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मानसून में मकान निर्माण से मिलती है ज्यादा मजबूती, सिविल एक्सपर्ट सुरेंद्र श्रीवास्तव ने समझाए वैज्ञानिक कारणजीवनशैली
29 जुल॰ 2026, 3:00 am (54 दिन पहले)· 0

मानसून में मकान निर्माण से मिलती है ज्यादा मजबूती, सिविल एक्सपर्ट सुरेंद्र श्रीवास्तव ने समझाए वैज्ञानिक कारण

चंबल क्षेत्र के निर्माण विशेषज्ञ सुरेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार बारिश का मौसम घर की नींव और दीवारों को सर्वाधिक मजबूती प्रदान करता है। कुदरती तलाई और धुली हुई नदी की रेत से मकान की उम्र सालों-साल बढ़ जाती है।

नया मकान बनाने का विचार मन में आते ही अधिकांश लोग गर्मी या सर्द हवाओं वाले मौसम का चुनाव करते हैं। चंबल क्षेत्र में भी आम धारणा यही बनी हुई है कि बरसात के दिनों में नींव की खुदाई करना या ढलाई का काम शुरू कराना नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, निर्माण विज्ञान के नजरिए से देखें तो यह सोच पूरी तरह भ्रामक है। सिविल निर्माण मामलों के विशेषज्ञ सुरेंद्र श्रीवास्तव का स्पष्ट कहना है कि साल के बारह महीनों में मानसून ही एक ऐसा समय है जब मकान को सबसे टिकाऊ और पक्की मजबूती दी जा सकती है।

कुदरती नमी से सीमेंट का पक्का जमाव

भवन निर्माण के दौरान दीवारों की चिनाई या लेंटर की ढलाई के पश्चात तलाई (क्योरिंग) सबसे बुनियादी प्रक्रिया मानी जाती है। सीमेंट अपनी पूरी रासायनिक क्षमता और मजबूती तभी हासिल कर पाता है जब उसे लंबे समय तक पर्याप्त पानी की सींच मिले। भीषण गर्मी के मौसम में सुबह छिड़का गया पानी दोपहर ढलने से पहले वाष्पीकृत हो जाता है। तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण कंक्रीट का पानी तेजी से उड़ता है, जिससे लेंटर और प्लास्टर में बारीक दरारें विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में दिन में तीन-तीन बार तलाई करने के बावजूद दीवारों को वह आवश्यक नमी नहीं मिल पाती।

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इसके विपरीत, बारिश के दिनों में वायुमंडल में आर्द्रता का स्तर पहले से ही उच्च रहता है। मकान मालिक द्वारा मोटर से की जाने वाली हल्की सिंचाई के साथ-साथ प्राकृतिक बारिश की बूंदें कंक्रीट को 24 घंटे लगातार नमी से तर रखती हैं। किसी भी अतिरिक्त श्रम या वित्तीय लागत के बिना कंक्रीट अंदर तक पक्की हो जाती है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सीमेंट के बंधनों को अत्यंत पक्का बना देती है, जिससे सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक मजबूती प्राप्त होती है।

साफ और धुली हुई रेत से चिनाई की बेहतर पकड़

किसी भी भवन की आयु केवल सीमेंट की मात्रा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसमें मिलाए जाने वाले रेते की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ग्रीष्मकाल या सामान्य दिनों में बाजार में आने वाली रेत में मिट्टी, बारीक गाद और धूल के कण मौजूद रहते हैं। जब इस अशुद्ध रेत से सीमेंट का मसाला तैयार किया जाता है, तो मिट्टी की मौजूदगी सीमेंट और ईंटों के बीच की पकड़ को कमजोर कर देती है।

मानसून के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ता है और पानी का तेज प्रवाह रेत में जमा मिट्टी तथा कचरे को अपने साथ बहा ले जाता है। इस अवधि में निर्माण कार्यों के लिए जो रेत उपलब्ध होती है, वह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से धुली और निखरी हुई होती है। जब इस साफ रेत में सीमेंट मिलाकर जुड़ाई या प्लास्टर किया जाता है, तो ईंटों और कंक्रीट का जोड़ चट्टान की भांति मजबूत बनता है। इस प्रक्रिया से हुआ निर्माण वर्षा-दर-वर्ष बिना किसी क्षरण के टिका रहता है।

नींव की आदर्श गहराई और मिट्टी में नमी का संतुलन

बरसात के मौसम में जमीन के भीतर तक पानी समा जाने से ऊपरी मिट्टी नरम हो जाती है। इससे नींव की खुदाई बिना किसी अतिरिक्त श्रम के सटीक और आदर्श गहराई तक संभव हो पाती है। इसके साथ ही जब नींव में कंक्रीट का घोल भरा जाता है, तो नीचे की मिट्टी पहले से ही जल से संतृप्त होने के कारण कंक्रीट का पानी नहीं सोखती।

सुरेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि सर्दियों में नमी जरूर होती है, लेकिन वर्षा ऋतु में मिलने वाली प्राकृतिक तलाई और बिल्कुल साफ धुली रेत का अद्भुत मेल अन्य किसी मौसम में नहीं मिल पाता। यही कारण है कि मानसून में तैयार हुआ ढांचा तकनीकी मानकों पर सबसे खरा उतरता है।

सीमेंट के भंडारण में बरतें यह एकमात्र सावधानी

बारिश के मौसम में मकान निर्माण का पूरा लाभ उठाने के लिए केवल एक मुख्य बात पर ध्यान देना आवश्यक है। बाजार से खरीदी गई सीमेंट की बोरियों को सीलन और पानी से पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहिए। सीमेंट को किसी ऐसे सूखे और ऊंचे स्थान पर भंडारित करें जहां नमी न पहुंच सके। यदि सीमेंट की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है, तो बरसात के दिनों में बना मकान किसी भी अन्य मौसम के निर्माण से कहीं अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक साबित होता है।

सवाल-जवाब

क्या बारिश के मौसम में मकान बनाना सुरक्षित है?
जी हां, सिविल एक्सपर्ट सुरेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार बारिश का मौसम कंक्रीट की तलाई और साफ रेत की उपलब्धता के कारण मकान को सबसे ज्यादा मजबूती देता है।
बरसात के दौरान कंक्रीट की तलाई का क्या फायदा मिलता है?
हवा में मौजूद नमी और बारिश का पानी कंक्रीट को 24 घंटे प्राकृतिक नमी प्रदान करता है, जिससे सीमेंट अंदर तक पक जाता है और दरारें नहीं पड़तीं।
बारिश के दिनों में मिलने वाली नदी की रेत क्यों बेहतर मानी जाती है?
नदियों के तेज बहाव में मिट्टी और गाद बह जाती है, जिससे बिल्कुल साफ और धुली हुई रेत मिलती है जो सीमेंट के साथ मजबूत पकड़ बनाती है।
मानसून में निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट को कैसे सुरक्षित रखें?
खरीदे गए सीमेंट की बोरियों को पानी और नमी से पूरी तरह बचाकर किसी सूखे स्थान पर रखना चाहिए ताकि वह खराब न हो।
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