अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है, जहां सट्टेबाजी की भारी पोजीशन के कारण बाजार ताजा खबरों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों से जुड़े घटनाक्रम और पाइपलाइन प्रवाह को लेकर आ रहे बयानों के बीच ऊर्जा बाजार दोतरफा दबाव का सामना कर रहा है। वित्तीय विश्लेषक रयान मैकके और बार्ट मेलेक के अनुसार, सट्टेबाजों की भारी भागीदारी के चलते कच्चा तेल किसी भी नई खबर पर तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है, जिससे कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सप्लाई मार्गों पर विरोधाभासी बयान और बाजार की सतर्कता
मध्य पूर्व के रणनीतिक जलमार्ग को लेकर बाजार में चर्चाएं गर्म रहीं, जिनमें दावा किया गया था कि यदि अमेरिका द्वारा शर्तें पूरी की जाती हैं तो ईरान 7 दिनों के भीतर जलडमरूमध्य को खोल सकता है। हालांकि, इन दावों को ईरान द्वारा पहले ही खारिज कर दिया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि सौदेबाजी से जुड़ी खबरों पर तब तक संशय बना रहता है जब तक कि जमीन पर कोई ठोस प्रगति न दिखे। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब द्वारा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन प्रवाह को फिर से शुरू करने के परीक्षण किए जा रहे हैं। एशियाई खरीदारों को यह जानकारी भी दी गई है कि वे जल्द ही यानबू से तेल उठा सकेंगे। इन सभी घटनाक्रमों ने मिलकर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
ऊर्जा बाजार की दोधारी तलवार
ऊर्जा क्षेत्र के मौजूदा हालात को एक दोधारी तलवार के रूप में देखा जा रहा है। यदि रिफाइनरियों का परिचालन बढ़ता है तो इससे परिष्कृत उत्पादों के बाजार में आपूर्ति की तंगी कम हो सकती है, लेकिन ऐसा होने पर कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति फिर से सख्त हो जाएगी। दूसरी ओर, यदि रिफाइनरियों की खपत बढ़े बिना ही आपूर्ति प्रवाह में बढ़ोतरी होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी थम सकती है। ऐसी स्थिति में परिष्कृत उत्पादों के दाम तब तक ऊंचे बने रह सकते हैं जब तक कि कीमतों के अत्यधिक दबाव से मांग में गिरावट न आ जाए।
ग्लोबल करेंसी और कमोडिटी बाजार की चाल
ऊर्जा बाजार के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर मजबूत हुआ। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के सख्त रुख वाले बयानों ने इस तेजी को सहारा दिया। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो सकती है। इसके साथ ही वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शिखर वार्ता पर भी बाजार की निगाहें टिकी हैं।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार को एशियाई सत्र में 157.50 के स्तर के पास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका ने येन के नुकसान को सीमित किया है। वहीं बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि यह कदम बाजार की पहले से तय उम्मीदों के अनुरूप था, जिसके चलते येन के खरीदारों को बहुत अधिक आक्रामक बढ़त नहीं मिल सकी।
सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला
सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली सोने की चमक में मंगलवार को लगातार दूसरे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर की ओर फिसल गई। अमेरिकी डॉलर में खरीदारी का नया रुझान लौटने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से सोने के भाव में यह नरमी देखने को मिली है। वैश्विक निवेशक अब अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के बीच होने वाली बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जो यह तय कर सकती है कि दोनों शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूदा व्यापारिक ठहराव आगे बढ़ेगा या फिर अनिश्चितता का नया दौर शुरू होगा।



















