चिकित्सा जैसे व्यस्त और जिम्मेदारी वाले पेशे के साथ प्रकृति के प्रति अपने लगाव को बनाए रखना एक बेहतरीन कला है। आमतौर पर डॉक्टरों की पूरी जिंदगी मरीजों के इलाज और अस्पताल की फाइलों के बीच ही सिमट कर रह जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा जिला अस्पताल में तैनात MBBS डॉक्टर तनय मिश्रा ने एक अलग ही मिसाल पेश की है। दिनभर अस्पताल में मरीजों की सेवा करने के बाद वे सुबह और शाम को पूरी तरह से एक समर्पित माली की भूमिका में आ जाते हैं। उन्होंने अपने घर को ही एक बेहद खूबसूरत और घने गार्डन में तब्दील कर दिया है, जो उनकी दिनभर की थकान को पल भर में दूर कर देता है।
बचपन का शौक जो बन गया खूबसूरत आशियाना
खंडवा शहर के लाल चौकी इलाके में रहने वाले डॉक्टर तनय मिश्रा को बचपन से ही पेड़-पौधों और हरियाली से गहरा लगाव रहा है। वे अपनी पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में जहां भी रहे, उन्होंने प्रकृति को खुद से कभी दूर नहीं होने दिया। आज खंडवा स्थित उनका घर इसी अटूट लगाव की कहानी बयां करता है। उनके घर के इस विशाल गार्डन में सैकड़ों तरह के पौधे लहलहा रहे हैं। इनमें सेहतमंद फल देने वाले पेड़ों से लेकर मनमोहक खुशबू बिखरने वाले फूल और सजावटी पौधे शामिल हैं।
देसी और विदेशी फूलों का अनूठा संगम
डॉक्टर तनय मिश्रा के इस बगीचे की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद पौधों की विविधता है। उनके गार्डन में चंपा, स्वर्ण चंपा, लाल चंपा, पारिजात, मोगरा, रातरानी और चमेली जैसे कई पारंपरिक भारतीय खुशबूदार फूल खिले हुए हैं। इनके साथ ही उन्होंने कई तरह की सेवनतिया भी उगाई हैं। सिर्फ देसी ही नहीं, बल्कि सर्दियों के मौसम में अपने गार्डन की खूबसूरती को दोगुना करने के लिए उन्होंने विदेशों में पाए जाने वाले डैफोडिल, पिटूनिया, पैंसी और जेरेनियम जैसे फूलों के पौधे भी लगाए हैं। मौसम आने पर जब ये विदेशी फूल खिलते हैं, तो पूरे घर का नजारा किसी जन्नत जैसा हो जाता है।
फूलों के अलावा इस बगीचे में आम, नींबू और जामुन जैसे फलदार पेड़ भी लगे हैं, जो समय पर अच्छी पैदावार देते हैं। इसके साथ ही घर के वातावरण को शुद्ध रखने के लिए उन्होंने औषधीय गुणों वाली तुलसी की कई अलग-अलग प्रजातियों को भी अपने बगीचे का हिस्सा बनाया है।
तनाव दूर करने और मानसिक शांति का माध्यम
इतने बड़े बगीचे को संभालना किसी के लिए भी आसान नहीं होता, लेकिन डॉक्टर तनय मिश्रा इस पूरे काम को अकेले ही संभालते हैं। सुबह और शाम को पौधों को पानी देना, उनकी छंटाई करना, सूखी पत्तियों को हटाना और नए पौधे रोपना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। डॉक्टर मिश्रा का मानना है कि बागवानी उन्हें अद्भुत मानसिक शांति देती है।
उनका कहना है कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से बचने के लिए उन्हें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उनके घर में ही प्रकृति का सुंदर नजारा मौजूद है। सुबह के समय चहकने वाले पक्षी और चिड़ियों की आवाजें उनके दिन की शुरुआत को बेहद खुशनुमा बना देती हैं। डॉक्टर तनय मिश्रा इसे केवल अपना शौक नहीं मानते, बल्कि वे इसे प्रकृति की एक सच्ची सेवा के रूप में देखते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उनका यह अनूठा प्रयास आज खंडवा के अन्य लोगों को भी प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दे रहा है।



















