आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बालों की देखभाल से जुड़े ढेरों घरेलू नुस्खे धड़ल्ले से शेयर किए जाते हैं। लोग अक्सर बाल बढ़ाने, रूसी भगाने और झड़ने की रफ्तार थामने के लिए किचन की चीजों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। मगर क्या नींबू और प्याज वाकई बालों की सेहत के लिए उतने फायदेमंद हैं जितना दावा किया जाता है? एमडी-डर्मेटोलॉजी डॉक्टर आंचल पंथ ने इस विषय पर खुलकर बात की है और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले इन नुस्खों की असलियत लोगों के सामने रखी है। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए समझाया है कि ये चीजें स्कैल्प पर कितना असर डालती हैं।
क्या डैंड्रफ हटाने में नींबू वाकई मददगार है?
रूसी की समस्या से निजात पाने के वास्ते बहुत से लोग अपने सिर पर नींबू का रस रगड़ने लगते हैं। इस बारे में डॉक्टर आंचल का कहना है कि नींबू का यह इस्तेमाल स्कैल्प पर जलन पैदा कर सकता है और वहां की प्राकृतिक नमी या तेल को बहुत ज्यादा कम कर देता है। अगर इसका इस्तेमाल लंबे समय तक जारी रखा जाए, तो यह त्वचा को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाकर कमजोर बना देता है। इसलिए रूसी की परेशानी से निपटने के लिए नींबू के बजाय केटोकोनाज़ोल, जिंक पाइरिथियोन या सेलेनियम सल्फाइड जैसे असरदार इंग्रीडिएंट्स वाले एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल करना चाहिए।
क्या प्याज का रस लगाने से सचमुच बाल तेजी से बढ़ते हैं?
बालों की सेहत सुधारने के लिए बताए जाने वाले घरेलू उपायों में प्याज के रस का नाम सबसे ऊपर आता है। इंटरनेट पर यह सलाह आम है कि हेयर ग्रोथ बढ़ाने और हेयर फॉल रोकने के लिए प्याज का रस या प्याज का तेल सिर पर लगाना चाहिए। लेकिन डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, सामान्य रूप से बाल झड़ने या पैटर्न हेयर लॉस की स्थिति में प्याज का रस बालों को लंबा करने में कोई खास कमाल नहीं दिखाता है। इसके अलावा, प्याज में सल्फर होने की वजह से बालों के सल्फाइड बॉन्ड मजबूत होने का जो दावा किया जाता है, उसके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यदि आपके बाल लगातार झड़ रहे हैं, तो इसके मुख्य कारण का पता लगाकर उसका सटीक इलाज करवाना ज्यादा बुद्धिमानी होगी।
सही इलाज अपनाना क्यों जरूरी है?
निष्कर्ष के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से बाल झड़ने की दिक्कत है या स्कैल्प पर अत्यधिक रूसी जमी रहती है, तो उसे सिर्फ पारंपरिक नुस्खों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों पर समय गंवाने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचकर डॉक्टरी इलाज लेना कहीं अधिक बेहतर विकल्प साबित होता है।



















