं, बल्कि फुटपाथ पर बैठकर किया था। उस दौर में वह महज 15 पैसे में एक पान बनाकर बेचते थे। उस शुरुआती दौर में शायद ही किसी ने यह कल्पना की होगी कि सड़क की पटरी पर रखा वह छोटा सा संदूक एक दिन पूरे गाजियाबाद में शोहरत की मिसाल बन जाएगा। वक्त के साथ अरुण सिंघल के हाथों का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ता गया और ग्राहकों का कारवां लगातार बड़ा होता चला गया।

ये भी पढ़ें

कारोबारियों से लेकर नौकरीपेशा लोगों का रोज का ठिकाना

आज 46 साल बीत जाने के बाद भी यहां आने वाले ग्राहकों का लगाव जस का तस बना हुआ है। शहर के जाने-माने व्यापारी, दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोग और समाज के कई प्रतिष्ठित नागरिक यहां रोजाना नियमित तौर पर हाजिरी लगाते हैं। कई नियमित ग्राहक ऐसे हैं जो अपने दफ्तर या व्यापारिक प्रतिष्ठान की शुरुआत करने से पहले यहां आकर पान का स्वाद लेना अपनी दैनिक आदत मानते हैं। वहीं कुछ शौकीन हफ्ते के तय दिनों पर विशेष रूप से यहां पहुंचते हैं। ग्राहकों का कहना है कि उन्हें यहां सिर्फ पान का लजीज स्वाद ही नहीं खींचता, बल्कि चार दशकों के लंबे सफर में बना गहरा अपनापन और आत्मीय व्यवहार भी जोड़कर रखता है।

युवा पीढ़ी में भी क्रेज, पूजा और सगाई के लिए खास मांग

इस दुकान की लोकप्रियता सिर्फ पुरानी पीढ़ी तक सीमित नहीं रही है, बल्कि आज के युवा भी इस स्वाद के मुरीद हो चुके हैं। सुबह के वक्त से लेकर दिन ढलने तक यहां ग्राहकों का आना-जाना बिना रुके चलता रहता है। दुकान के मेन्यू में हर मिजाज और पसंद के हिसाब से कई किस्में उपलब्ध हैं। यहां देसी सादा, देसी तंबाकू, देसी मीठा, बनारसी सादा, बनारसी मीठा और स्पेशल मीठा पान ग्राहकों के लिए खास तौर पर तैयार किया जाता है। कीमतों की बात करें तो यहां पान की शुरुआत 25 रुपये से होती है और सबसे खास वैरायटी 180 रुपये तक में बिकती है। इनमें से स्पेशल मीठे पान का उपयोग लोग घरों में पूजा-पाठ, सगाई समारोह और अन्य शुभ मांगलिक अवसरों के लिए भी बड़े पैमाने पर करते हैं।

ग्राहक की पसंद के मुताबिक बीड़ा लगाने की कला

पान लगाने का अंदाज पूरी तरह से ग्राहक की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। ताजे और चुने हुए पान के पत्ते पर सबसे पहले कत्था और चूना लगाया जाता है। इसके उपरांत ग्राहक की मांग के अनुसार सुगंधित इलायची, बारीक कटी सुपारी और अन्य पारंपरिक मसाले डाले जाते हैं। अरुण सिंघल के काम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्हें वर्षों से आ रहे अपने नियमित ग्राहकों की खास पसंद जबानी याद रहती है। ग्राहक के सामने आते ही वह उनकी रूचि के अनुसार सटीक सामग्री वाला पान बनाकर थमा देते हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा हमेशा अटूट बना रहता है।

सवाल-जवाब

अरुण पान दुकान की शुरुआत कब और किस कीमत से हुई थी?
इस दुकान की शुरुआत 1980 में हुई थी और उस समय अरुण सिंघल सड़क किनारे बैठकर 15 पैसे में एक पान बेचते थे।
यह दुकान गाजियाबाद के किस इलाके में स्थित है?
यह मशहूर पान की दुकान गाजियाबाद के कविनगर इलाके में स्थित है।
दुकान पर पान की कीमतें क्या हैं?
यहां पान की कीमत 25 रुपये से शुरू होकर स्पेशल किस्मों के लिए 180 रुपये तक जाती है।
अरुण पान की दुकान पर कौन-कौन सी किस्में उपलब्ध हैं?
यहां देसी सादा, देसी तंबाकू, देसी मीठा, बनारसी सादा, बनारसी मीठा और स्पेशल मीठा पान मिलता है।
स्पेशल मीठे पान का उपयोग किन मौकों पर किया जाता है?
स्पेशल मीठे पान का इस्तेमाल लोग पूजा-पाठ, सगाई और अन्य मांगलिक अवसरों के लिए विशेष रूप से करते हैं।
दुकान को चलते हुए कितने साल हो चुके हैं?
इस दुकान को संचालित होते हुए 46 साल पूरे हो चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp