चित्तौड़गढ़ में जैसे-जैसे रक्षाबंधन का पावन पर्व नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे स्थानीय बाजार पूरी तरह से सज-धज कर तैयार हो चुके हैं। इस त्योहारी सीजन में दुकानों पर विभिन्न रंगों और आकर्षक डिजाइनों से सजी राखियां ग्राहकों का खास ध्यान अपनी तरफ खींच रही हैं। इस बार के बाजार में केवल पुरानी और पारंपरिक शैलियों तक ही सीमित नहीं रहा गया है, बल्कि आधुनिक फैशन के मेल से तैयार कई नए विकल्प भी बिक्री के लिए उतारे गए हैं। यही वजह है कि खरीदारों ने सामान्य दिनों से काफी पहले यानी करीब डेढ़ महीने पहले ही खरीदारी का सिलसिला शुरू कर दिया था। पिछले साल की तुलना में इस बार खरीददारों के बीच कहीं अधिक उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए सबसे हटकर और अनोखी राखी की तलाश कर रही हैं, जबकि छोटे बच्चों, नौजवानों और पूरे परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी बाजार में अलग-अलग वैरायटी के स्टॉक मौजूद हैं।
डिजाइन और लुक में आए खास बदलाव
इस बार राखी की बनावट और उसके समग्र रूप में काफी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खासकर युवा वर्ग और युवतियों के बीच ब्लू आई तथा चाम शैली वाली राखियां खासी पसंद की जा रही हैं। इसके अलावा बाजार में मोतियों से बनी राखियां, डायमंड जड़ित राखियां, स्टोन वर्क, चंदन की खुशबू वाली राखियां, बड़े आकार के विकल्प, ब्रेसलेट जैसी दिखने वाली राखियां, भैया-भाभी के लिए जोड़ी वाली राखियां, बच्चों के लिए स्पेशल किट, स्पिनर्स वाली वैरायटी, भगवान श्रीराम के स्वरूप वाली राखी, कश्मीरी वॉच राखी, चूड़ा डिजाइन और विविध रंगों वाले आकर्षक डोरे भी ग्राहकों को बेहद भा रहे हैं। बच्चों के बीच कार्टून कैरेक्टर और स्पिनर्स वाली चीजें मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं, जबकि युवाओं के बीच स्टाइलिश और हाथों में कड़े की तरह पहनी जाने वाली ब्रेसलेट स्टाइल की भारी मांग चल रही है।
कश्मीरी और चंदन की वैरायटी में पहली बार नए पैटर्न
इस त्योहारी सीजन में कुछ ऐसी खास वैरायटी भी बाजार में उतरी हैं जो पहले अमूमन देखने को नहीं मिलती थीं। कश्मीरी कारीगरी, चंदन और मोतियों के काम वाली राखियों में इस बार कई बिल्कुल नए पैटर्न और डिजाइन देखने को मिल रहे हैं। डायमंड सेगमेंट में भी पिछली बार के मुकाबले कहीं अधिक वैरायटी ग्राहकों के सामने है। भैया-भाभी की जोड़ी वाली राखियां भी नए और आधुनिक अंदाज में बेची जा रही हैं, जिन्हें लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। इसके अलावा, घरों को सजाने के काम आने वाले गूथने योग्य रंगीन डोरों की भी अच्छी खासी बिक्री हो रही है। इन रंगीन डोरों को लोग अपने घरों के मुख्य प्रवेश द्वार और खिड़कियों पर बांधते हैं, जिसे पारंपरिक और धार्मिक दृष्टिकोण से काफी शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस बार राखियों के साथ-साथ सजावटी डोरों की मांग में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई है।
हर बजट के लिए विकल्प और पूजन थालियों की बढ़ी बिक्री
स्थानीय बाजारों में हर आय वर्ग और बजट के ग्राहकों के लिए बेहतरीन और किफायती विकल्प मौजूद हैं, जिससे खरीदारों को अपनी पसंद की वस्तुएं चुनने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बांधने के साथ-साथ भगवान की पूजा करने की भी पुरानी परंपरा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने कंकू-चावल की थाली किट और विभिन्न कलात्मक डिजाइनों वाली सजी-धजाई पूजन थालियों को भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है। आज के समय में रक्षाबंधन केवल एक साधारण पर्व भर नहीं रह गया है, बल्कि यह बदलते हुए फैशन और लोगों की व्यक्तिगत पसंद का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। हर साल बाजार कुछ नया लेकर आता है और इस बार भी राखियों के आधुनिक रूपों ने लोगों का दिल जीत लिया है। पारंपरिक और आधुनिकता का यह अनूठा मेल ग्राहकों को बहुत रास आ रहा है। कुल मिलाकर त्योहार से पहले का यह माहौल इस बात की साफ गवाही दे रहा है कि भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते के उत्सव को लेकर लोगों में जबरदस्त उमंग है।



















