मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल उतार-चढ़ाव आते हैं। इन बदलावों की वजह से पेट में तेज मरोड़, कमर दर्द, बदन दर्द, अत्यधिक थकान और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामान्य हो जाती हैं। ऐसे संवेदनशील दिनों में शरीर की खोई ऊर्जा लौटाने और कमजोरी से उबरने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। पोषण विशेषज्ञ किरण ने अपने निजी अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर एक संपूर्ण दिनचर्या तैयार की है, जो शरीर को जरूरी खनिज, विटामिन और निरंतर ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है।
सुबह की शुरुआत: केसर जल, किशमिश और सूखे मेवे
दिन की शुरुआत शरीर को हाइड्रेट और पोषित करने वाले पेय से की जाती है। किरण सुबह उठते ही केसर और किशमिश के पानी का सेवन करती हैं। इसे तैयार करने के लिए तीन से चार केसर के रेशों वाले पानी में आठ से दस काली किशमिश रात भर भिगोकर रखी जाती हैं। सुबह इस पानी को अच्छी तरह छानकर पीया जाता है। इसके साथ ही रात भर पानी में भिगोए गए बादाम और अखरोट खाने की सलाह दी जाती है, जिससे शरीर को आवश्यक हेल्दी फैट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलते हैं जो हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार होते हैं।
फाइबर से भरपूर नाश्ता: दालचीनी और पके सेब का खास बाउल
पीरियड्स के दौरान पाचन क्रिया धीमी पड़ने से कई महिलाओं को कब्ज की शिकायत हो जाती है। इस परेशानी से बचने के लिए नाश्ते में उच्च फाइबर युक्त भोजन शामिल करना लाभकारी होता है। किरण अपने ब्रेकफास्ट में स्ट्यूड एप्पल फाइबर बाउल लेती हैं। इसे बनाने के लिए दो सेबों का छिलका उतारकर उन्हें चुटकी भर दालचीनी के साथ धीमी आंच पर लगभग 6 से 7 मिनट तक मुलायम होने तक पकाया जाता है। इसके बाद इसमें पहले से भीगे हुए चिया सीड्स, एक बड़ा चम्मच पिसी हुई अलसी, एक बड़ा चम्मच भुने हुए कद्दू के बीज, थोड़ी भीगी हुई काली किशमिश, दो सूखे आलूबुखारे और तीन से चार चम्मच ताजे अनार के दाने अच्छी तरह मिलाए जाते हैं। यह मिश्रण आंतों की सेहत दुरुस्त रखने के साथ पेट को हल्का महसूस कराता है।
दिन का स्नैक: चुकंदर और गाजर का ताजा पोषक जूस
दोपहर के खाने से पहले शरीर में रक्त प्रवाह और हीमोग्लोबिन स्तर को सहारा देने के लिए सब्जियों का ताजा जूस एक बेहतरीन विकल्प बनता है। किरण अपनी डाइट में एक मध्यम आकार का चुकंदर, आधी गाजर, आधा कप अनार के दाने, ताजी हरी धनिया पत्ती और पुदीना पत्ती को मिलाकर तैयार किया गया रस शामिल करती हैं। इन सभी सामग्रियों को मिक्सी में पीसकर रस को छान लिया जाता है और अंत में इसमें आधे नींबू का रस निचोड़ा जाता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी आयरन के अवशोषण को तेज करता है, जिससे कमजोरी से तुरंत राहत मिलती है।
दोपहर का भोजन: पौष्टिक ज्वार की रोटी और हरी बीन्स
लंच हमेशा ऐसा होना चाहिए जो पचने में आसान हो और देर तक ऊर्जा बनाए रखे। किरण दोपहर में ज्वार की बनी रोटी, बीन्स की हरी सब्जी और ताजे दही का भोजन करती हैं। ज्वार की रोटी तैयार करने के लिए आटे में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, स्वादानुसार नमक और पिसी काली मिर्च मिलाई जाती है। इस मिश्रण को गुनगुने पानी की मदद से मुलायम गूंथा जाता है। फिर लोइयां बनाकर तवे पर दोनों तरफ से हल्का सुनहरा और अच्छी तरह पकने तक सेका जाता है। ज्वार ग्लूटेन-मुक्त होता है और दही आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाकर पाचन तंत्र को शांत रखता है।
शाम का संतुलित डिनर: दाल, चावल और पनीर मखाना टिक्की
रात के भोजन में हल्का लेकिन संपूर्ण पोषण मिलना चाहिए। किरण अपने डिनर में अरहर या मूंग की दाल, उबले चावल और घर पर बनी पनीर मखाना टिक्की लेती हैं। टिक्की तैयार करने के लिए मखानों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लिया जाता है। इसके बाद एक बर्तन में भीगे मखाने, कद्दूकस किया ताजा पनीर, एक उबला आलू, कद्दूकस की गाजर, उबली हरी मटर, बारीक कटी धनिया पत्ती, हरी मिर्च, चाट मसाला, काली मिर्च पाउडर और नमक मिलाकर गूंथ लिया जाता है। इस मिश्रण से गोल टिक्कियां बनाकर गर्म तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से क्रिस्पी होने तक सेका जाता है। यह व्यंजन प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर होता है।
सोने से पहले: सुकून देने वाली गर्म हिबिस्कस चाय
रात को आरामदायक नींद लेने और गर्भाशय की मांसपेशियों के तनाव को कम करने के लिए कैफीन-मुक्त हर्बल पेय सबसे बढ़िया होता है। किरण सोने से कुछ देर पहले गुड़हल के सूखे फूलों से बनी चाय पीती हैं। इसे बनाने के लिए एक कप पानी को गैस पर तीन से चार मिनट तक उबाला जाता है। फिर आंच बंद करके पानी में एक छोटा चम्मच सूखे हिबिस्कस के फूल डाले जाते हैं और बर्तन को ढक्कन से 7 से 10 मिनट के लिए ढक दिया जाता है। इसके बाद चाय को छानकर हल्का गर्म ही पिया जाता है। यह मांसपेशियों को आराम देकर गहरी नींद लाने में मदद करती है।



















