मेक्सिको का केंद्रीय बैंक बैंक्सिको अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों को बिना किसी बदलाव के स्थिर रखने की तैयारी कर रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि नीतिगत बयान में मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा, हालांकि बैंक अपने समग्र रुख को तटस्थ बनाए रखने की रणनीति पर ही कायम रहेगा। आर्थिक मोर्चे पर विकास दर में गिरावट के जोखिम साफ नजर आ रहे हैं, जिससे बैंक के नीति निर्माता सतर्कता बरतने के मूड में हैं।
मुद्रास्फीति का दबाव और आर्थिक वृद्धि पर मंडराते बादल
केंद्रीय बैंक के नीतिगत बयान में यह रेखांकित किए जाने का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था में विकास से जुड़े जोखिम लगातार नीचे की ओर झुक रहे हैं। इसके साथ ही बैंक का बोर्ड अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख और उसके नीतिगत चक्र पर करीबी नज़र रखे हुए है। फेडरल रिजर्व के कदमों का सीधा असर अमेरिकी डॉलर और मेक्सिकन पेसो की विनिमय दर पर पड़ता है, जिसे संतुलित रखना बैंक्सिको के लिए एक प्राथमिक चुनौती बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों के औसत पूर्वानुमानों के अनुसार, मेक्सिको की प्रमुख ब्याज़ दर कम से कम 2028 की दूसरी छमाही तक मौजूदा स्तरों पर ही स्थिर रहने की संभावना है। भविष्य के नीतिगत कदमों को लेकर हालिया सर्वेक्षण में शामिल 13 प्रतिभागियों में से 8 ने आगे चलकर एक और दर कटौती की उम्मीद जताई है, जबकि 5 विश्लेषकों का मानना है कि दरें बिना किसी बदलाव के अपने स्थान पर टिकी रहेंगी।
बैंक्सिको की भूमिका और मौद्रिक नीति का तंत्र
बैंक्सिको के नाम से पहचाना जाने वाला बैंक ऑफ मेक्सिको देश की वित्तीय प्रणाली की धुरी है। इसका मूल कार्य देश की मुद्रा मेक्सिकन पेसो के मूल्य की रक्षा करना और एक संतुलित मौद्रिक नीति का संचालन करना है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखते हुए उसे 3 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य के आसपास बनाए रखना है, जो कि 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के सहिष्णुता दायरे का मध्य बिंदु है।
मौद्रिक नीति के संचालन में बैंक्सिको का सबसे महत्वपूर्ण हथियार ब्याज़ दरें तय करना है। जब देश में मुद्रास्फीति तय सीमा से ऊपर निकलती है, तो बैंक ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाता है। इस कदम से आम परिवारों और कारोबारी संस्थानों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे समग्र मांग में कमी आती है और अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ठंडी होने लगती है। ऊंची ब्याज़ दरें आमतौर पर मेक्सिकन पेसो को मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि वे निवेशकों को बेहतर रिटर्न देकर देश में पूंजी निवेश को आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, दरों में कटौती होने पर पेसो के कमजोर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर के साथ ब्याज़ दरों का अंतर तय करने में फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
फेडरल रिजर्व से तालमेल और ऐतिहासिक फैसले
बैंक्सिको साल भर में 8 बार अपनी मौद्रिक नीति तय करने के लिए बैठक आयोजित करता है। इसके नीतिगत निर्णयों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों की गहरी छाप देखने को मिलती है। इसी वजह से मेक्सिको के केंद्रीय बैंक की नीति निर्धारक समिति आमतौर पर फेडरल रिजर्व की बैठक के एक हफ्ते बाद बुलाई जाती है। इस प्रक्रिया से बैंक्सिको न केवल अमेरिकी कदमों पर प्रतिक्रिया देता है, बल्कि कई बार उनकी दिशा को पहले से भांपकर पूर्वोपाय भी करता है।
इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण कोविड-19 महामारी के बाद के दौर में देखने को मिला था। उस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज़ दरें बढ़ाए जाने से पहले ही बैंक्सिको ने दरों में वृद्धि की शुरुआत कर दी थी। बैंक का प्राथमिक मकसद पेसो के मूल्य में भारी गिरावट को रोकना और उस पूंजी पलायन पर लगाम लगाना था जो देश की वित्तीय स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था।
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हलचल
वैश्विक वित्तीय मंच पर प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों में भी अहम उतार-चढ़ाव दर्ज किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में बिकवाली का दबाव देखा गया, जहां यह जोड़ी 0.7100 के अहम समर्थन स्तर को तोड़ते हुए तीन दिन के निचले स्तर पर पहुंच गई। ग्रीनबैक में आई मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को दबाव में रखा है, जबकि निवेशक आने वाले गुरुवार को होने वाले ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की ओर नजरें गड़ाए हुए हैं।
उधर एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 157.50 के करीब मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रही है। बाजार में संभावित आधिकारिक हस्तक्षेप के डर ने जापानी मुद्रा के नुकसान को सीमित किया है, लेकिन बैंक ऑफ जापान की नरम रुख वाली दर वृद्धि ने येन पर लगातार दबाव बनाए रखा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और पश्चिम एशिया में गहराते तनाव से अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है।
कमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी रफ्तार फिर से पकड़ ली है। पीली धातु मंगलवार को ठोस बढ़त बनाते हुए 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के करीब पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर में खरीदारी लौटने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद सोने में यह मजबूती दर्ज की गई। इसी बीच बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज़ दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है और मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक अपेक्षित कदम है।

















