रसोई में सब्जी बनाने या नाश्ता तैयार करने के दौरान आलू छीलकर काटते ही अक्सर उसका रंग बदलने लगता है। कुछ ही मिनटों में सफेद आलू भूरा या काला दिखने लगता है, जिसे देखकर कई बार खाना पकाने का उत्साह ठंडा पड़ जाता है। वास्तव में आलू का रंग बदलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि वह सड़ गया है या खाने लायक नहीं बचा है। जैसे ही कटे हुए आलू की खुली सतह हवा के संपर्क में आती है, उसमें ऑक्सीडेशन की रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है। हवा में मौजूद ऑक्सीजन आलू के अंदर मौजूद तत्वों से क्रिया करती है, जिसके कारण उसका स्वाभाविक रंग गहरा होने लगता है। रसोई से जुड़ी कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक तकनीकों की मदद से इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
काटने के तुरंत बाद ठंडे पानी में डुबोएं
आलू की प्राकृतिक ताजगी बनाए रखने का सबसे सरल तरीका पानी की सुरक्षात्मक परत तैयार करना है। जब भी आप आलू काटें, तो उसे हवा में खुला छोड़ने के बजाय तुरंत एक गहरे बर्तन में रखे ठंडे पानी में डाल दें। पानी की परत आलू की सतह और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच एक मजबूत रुकावट बन जाती है, जिससे ऑक्सीकरण की प्रक्रिया रुक जाती है। अगर आपको भोजन पकाने में दो से तीन घंटे का वक्त लगने वाला है, तो आलू के हर टुकड़े को पानी में पूरी तरह डूबा रहने दें। यह तरीका आलू को सूखने से भी बचाता है और उसकी बनावट भी बरकरार रहती है।
नींबू का रस अथवा सिरके का प्रयोग
अगर आपको कटे हुए आलू को काफी देर तक ताजा और साफ रंग में रखना है, तो हल्के अम्लीय घोल का सहारा लिया जा सकता है। पानी से भरे बर्तन में आधा चम्मच ताजे नींबू का रस या साधारण सफेद सिरका मिला दीजिए। नींबू और सिरके में प्राकृतिक एसिड होता है, जो ऑक्सीकरण की गति को काफी धीमा कर देता है। इस घोल में आलू डुबोकर रखने से उनका रंग बिल्कुल नहीं बदलता और वह प्राकृतिक रूप से चमकदार दिखता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस हल्की मात्रा से आलू के प्राकृतिक स्वाद पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
चुटकी भर साधारण नमक का घोल
नमक केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने के काम नहीं आता, बल्कि यह सब्जियों के संरक्षण में भी मददगार साबित होता है। एक कटोरे पानी में चुटकी भर नमक घोलें और कटे हुए आलू उसमें डाल दें। नमक का पानी आलू को काला होने से बचाने के साथ-साथ उसकी बाहरी सतह पर मौजूद अतिरिक्त स्टार्च को भी खींचकर बाहर कर देता है। इस प्रक्रिया से आलू पकाने के दौरान आपस में चिपकते नहीं हैं। जब आप ऐसे आलू से भुजिया, सब्जी या फ्रेंच फ्राइज तैयार करते हैं, तो वे साधारण आलू के मुकाबले ज्यादा कुरकुरे और स्वादिष्ट बनते हैं।
बर्फ के टुकड़ों का ठंडा पानी
अगर आप किसी दावत या त्योहार के लिए पहले से तैयारी कर रहे हैं और आलू को पांच से छह घंटे पहले काटकर रखना चाहते हैं, तो बर्फ का उपयोग सबसे बेहतरीन उपाय है। एक बड़े बर्तन में बहुत ठंडा पानी लें और उसमें बर्फ के कुछ टुकड़े डाल दें। इस बर्फीले ठंडे पानी में कटे हुए आलू डुबोकर रख दें। बहुत कम तापमान और पानी का घेरा मिलकर आलू में किसी भी प्रकार का रंग परिवर्तन नहीं होने देते। इसके अलावा, बर्फ का ठंडा तापमान आलू के रेशों को सख्त बनाए रखता है, जिससे पकाने के बाद उसका कुरकुरापन बहुत बढ़िया आता है।
एयरटाइट डिब्बे या प्लास्टिक क्लिंग रैप का विकल्प
कई बार लोग आलू को पानी में भिगोकर नहीं रखना चाहते, खासकर जब उन्हें बिना अतिरिक्त नमी के तुरंत भूनना हो। ऐसी स्थिति में आप कटे हुए आलू को किसी पूरी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज के अंदर रख सकते हैं। इसके अलावा दूसरा कारगर उपाय प्लास्टिक क्लिंग रैप का उपयोग करना है। कटोरे में रखे आलू के ऊपर प्लास्टिक रैप को इस प्रकार कसकर चिपकाएं कि अंदर हवा के आने-जाने की बिल्कुल जगह न रहे। हवा का संपर्क कटते ही आलू घंटों तक अपने असली रूप और रंग में सुरक्षित रहता है।


















