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कोटा के इस हॉस्टल में वार्डन नहीं, मालकिन खुद निभाती हैं मां की भूमिका, छत के कैफे में मिलती है देर रात मैगीजीवनशैली
2 जुल॰ 2026, 5:32 am (45 दिन पहले)· 2

कोटा के इस हॉस्टल में वार्डन नहीं, मालकिन खुद निभाती हैं मां की भूमिका, छत के कैफे में मिलती है देर रात मैगी

कोटा के लैंडमार्क सिटी में बने मधुराम हॉस्टल में मालकिन कविता राठी खुद छात्राओं का हालचाल पूछती हैं, और रूफटॉप कैफे में आधी रात को भी गरम मैगी और फ्रेश जूस मिल जाता है।

कोटा के लैंडमार्क सिटी इलाके में, जहां ज्यादातर दिन की शुरुआत किताबों के पन्नों के साथ होती है और रातें कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी के दबाव में गुजरती हैं, वहीं एक गर्ल्स हॉस्टल ने यहां के रहने-सहने के पूरे तरीके को ही बदल दिया है। इस हॉस्टल का नाम है मधुराम हॉस्टल, और संचालकों का दावा है कि फिलहाल कोटा में यह इकलौता ऐसा हॉस्टल है, जहां छात्राओं को पढ़ाई के बेहतरीन माहौल के साथ इतनी सुविधाएं और केयर मिलती है कि उन्हें अपने घर की कमी महसूस ही नहीं होती। देश की कोचिंग सिटी के तौर पर मशहूर कोटा में हॉस्टलों का कल्चर आमतौर पर बेहद सख्त और तय नियमों वाला रहा है, लेकिन यह हॉस्टल उस परंपरा को तोड़ता नजर आता है।

हाई-स्पीड इंटरनेट से रूफटॉप कैफे तक, सुविधाओं की पूरी लिस्ट

हॉस्टल के मेन गेट से भीतर घुसते ही यहां का माहौल बाकी हॉस्टलों से बिल्कुल अलग नजर आता है। दीवारों पर जगह-जगह सुंदर और प्रेरक मोटिवेशनल पोस्टर लगे हैं, जो सीधे तौर पर यहां रहने वाली छात्राओं की सोच और मनोबल पर असर डालते हैं। पढ़ाई के लिए हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा दी गई है, फिटनेस के शौकीन छात्राओं के लिए ओपन जिम भी बनाया गया है, लेकिन इस हॉस्टल की सबसे बड़ी खासियत है इसका रूफटॉप कैफे, जो देर रात पढ़ाई के बीच अचानक लगने वाली भूख को शांत करने के लिए बनाया गया है। इन सभी सुविधाओं का मकसद यही है कि पढ़ाई के लिए अनुशासन बना रहे और साथ ही छात्राओं को किसी तरह की तकलीफ भी न हो।

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वार्डन नहीं, मालकिन कविता राठी खुद पूछती हैं हालचाल

हॉस्टल की मालकिन कविता राठी का कहना है कि उनका मकसद छात्राओं को सिर्फ रहने के लिए एक कमरा देना भर नहीं है। वो बताती हैं, "हमारा मुख्य मकसद स्टूडेंट्स को सिर्फ रहने के लिए एक कमरा देना भर नहीं है. हम हॉस्टल में आने वाली सभी छात्राओं को मानसिक रूप से इतना मोटिवेट करते हैं कि जैसे ही वो हॉस्टल के अंदर कदम रखें, उन्हें अपनी सबसे पहली प्रायोरिटी याद रहे कि वो यहां अपने और अपने माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए आई हैं."

