उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल की सर्द हवाओं और खूबसूरत वादियों के बीच घूमते हुए अगर आपको अचानक से ताजी चाय की सोंधी महक अपनी ओर खींचे, तो समझ लीजिए कि विजय आपके आसपास ही मौजूद हैं। पिछले करीब दस वर्षों से नैनीताल की तंग गलियों और बाजारों में घूम-घूमकर चाय बेचने वाले विजय आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके पास न तो कोई पक्की दुकान है और न ही कोई आलीशान रेस्टोरेंट, इसके बावजूद उनकी चाय का स्वाद ऐसा है कि शहर के लोग और यहां आने वाले पर्यटक उनके मुरीद हो चुके हैं। विजय मूल रूप से नैनीताल जिले के सतबूंगा क्षेत्र के रहने वाले हैं और अपनी मेहनत के दम पर शहर के बाजारों में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।
तय समय पर बाजारों में शुरू होती है फेरी
विजय का दिन एक तयशुदा और अनुशासित रूटीन के साथ आगे बढ़ता है। वह रोज सुबह और शाम के वक्त अपने थर्मस और बर्तनों में चाय भरकर बाजार की पटरियों पर निकल पड़ते हैं। उनके फेरी लगाने का समय बिल्कुल निश्चित है। वह रोजाना दिन में करीब 11 बजे और शाम के 5 बजे नैनीताल के प्रमुख बाजारों जैसे भोटिया मार्केट, तिब्बती मार्केट और पालिका मार्केट की गलियों में पहुंचते हैं। इन बाजारों में पहुंचते ही स्थानीय दुकानदारों और खरीदारों के बीच विजय की आवाज या उनकी मौजूदगी का इंतजार शुरू हो जाता है। कई लोग ऐसे हैं जो अपनी दिनचर्या के हिसाब से उनके आने के समय का खास ख्याल रखते हैं और चाय की चुस्की लेने के लिए अपनी दुकानों के बाहर ही उनका इंतजार करते हैं।
कई तरह की चाय और किफायती दाम
चाय बनाने की कला में माहिर विजय यूं तो आठ से दस प्रकार की अलग-अलग चाय बनाने की पूरी कला जानते हैं, लेकिन बाजार की मांग और अपनी सुविधा के अनुसार वह फिलहाल मुख्य तौर पर तीन खास वैरायटी ही बेचते हैं। इनमें गर्मागर्म मसाला चाय, तरोताजा करने वाली लेमन टी और बेहद लोकप्रिय बटर टी यानी तिब्बती नमकीन चाय शामिल है। उनके यहां चाय की कीमत बेहद मामूली और हर किसी की पहुंच में है। विजय का एक कप चाय मात्र 15 रुपये में मिल जाता है। अपने इस छोटे से और अनूठे फेरी वाले कारोबार के जरिए वह रोजाना 100 से अधिक कप चाय बेच लेते हैं। उनकी इस छोटी सी आजीविका से उनके पूरे परिवार का खर्च चलता है। विजय का मानना है कि जब कोई ग्राहक उनकी चाय पीकर तारीफ करता है और दोबारा चाय की मांग करता है, तो वही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई और खुशी होती है।
खास है तिब्बती बटर टी की कहानी
विजय की चाय में सबसे बड़ा आकर्षण उनकी पारंपरिक बटर टी है, जिसे लोग नमकीन चाय के नाम से भी जानते हैं। इस खास चाय को स्थानीय तिब्बती समुदाय और भोटिया समुदाय के लोग बेहद चाव से पीते हैं। इस अनोखी चाय को बनाने की विधि के बारे में विजय बताते हैं कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश और देहरादून में रहने के दौरान वहां के तिब्बती समुदाय के जीवन को बहुत करीब से देखा था। वहीं रहते हुए उन्होंने प्रामाणिक तरीके से बटर टी बनाने की कला सीखी। इसके अलावा उन्होंने तिब्बती मार्केट में खुद काम भी किया था, जिससे उन्हें इस पारंपरिक पेय को तैयार करने का गहरा अनुभव प्राप्त हुआ। भोटिया मार्केट के एक स्थानीय दुकानदार दिनेश भोटिया का कहना है कि विजय जो बटर टी बनाते हैं, उसका स्वाद बिल्कुल पारंपरिक तिब्बती और भोटिया शैली जैसा ही होता है। इस चाय में मक्खन और नमक का खास इस्तेमाल किया जाता है, जो पहाड़ों के ऊंचे और ठंडे इलाकों में सर्दियों के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। कई इलाकों में इस बटर टी को लोग सत्तू के साथ भी बड़े चाव से लेते हैं।
ग्राहकों और दुकानदारों के बीच लोकप्रिय
नैनीताल के बाजारों में काम करने वाले व्यापारियों के बीच विजय की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। पालिका मार्केट में दुकान चलाने वाले रमन बताते हैं कि उन्हें हर दिन विजय की चाय का बेसब्री से इंतजार रहता है। उनके अनुसार विजय काफी लंबे अरसे से बाजार में ये तीनों वैरायटी की चाय पिला रहे हैं और उनकी चाय की गुणवत्ता लोगों को हमेशा आकर्षित करती है। रमन का यह भी कहना है कि विजय सिर्फ बेहतरीन चाय ही नहीं बनाते, बल्कि उनका स्वभाव भी बेहद मिलनसार और अच्छा है। इसके अलावा, एक अन्य स्थानीय दुकानदार आकाश का कहना है कि सुबह और शाम के वक्त विजय की चाय पीना उनके दिन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। बाजार में अब विजय के कई ऐसे पक्के ग्राहक बन चुके हैं जो किसी और दुकान पर जाने के बजाय सिर्फ और सिर्फ विजय के हाथ की बनी चाय पीना पसंद करते हैं।



















