अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर हर इंसान अपने सपनों का आशियाना तैयार करता है। हर किसी की यही ख्वाहिश होती है कि उसका मकान न केवल देखने में सुंदर और आकर्षक लगे, बल्कि ढांचागत रूप से बेहद मजबूत भी साबित हो। फिर भी कई मौकों पर घटिया निर्माण सामग्री, अप्रशिक्षित कारीगरों और बुनियादी प्लानिंग के अभाव की वजह से निर्माण कार्य में गंभीर दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं। ऐसी लापरवाहियों के चलते घर का खर्च तय सीमा से काफी आगे निकल जाता है। व्यवस्थित योजना और उचित निर्माण सामग्री का चयन करके कोई भी व्यक्ति अपने घर को मजबूत और खूबसूरत बना सकता है।
शुरुआती वित्तीय खाका और जमीन का हिसाब
निर्माण की दिशा में पहला कदम एक व्यावहारिक बजट तैयार करना होता है। किसी भी तरह का काम शुरू करने से पहले कुल संभावित लागत का आकलन कर लेना जरूरी है। यदि किसी के पास पहले से अपनी जमीन मौजूद है, तो वह सीधे निर्माण कार्य की रूपरेखा पर काम कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, जिनके पास भूखंड नहीं है, उन्हें सबसे पहले जमीन की वास्तविक खरीद लागत को अपने कुल खर्च में जोड़ना चाहिए। जमीन का प्रबंध हो जाने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण भवन का नक्शा तय करना होता है। नक्शे के साथ-साथ ईंट, सीमेंट, सरिया, मजदूरी और फिनिशिंग जैसे विभिन्न मदों के खर्चों की पहले से गणना करना जरूरी माना जाता है।
पेशेवर नक्शा और ठेके के स्पष्ट नियम
भवन से जुड़े एक्सपर्ट देवेन्द्र नाथ तिवारी के अनुसार, यदि कोई अपने मकान को बेहतरीन और विशिष्ट डिजाइन देना चाहता है, तो उसे किसी योग्य आर्किटेक्ट अथवा सिविल इंजीनियर से ही घर का नक्शा बनवाना चाहिए। एक बार नक्शा पूरी तरह तैयार और स्वीकृत हो जाने के बाद, निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका मजदूरी और ठेकेदारी की होती है। ठेकेदारी व्यवस्था के तहत निर्माण कराने की स्थिति में काम पूरा होने की समय सीमा और कुल लागत से जुड़े सभी बिंदुओं को लिखित समझौते में दर्ज कर लेना चाहिए। इसके अलावा भुगतान की किस्तों और संबंधित शर्तों को लेकर भी स्पष्ट नियम कागजों पर तय होने चाहिए।
ईंट, सीमेंट और सरिया का सही चयन
देवेन्द्र नाथ तिवारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी भवन के टिकाऊपन की असली रीढ़ उसकी निर्माण सामग्री होती है। चिनाई के लिए हमेशा नंबर एक श्रेणी की ईंट का ही प्रयोग करना चाहिए, जो गहरे लाल रंग की होती है। ऐसी ईंटों की गुणवत्ता जांचने का आसान तरीका यह है कि दो ईंटों को आपस में टकराकर देखा जाए, जिससे धातु जैसी खनक सुनाई देती है। सीमेंट के मामले में एसीसी अथवा अल्ट्राटेक जैसी कंपनियों का सीमेंट चुनना बेहतर रहता है, जबकि दीवारों की जुड़ाई के कार्य में प्रिज्म सीमेंट का उपयोग भी किया जा सकता है। सरिया चुनते समय हमेशा टीएमटी बार को प्राथमिकता देनी चाहिए। बाजार में उपलब्ध कामधेनु, जिंदल और टाटा जैसे ब्रांड्स को मजबूती के लिहाज से भरोसेमंद माना जाता है।
बालू के प्रकार और उनका सही उपयोग
निर्माण में लगने वाले बालू की गुणवत्ता भी बहुत मायने रखती है। देवेन्द्र नाथ तिवारी के मुताबिक दीवारों की जुड़ाई के लिए सुपर मीडियम बालू का चयन करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। जुड़ाई पूरी होने के बाद जब प्लास्टर की बारी आए, तो उसके लिए सोन नदी के महीन बालू का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि सतह पूरी तरह चिकनी और मजबूत बने। इसके विपरीत, जमीन या फर्श की बेस भराई के लिए गंगा नदी का बालू और दो नंबर ईंट का प्रयोग किया जा सकता है, जिससे लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
अनुभवी कारीगर और नियमित निगरानी
काम को समय पर और बिना बर्बादी के पूरा कराने के लिए अनुभवी कारीगरों की तैनाती बेहद जरूरी होती है। कुशल और सिद्धहस्त मिस्त्री के काम करने से निर्माण की कुल लागत में कमी आती है और प्रोजेक्ट समय सीमा के भीतर पूरा होता है। अकुशल मजदूरों के कारण निर्माण सामग्री की बर्बादी बढ़ जाती है, जिससे बड़ा वित्तीय नुकसान होता है। ऐसे में हमेशा तजुर्बेकार मिस्त्री और मेहनती श्रमिकों को ही काम पर लगाना समझदारी है। इसके साथ ही, यदि मकान का काम ठेके पर सौंपा गया है, तब भी मकान मालिक को नियमित रूप से खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करते रहना चाहिए ताकि काम की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कोताही न रह जाए।



