कविता राठी खुद एक वर्किंग वुमन हैं और यह हॉस्टल उनके पति का है। हॉस्टल की रोजमर्रा की देखभाल के लिए यहां बकायदा एक वार्डन भी नियुक्त है, लेकिन कविता को व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि सिर्फ स्टाफ के भरोसे इतनी दूर से आई बच्चियों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। यही वजह है कि वो खुद रोज नियम से हॉस्टल पहुंचती हैं, छात्राओं के बीच बैठती हैं, उनका हालचाल जानती हैं और उनकी पढ़ाई को लेकर फीडबैक भी लेती हैं। कविता कहती हैं, "कोटा में हॉस्टल्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन हमने कुछ अलग करने का सोचा. लड़कियां अपने घर से बहुत दूर हैं, उन्हें यहां अकेलापन न खले, इसलिए मैं खुद उनके साथ टाइम स्पेंड करती हूं ताकि उन्हें बिल्कुल 'घर जैसा फील' हो सके."

आधी रात की भूख का इलाज है छत पर बना कैफे

कोटा के ज्यादातर हॉस्टलों में सुबह के नाश्ते, दोपहर और रात के खाने का एक तय समय होता है, और अगर कोई छात्रा पढ़ाई की वजह से थोड़ा भी लेट हो जाए, तो अक्सर उसे भूखे पेट ही सोना पड़ता है। मधुराम हॉस्टल की कहानी इससे पूरी तरह अलग है। इस हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही छात्रा प्राची ने अपना निजी अनुभव शेयर करते हुए बताया, "जब हम रात में देर तक जागकर पढ़ाई करते हैं, तो भूख लगना बेहद लाजमी है. ऐसे में हमें खाने-पीने की चीजों के लिए रात में हॉस्टल से बाहर भटकने की जरूरत नहीं होती. हमारे हॉस्टल की छत पर ही एक बेहद शानदार रूफटॉप कैफे बना हुआ है. वहां जाकर हम आधी रात को भी जो कुछ ऑर्डर करते हैं, वो तुरंत फ्रेश और गरम बनकर हमें मिल जाता है. मुझे और मेरी फ्रेंड्स को रात में गरम मैगी खाना, फ्रेश जूस या शेक पीना सबसे ज्यादा पसंद है. यहां खाने का कोई टाइमिंग प्रेशर नहीं है. यह आजादी हमें पूरी तरह फील कराती है कि हम हॉस्टल में नहीं, बल्कि अपने ही घर में हैं."

घर जैसा सहारा मिले तो मुश्किल राह भी हो जाती है आसान

कोटा में कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई का दबाव आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे माहौल में मधुराम हॉस्टल की यह अनूठी पहल यह दिखाती है कि अगर छात्राओं को सही माहौल, सही मोटिवेशन और घर जैसा सपोर्ट मिल जाए, तो उनकी मुश्किल राहें भी काफी हद तक आसान हो सकती हैं। यही वजह है कि यह हॉस्टल कोटा के हॉस्टल कल्चर में एक नई और अलग मिसाल बनकर सामने आया है।

सवाल-जवाब

मधुराम हॉस्टल कहां स्थित है?
यह कोटा के लैंडमार्क सिटी इलाके में स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल है।
हॉस्टल की मालकिन कौन हैं?
हॉस्टल की मालकिन कविता राठी हैं, जो खुद एक वर्किंग वुमन हैं और यह हॉस्टल उनके पति का है।
मधुराम हॉस्टल में क्या खास सुविधाएं हैं?
यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, ओपन जिम और खासतौर पर एक रूफटॉप कैफे है, जहां देर रात भी खाना मिल जाता है।
रूफटॉप कैफे में रात में क्या मिलता है?
छात्रा प्राची के मुताबिक वहां गरम मैगी, फ्रेश जूस और शेक जैसी चीजें आधी रात को भी तुरंत फ्रेश बनकर मिल जाती हैं।
क्या हॉस्टल में अलग से वार्डन भी नियुक्त है?
हां, रोजमर्रा की देखभाल के लिए वार्डन नियुक्त है, लेकिन मालकिन कविता राठी खुद भी रोज हॉस्टल पहुंचती हैं।
कविता राठी हॉस्टल में क्या अलग करती हैं?
वो छात्राओं के बीच बैठती हैं, उनका हालचाल पूछती हैं और उनकी पढ़ाई को लेकर फीडबैक भी लेती हैं, ताकि उन्हें घर जैसा फील हो सके।
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