त्वचा की देखभाल के लिए बाजार में मिलने वाले महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों के विकल्प के रूप में रसोई में मौजूद प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय रहा है। भारतीय घरों में दही को खानपान का अहम हिस्सा मानने के साथ चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए भी लंबे समय से आजमाया जाता रहा है। इसकी ठंडी तासीर और मुलायम बनावट के कारण लोग इसे घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल करते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ अंकिता व्यास ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में चेहरे पर दही लगाने से मिलने वाले संभावित फायदों और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियों पर विस्तार से जानकारी दी है।
दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और फैट्स कैसे करते हैं काम
अंकिता व्यास के अनुसार दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है, जो एक बेहद सौम्य एक्सफोलिएटिंग एजेंट की तरह काम करता है। यह एसिड त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं यानी डेड स्किन सेल्स को धीरे-धीरे हटाने में मदद करता है। जब ये मृत कोशिकाएं साफ होती हैं, तो चेहरा पहले से अधिक साफ, चमकदार और चिकना दिखाई देने लगता है। इसके अलावा जिन लोगों की त्वचा मौसम में बदलाव या रूखेपन के कारण बेजान और खिंची-खिंची नजर आती है, उनके लिए दही एक बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की भूमिका निभा सकता है।
दही के भीतर मौजूद प्राकृतिक फैट्स और प्रोटीन त्वचा की बनावट को कोमल बनाने में मदद करते हैं। यह त्वचा को भीतर से नमी प्रदान कर रूखेपन से राहत दिला सकता है। हालांकि इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि दही कोई चिकित्सीय समाधान नहीं है। इसे त्वचा के किसी गंभीर रोग, इन्फेक्शन या क्रॉनिक समस्या का डॉक्टरी इलाज मानकर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हर व्यक्ति की त्वचा का प्रकार अलग होता है, इसलिए इसका प्रभाव भी अलग-अलग लोगों पर भिन्न हो सकता है।
चेहरे पर दही लगाने का सही तरीका और पैच टेस्ट
अगर कोई चेहरे पर दही का उपयोग करना चाहता है, तो सबसे पहले सामग्री के चयन पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए केवल सादा और बिना किसी फ्लेवर या चीनी वाला दही ही चुनना चाहिए। उपयोग करने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें ताकि धूल-मिट्टी हट जाए। इसके बाद चेहरे पर दही की एक बहुत पतली परत लगाएं। इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगा रहने दें और फिर सामान्य ताजे पानी से धो लें। धोते समय चेहरे को जोर से रगड़ने या खींचने से बचें।
यदि कोई पहली बार चेहरे पर दही का प्रयोग कर रहा है, तो सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से परहेज करना चाहिए। त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर पहले पैच टेस्ट करना सुरक्षा के लिहाज से सबसे बेहतर कदम माना जाता है। खासतौर पर जिनकी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि किसी भी तरह की अनचाही जलन से बचा जा सके।
ग्लिसरीन और गुलाब जल के साथ त्वचा को हाइड्रेट करने का विकल्प
दही के अलावा अंकिता व्यास ने त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए ग्लिसरीन और गुलाब जल के संयोजन का भी उल्लेख किया है। ग्लिसरीन एक प्रभावी ह्यूमेक्टेंट है, जिसका मुख्य कार्य वातावरण से नमी को आकर्षित करके त्वचा के भीतर बांधे रखना होता है। जब ग्लिसरीन को स्टीम-डिस्टिल्ड गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाया जाता है, तो यह अत्यधिक रूखी और डिहाइड्रेटेड त्वचा को पर्याप्त नमी पहुंचाने में सहायता करता है।
गुलाब जल खरीदते समय उसके लेबल और सामग्री की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार में मिलने वाले कई गुलाब जल में कृत्रिम खुशबू या अन्य रासायनिक तत्व मिले होते हैं, जो नाजुक त्वचा पर जलन या लालिमा पैदा कर सकते हैं। इसलिए शुद्ध स्टीम-डिस्टिल्ड उत्पाद का ही चयन करें और संवेदनशील त्वचा पर इस्तेमाल करने से पहले इसका भी छोटा पैच टेस्ट अवश्य करें।
बेसन और शहद का फेस पैक लगाते समय बरतें यह सावधानी
किचन में आसानी से उपलब्ध रहने वाला बेसन और शहद का मिश्रण भी पारंपरिक त्वचा देखभाल में खूब इस्तेमाल होता है। बेसन त्वचा की ऊपरी सतह से अतिरिक्त तेल, गंदगी और जमी हुई मृत कोशिकाओं को हटाने में सहायक होता है। वहीं दूसरी ओर शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करके त्वचा में आवश्यक नमी को बनाए रखता है। इन दोनों का संतुलन त्वचा की सफाई और कोमलता दोनों बनाए रखने में मदद करता है।
जब इस मिश्रण को फेस पैक के तौर पर लगाया जाए, तो इसे सुखाकर चेहरे पर बहुत जोर से रगड़ना नहीं चाहिए। अगर चेहरे पर सक्रिय मुंहासे, खुले घाव, खरोंच या पहले से किसी तरह की एलर्जी और जलन मौजूद हो, तो बेसन-शहद या किसी भी तरह के घरेलू स्क्रब और पैक को लगाने से पूरी तरह बचना चाहिए। किसी भी चीज के प्राकृतिक या घरेलू नुस्खा होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि वह हर किसी के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगी। दही, गुलाब जल, ग्लिसरीन, बेसन या शहद से भी कुछ लोगों को एलर्जी या त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

















